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फर्जी दस्तावेज लगा स्कूली नेशनल चैंपियनशिप में उतरा कॉलेज का छात्र, शॉटपुट में सिल्वर मेडल जीतने पर डोप टेस्ट नहीं कराया तो खुला फर्जीवाड़ा

राष्ट्रीय स्तर तक पर अधिकारियों की आंखों में धूल झोंककर कॉलेज का एक छात्र शॉटपुट प्रतियोगिता में शामिल हुआ।

Danik Bhaskar | Dec 21, 2017, 07:47 AM IST

रोहतक. 63वीं स्कूली नेशनल एथलेटिक्स चैंपियनशिप में बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। जिला से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक पर अधिकारियों की आंखों में धूल झोंककर कॉलेज का एक छात्र शॉटपुट प्रतियोगिता में शामिल हुआ। उसने मंगलवार को सिल्वर मेडल भी जीत लिया, लेकिन जब उसे डोप टेस्ट के लिए बुलाया तो वह बाथरूम जाने की कहकर नहीं आया।


रोहतक निवासी यह खिलाड़ी 2015 से भिवानी में संचालित साई के एथलेटिक्स सेंटर में ट्रेनिंग ले रहा है। उसने जिले के ज्योति प्रकाश स्कूल के फर्जी दस्तावेज लगाकर खुद को उस स्कूल का खिलाड़ी बताया, जबकि उसने वहां दाखिला ही नहीं लिया हुआ था। वहीं, दिल्ली से बनवाए उसके जन्म प्रमाणपत्र पर सवाल खड़े हो गए हैं। उसके डोप टेस्ट न करवाने की वजह से स्कूल गेम्स फेडरेशन आॅफ इंडिया ने उसका मेडल व रैंकिंग को रद्द करते हुए चैंपियनशिप से बाहर कर दिया है। वहीं, शिक्षा विभाग भी इस मामले को हल्के में लेकर दबाने की कोशिश में है। मामला प्रकाश में आने के 24 घंटे बाद आरोपी खिलाड़ी गोपनीय ढंग से एसजीएफआई व स्कूल शिक्षा विभाग के अफसरों के पास पहुंचा और बयान में बताया कि वह कॉलेज का छात्र है। जन्म प्रमाणपत्र में आयु कम लिखाकर वह स्कूल स्तर पर होने वाली नेशनल चैंपियनशिप में हिस्सा लेता है।

अंडर 17 स्कूली चैंपियनशिप में बना चुका है रिकॉर्ड
वर्ष 2016 में गुजरात के वड़ोदरा जिले में हुई अंडर 17 आयु वर्ग की नेशनल एथलेटिक्स चैंपियनशिप में हरियाणा की तरफ से खेलते हुए शाॅटपुट में गोल्ड मेडल जीतकर रिकाॅर्ड बनाया था। अंडर 17 आयु वर्ग के खिलाड़ियों का नाडा डोप टेस्ट नहीं लेती। अंडर 19 आयु वर्ग की एथलेटिक्स चैंपियनशिप में भी खिलाड़ी को डोप टेस्ट होने की संभावना नहीं थी, लेकिन सिल्वर मेडल जीतने के बाद उसे जैसे ही नाडा टीम ने डोप टेस्ट देने के लिए बुलाया तो खिलाड़ी बहाना बनाकर चला गया। खिलाड़ी द्वारा सैंपल न दिए जाने से इस बात की प्रबल संभावना है कि उसने प्रतिबंधित दवाओं का सेवन किया होगा।

डीईओ बोलीं- चैंपियनशिप खत्म होने के बाद करेंगे मामले की जांच : जिला शिक्षा अधिकारी सुनीता रूहिल ने बताया कि डोप टेस्ट न देने वाला खिलाड़ी स्कूल या कॉलेज का है, अभी इस बारे में हमें जानकारी नहीं है। खिलाड़ी के परिजनों व स्कूल संचालक को बुलाया गया है। पूरे मामले की जांच चैंपियनशिप खत्म होने के बाद करेंगे। अभी कुछ कहना जल्दबाजी होगी।

पहुंची जांच टीम ने खंगाले दस्तावेज, संचालक ने दस्तावेज, हस्ताक्षर और मुहर को बताया बोगस
आरोपी खिलाड़ी ने ज्योति प्रकाश सीनियर सेकेंडरी स्कूल में कक्षा 11वीं का छात्र होने के दस्तावेज लगाए हैं। मामला प्रकाश में आने के 24 घंटे बाद जांच टीम ने स्कूल में पहुंचकर दस्तावेज खंगाले तो उसमें खिलाड़ी का कोई रिकॉर्ड नहीं मिला। स्कूल संचालक राजीव मलिक ने बताया कि स्कूल की तरफ से आवेदन में लगाए गए दस्तावेज व उसके ऊपर हस्ताक्षर व मुहर बोगस है। खिलाड़ी का जन्म प्रमाणपत्र दिल्ली का बना हुआ है। आरोपी खिलाड़ी के बारे में पूरी जानकारी अधिकारियों को है। हमारे स्कूल को बदनाम करने की साजिश है।

भिवानी के साई सेंटर में प्रैक्टिस करता है आरोपी खिलाड़ी : सरहदी
भिवानी जिले में चल रहे साई के एथलेटिक्स खेल के सेंटर के कार्यवाहक सीओओ सतीश कुमार सरहदी ने बताया कि आरोपी खिलाड़ी वर्ष 2015 से सेंटर में प्रैक्टिस कर रहा है। अब हमें यह नहीं मालूम है कि वो स्कूल का छात्र है या कॉलेज का। रही बात डोप टेस्ट की तो उस पर नाडा की टीम व स्कूल शिक्षा विभाग को फैसला लेना है। हमारे सेंटर में डोप को लेकर लगातार एवेयरनेस कार्यक्रम चलाए जाते हैं।

नाडा टीम ने 26 खिलाड़ियों का लिया डोप टेस्ट : नाडा टीम के सदस्यों का आरोप है कि आयोजन स्थल पर जांच प्रक्रिया पूरी करने के लिए खिलाड़ियों को समय पर टेस्ट देने के लिए नहीं भेजा जाता है। लिहाजा समय रहते खिलाड़ी का डोप टेस्ट करने में असुविधा हो रही है। मेजबानों को कई बार अपनी गाइडलाइन का हवाला देकर सहयोग करने को कहा गया, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। हरियाणा के एक खिलाड़ी के संदेह के दायरे में आने के बाद तीसरे दिन मैदान से पकड़कर 26 ब्वॉयज व गर्ल्स खिलाड़ियों के सैंपल लिए गए हैं।