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आरटीई आरक्षित सीटों पर नहीं मिल रहा हकदारों को दाखिला, प्रबंधन के खिलाफ 50 अभिभावकों ने दायर की याचिका

रोहतक | आरटीई एक्ट 2009 के तहत आरक्षित सीटों के हकदारों को प्राइवेट स्कूलों में दाखिला नहीं दिया जा रहा है। जिले में 200...

Bhaskar News Network | Last Modified - Apr 01, 2018, 03:30 AM IST

रोहतक | आरटीई एक्ट 2009 के तहत आरक्षित सीटों के हकदारों को प्राइवेट स्कूलों में दाखिला नहीं दिया जा रहा है। जिले में 200 से ज्यादा नर्सरी के स्कूल संचालित हैं। इनमें 25 फीसदी आरक्षित सीटों पर स्कूल संचालक आर्थिक रूप से सम्पन्न परिवार के बच्चों को दाखिला देकर मोटी फीस वसूल रहे हैं। आर्थिक रूप से कमजोर परिवार के मुखिया आरटीई के तहत बच्चे को दाखिला दिलाने स्कूल में जाते हैं तो संबंधित स्टाफ या प्रिंसिपल की अोर से एक्ट का पता न होने का हवाला देकर लौटाया जा रहा है। दाखिला प्रक्रिया शुरू होने के बाद ऐसे अभिभावकों को स्कूल प्रशासन के चक्कर काटने पड़ते हैं, लेकिन बाद में भी उन्हें निराशा हाथ लग रही है।

अभिभावकों का आरोप-स्कूल संचालक आरटीई एक्ट 2009 का पता न होने का हवाला देकर बैरंग लौटा रहे

प्राइवेट स्कूलों में रिजर्व सीटों पर दाखिले से प्रबंधन की ना के बाद कोर्ट पहुंचे अभिभावक

इन चार केसों से समझिये सिस्टम के हालात

केस-1

फतेहपुरी कॉलोनी की मीना देवी के बच्चे हनुमान कॉलोनी के एक प्राइवेट स्कूल में पढ़ रहे हैं। आरोप है कि स्कूल संचालक दोनों बच्चों की 13 सौ रुपए फीस प्रतिमाह भरने का दबाव बना रहे हैं। जब मैंने असमर्थता जताई तो वे उपेक्षापूर्ण व्यवहार कर रहे हैं। कोई रास्ता न दिखने पर न्याय पाने के लिए मजबूरन कोर्ट का सहारा लेना पड़ा।

केस-2: सुनारियां कलां की सोनिया ने बेटे का दाखिला एक इंटरनेशनल स्कूल में कराने पहुंची। यहां इन्होंने आरक्षित सीट पर दाखिला देने का प्रार्थनापत्र दिया। पहले तो स्टाफ ने दाखिला देने से मना कर दिया। फिर बोले डीईओ से लिखा लाओ कि सरकारी स्कूल में सीट में नहीं खाली है। मजबूरन मनमानी के खिलाफ कोर्ट में केस डालना पड़ा।

केस-3: माता मंदिर चौक निवासी प्रिया कपूर ने सोनीपत रोड के सेक्टर तीन स्थित मोड़ के समीप स्थित एक सीनियर सेकेंडरी स्कूल में बेटे का पहली कक्षा में दाखिला दिलाने गईं। स्कूल संचालक ने आरटीई एक्ट की जानकारी न होने की बात कहकर प्रवेश देने से मना कर दिया। कोर्ट में केस दाखिल किए तीन माह बीत गए, अभी तक स्कूल संचालक ने कोई जवाब दाखिल नहीं किया। अब कोर्ट ने अंतिम तारीख दी है।

केस-4 : शिव कॉलोनी की सरिता ने अंबेडकर चौक स्थित एक सीनियर सेकेंडरी स्कूल में नर्सरी कक्षा में बच्चे को दाखिला दिलाने गईं थीं। लेकिन उन्हें स्कूल के रिसेप्शन काउंटर से ही आरटीई एक्ट का पता न होने की बात कहकर लौटा दिया गया। दिसंबर माह से अब तक चार तारीख पड़ चुकी है। लेकिन डीईईओ और स्कूल प्रिंसिपल की ओर से कोर्ट में कोई जवाब नहीं दाखिल नहीं किया गया।

वर्ष 2014 में एक केस में हाईकोर्ट ने दिया था आदेश

पंजाब हरियाणा उच्च न्यायालय ने 3 अप्रैल 2014 को आदेश दिया था कि आरटीई एक्ट 2009 में 25 फीसदी सीटों पर हर प्राइवेट स्कूल में पहली कक्षा से आठवीं कक्षा तक में सरकारी स्कूल की निर्धारित फीस पर ही छात्र पढ़ने के अधिकारी होंगे। इसके अलावा छात्र जिस स्कूल में पढ़ रहा है, आरटीई एक्ट के अनुसार उसी स्कूल में फीस माफ रहेगी। अगर प्राइवेट स्कूल संचालक ऐसा नहीं करते हैं तो उनके खिलाफ अवमानना का केस दायर हो सकता है।

प्राइवेट स्कूलों की मनमानी पर रोक नहीं

आरटीई एक्ट 2009 के तहत प्राइवेट स्कूल संचालक बच्चे को 25 फीसदी आरक्षित सीट पर दाखिला देने से मना नहीं कर सकते हैं। लेकिन डीईओ और डीईईओ की तरफ से एक्ट का सख्ती से पालन न कराने की वजह से स्कूल संचालक आर्थिक रूप से कमजोर परिवार के मुखिया को परेशान कर रहे हैं। अब अभिभाावकों में जागरुकता आनी शुरू हो गई है। निशुल्क कानूनी सहायता केंद्र में अभी तक 50 से अधिक अभिभावकों ने स्कूलों की मनमानी के खिलाफ केस दाखिल किया है। - प्रवीण कुमार कलसन, जिला प्रधान

दो किलोमीटर के दायरे में सरकारी स्कूल ही नहीं

अभिभावकों को गुमराह किया जा रहा है। एक्ट के तहत प्रावधान है कि दो किमी के दायरे में सरकारी स्कूल नहीं है तो 25 फीसदी आरक्षित सीट पर विद्यार्थी काे नर्सरी से प्रवेश दिया जाएगा। यदि दो किमी के दायरे में सरकारी स्कूल है और वहां पर सीट रिक्त नहीं है तो स्कूल मुखिया से रिक्त सीट न होने की बात लिखवाकर प्राइवेट स्कूल में देने पर बच्चे को दाखिला दिए जाने का नियम है। जिले में संचालित स्कूलों में नियमों का पालन हो रहा है। प्राइवेट स्कूल संचालक आरटीई और नियम 134 ए में निर्धारित गाइडलाइंस को पूरी तरह अमल में ला रहे हैं। - रवींद्र नांदल, जिला प्रधान प्राइवेट स्कूल संघ

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