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बढ़ सकती है लोगों की परेशानी, पहले 15 दिन में एक बार आती थी अब 24 दिन के अंतर पर आएगी नहर

प्रदेश भर में फसल का सिंचाई का दबाव नहीं रहा, लेकिन पेयजल की डिमांड बढ़ गई। किल्लत बढ़ने पर विभाग ने जल वितरण...

Danik Bhaskar | Apr 01, 2018, 02:35 AM IST
प्रदेश भर में फसल का सिंचाई का दबाव नहीं रहा, लेकिन पेयजल की डिमांड बढ़ गई। किल्लत बढ़ने पर विभाग ने जल वितरण शेड्यूल में बदलाव कर दिया। विभिन्न जिलों की अब पांच ग्रुपों में सप्लाई निर्धारित की गई है। जिस कारण महेंद्रगढ़ जिले को नहरी पानी 10 दिन देरी से मिलेगा। जिससे शहर व गांवों में पेयजल संकट बढ़ने की संभावना बढ़ गई है।

बता दें कि सरकार द्वारा विभिन्न जिलों की डिमांड के मुताबिक नहरी जल वितरण शेड्यूल बनाया गया है। 22 जिलों को चार ग्रुप बांटा गया हैं, प्रत्येक जिले को 15 दिन के अंतराल पर 15 दिन लगातार पानी मिलता रहा है, लेकिन गर्मी का सीजन शुरू होते ही यमुना में पानी कम हो गया। जिस कारण चार ग्रुपों में जल वितरण करना संभव नहीं हो रहा। समाधान के लिए विभाग ने पांच ग्रुपों में जल वितरण की योजना बनाई है। महेंद्रगढ़ जिले को खुबड़ू हैड से 30 मार्च की रात 12 बजे पानी मिलना था। लेकिन शेड्यूल में बदलाव होने के कारण अब 9 अप्रैल को टर्न मिलेगा।

11 अप्रैल की रात नारनौल डिविजन में पानी पहुंचने की संभावना है। इधर नसीबपुर के 16 फीट गहरे वाटर टैंक में 20 दिन सप्लाई का पानी स्टॉक होता है। जबकि पानी 24 दिन के अंतराल पर मिलेगा। जिससे लोगों को चार दिन पेयजल संकट का सामना करना पड़ेगा। जानकारी के मुताबिक गांवों के जल वितरण में राशनिंग शुरू कर दी गई। नांगल दुर्गू, पाचनोता, मूसनोता, नांगल पीपा, छापड़ा बीबीपुर, दौंखेरा आदि गांवों में पानी की स्थिति गंभीर होने लगी है।

पशुओं में हीट स्ट्रोक का खतरा

डार्कजोन के गांवों में पशुओं की पेयजल व्यवस्था जोहड़ों पर निर्भर है। नांगल चौधरी, निजामपुर ब्लॉक में छोटे-बड़े करीब 450 जोहड़ हैं, लेकिन 80 प्रतिशत जोहड़ सूखे पड़े हैं। गर्मी बढ़ने तथा पानी नहीं मिलने की स्थिति में मवेशियों को हीट स्ट्रोक का खतरा बढ़ गया। लू के प्रभाव से पशुओं का दूध कम हो सकता है। जिसका खामियाजा पशु पालकों को भुगतना पड़ेगा।

डार्कजोन में सप्लाई का अंतराल बढ़ाना अनुचित : सर्व समाज मंच के हलका प्रधान राजेंद्र प्रसाद भुंगारका ने बताया कि नांगल चौधरी, निजामपुर ब्लॉक डॉर्कजोन घोषित हैं। ग्रामीणों की कृषि, पेयजल व्यवस्था नहरी पानी पर आधारित है। बावजूद विभाग ने टर्न की अंतराल अवधी 15 से बढ़ाकर 24 दिन कर दी। इससे ग्रामीणों का पशुपालन, कृषि व पेयजल संकट बढ़ जाएगा। उन्होंने सरकार से हिस्से के अतिरिक्त पानी की गुहार लगाई है।

11 अप्रैल को मिलेगा पानी, जोहड़ भरना जरुरी

सिंचाई विभाग के जेई अरुण कुमार ने बताया कि शैड्यूल में बदलाव होने के कारण 24 दिन के अंतराल पर पानी मिलेगा। नारनौल डिविजन में 11 अप्रैल को पानी पहुंचेगा। जिससे वाटर टैंक तथा जोहड़ भरने की प्राथमिकता रहेगी।

भाप बनकर उड़ जाता है 30 प्रतिशत पानी

विभागीय विशेषज्ञों के मुताबिक अभी करीब 40 डिग्री तापमान है, अगले महीने 45 से 48 डिग्री हो जाएगा। तब टंकियों में पानी उबलने लगेगा। जिससे 25-30 प्रतिशत पानी भाप बनकर उड़ जाएगा। 5-10 प्रतिशत पानी पाइप लीकेज में बर्बाद हो जाता है। ऐसे में वाटर टैंकों में स्टॉक पानी से ग्रामीणों की पर्याप्त आपूर्ति होना संभव नहीं।

अगले महीने करनी पड़ेगी राशनिंग : एसडीओ