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दोनों गोल्ड देश के नाम, माता-पिता की वजह से जीते: मनु

16 साल की मनु भाकर ने उपलब्धि का श्रेय पिता रामकिशन भाकर और मां सुमेधा भाकर को दिया है।

Danik Bhaskar | Mar 15, 2018, 03:46 AM IST

झज्जर. शूटिंग विश्व कप में 10 मीटर सिंगल और 10 मीटर मिक्स्ड डबल एयर पिस्टल में देश को पहली बार दो गोल्ड दिलाने वाली 16 साल की मनु भाकर ने उपलब्धि का श्रेय पिता रामकिशन भाकर और मां सुमेधा भाकर को दिया है। मनु ने कहा कि अगर माता-पिता का साथ न होता तो वह वर्ल्ड चैंपियनशिप तक नहीं पहुंच पातीं।


मैक्सिको से मंगलवार देर रात भारत लौटी मनु भाकर ने कहा कि इस वर्ल्ड कप में 38 देशों के शूटर आए थे। जब मैक्सिको जाने वाले भारतीय दल में उसका चयन हुआ तब उसे विश्वास ही नहीं था कि वह देश की टीम में चुनी गई है। चयन के बाद उसने अपनी प्रेक्टिस पर फोकस रखा। उसे चयन के साथ पूरा भरोसा था कि वह मेडल जीतेंगी। जब मेडल आया तो लगा मेहनत रंग लाई है। इस वर्ल्ड कप के 25 मीटर एयर पिस्टल में मेडल नहीं जीत पाने का दुख मनु को नहीं है। आगे भी उसका फोकस 10 मीटर एयर पिस्टल पर रहेगा।

बेटियों की प्रतिभा को पहचानें

झज्जर के गोरिया गांव निवासी मनु भाकर ने अभिभावकों से आह्वान किया कि वे बेटियों की प्रतिभा को पहचानें और उसे दबने न दें। मनु ने कहा कि आज वह जो कुछ हैं अपने माता-पिता की बदौलत हैं। उसने जिस खेल काे खेलने और प्रेक्टिस की इच्छा जताई माता-पिता ने कभी मना नहीं किया। दो साल की मेहनत में वर्ल्ड कप जीतने वाली मनु ने कहा कि अगर वह शूटिंग खेल नहीं अपनाती और बाॅक्सिंग और जूडो कराटे ही खेलती रहती।

कोच ने बदलवाई खेल नीति

मनु देश की इकलौती महिला शूटर रही जो जूनियर कैटेगरी के बाद भी सीधे सीनियर के लिए चयनित हुईं। खिलाड़ी पहले सब जूनियर व जूनियर स्पर्धा खेलते हैं। फिर सीनियर के लिए चयन होता है। मनु देश की इकलौती ऐसी महिला शूटर रहीं, जिसकी प्रतिभा को सबसे पहले देश के प्रख्यात शूटर और ओलिंपिक पदक विजेता जसपाल राणा ने परखा। खेल मंत्रालय ने नीति बदली और मनु का चयन सीनियर टीम में कराया।

सिडनी जूनियर वर्ल्ड कप पर फोकस: मनु अब 17 से 30 मार्च तक आॅस्ट्रेलिया के सिडनी में होने वाली जूनियर शूटिंग वर्ल्ड कप में देश के लिए खेलेंगी। वह इसके लिए अपने कोच के साथ गुरुवार को सिडनी के लिए रवाना होंगी। मनु ने विश्वास जताया कि देश को गौरव दिलाने का उसका सफर सिडनी में भी जारी रहेगा। मनु संभवत: 15 अप्रैल को अपने गांव गोरिया और स्कूल में आएंगी।