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ये सास हैं खास, रिंग में बहुओं के पंच को सास घर संभाल दे रही गोल्डन मूव

टीवी सीरियल हो या फिर रियल जिंदगी में सास बहुओं की नोकझोंक। ये नजारे सामान्य तौर पर देखने को मिल जाते हैं।

Danik Bhaskar | Jan 22, 2018, 08:10 AM IST

रोहतक. टीवी सीरियल हो या फिर रियल जिंदगी में सास बहुओं की नोकझोंक। ये नजारे सामान्य तौर पर देखने को मिल जाते हैं। लेकिन विवाहित महिला खिलाड़ियों के जीवन में सास का रोल अहम है। नेशनल व इंटरनेशनल चैंपियनशिप में खेलने के दौरान महिला खिलाड़ियों की सास उनकी अनुपस्थिति में परिवार की परवरिश में अहम भूमिका अदा कर रही हैं। यहां बात हो रही है हरियाणा की पहली अर्जुन अवार्डी महिला बाॅक्सर कविता चहल व अर्जुन अवार्डी मणिपुर के इंफाल की लेशराम सरिता देवी की सास की। जिन्होंने बाॅक्सर बहुओं के बच्चे होने के बाद भी उन्हें खेल से पीछे हटने को नहीं कहा, बल्कि विश्व स्तर पर छाने के लिए प्रेरित भी किया। इस बारे में बाक्सर बहुएं अपनी सास के प्रति शुक्रगुजार है कि उन्हें हरसंभव हिम्मत देकर सपने को पूरा करने में अहम कड़ी साबित हो रही हैं।

मुझे लोगों की परवाह नहीं, बहू जब रिंग में उतरती है तो मेडल जीतने की दुआ करती हूं

हरियाणा की पहली महिला अर्जुन अवार्डी कविता चहल 82 किग्रा भार वर्ग में बाॅक्सिंग करती हैं। उनका विवाह रोहतक में उत्तम विहार निवासी सुधीर खर्ब से हुआ है। घर में 52 वर्षीय सास कृष्णा देवी, ससुर राज सिंह के अलावा एक 3 साल का बेटा विराज है। सास कृष्णा बताती है कि मैंने शुरू से ही बहू को खेल में आगे आने के लिए प्रोत्साहित किया। मैंने समाज व लोगों द्वारा की जाने वाली बातों की कभी परवाह नहीं की। मुझे जब भी पता चलता है कि बहू रिंग में उतरेगी तो मैं मेडल जीतने की दुआ करती हूं। सुबह 5 बजे तक उठने के बाद पति के लिए खाना तैयार करने में जुटती हूं। फिर 7 बजे तक नाती विराज उठ जाता है और उसे नाश्ता कराती हूं। इसके बाद फिर पूरा दिन घर की व्यवस्था संभालने में बीत जाता है। अब मेरा एक सपना है कि मेरी बहू ओलिंपिक व कॉमनवेल्थ गेम्स में देश के लिए गोल्ड मेडल जीते।

सास ने मुझे बहू नहीं माना, बेटी बनाकर हर कदम पर साथ दिया, गोल्डन स्टार है मेरी सास
मणिपुर से अर्जुन अवार्डी व पूर्व विश्व चैंपियन लेशराम सरिता देवी बाॅक्सिंग के लाइटवेट में खेलती हैं। इंफाल निवासी बाॅक्सर सरिता देवी ने सफलता का श्रेय अपनी सास इनोथाबी देवी व पति थोई बॉक्संग को देती हैं।

सरिता बताती हैं कि मैं बहुत खुशकिस्मत हूं कि मुझे इतनी अच्छी ससुराल मिली। फरवरी 2013 में मैने बेटे तोमथिल को जन्म दिया। तब मुझे लगा कि मेरा जीवन घर में सिमट जाएगा। मैंने 65 वर्षीय सास इनोथाबी देवी को खेलते रहने की इच्छा जाहिर की तो उन्होंने मेरे प्रस्ताव पर फौरन सहमति देते हुए मेरे बेटे की परवरिश शुरू कर दी। आज मेरा बेटा 5 साल का है और वो प्री नर्सरी में पढ़ रहा है। मैं जब घर पर होती हूं तो घर के कामों में पूरा हाथ बंटाती हूं। जब कैम्प में शामिल होने या चैंपियनशिप में खेलने के लिए राज्य या देश से बाहर जाना होता है तो वो एक सुपर मॉम का रोल अदा करती हैं। जब भी मेरी बाउट होने के बारे में पता चलता है तो वे उत्सुकतावश मेरे पति से खेल प्रदर्शन के बारे में पूछती रहती हैं। मेडल जीतने का पता चलते ही वो खुशी से चहक उठती हैं।