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20 हजार की जगह िमल रहा 1428 क्यूसेक पानी, फसलें प्रभावित

Bhaskar News Network | Last Modified - Feb 01, 2018, 01:20 PM IST

तापमान स्थिर रहने से ग्लेशियर पिघलने की सुस्त हुई रफ्तार ने जल संकट पैदा कर दिया है। जरूरत के 20 हजार क्यूसेक की जगह...
तापमान स्थिर रहने से ग्लेशियर पिघलने की सुस्त हुई रफ्तार ने जल संकट पैदा कर दिया है। जरूरत के 20 हजार क्यूसेक की जगह हथिनी कुंड बैराज से मात्र 1428 क्यूसेक पानी की दैनिक आपूर्ति नहरों को हो रही है। फरवरी व मार्च में इसमें भी कटौती हो सकती है। इस स्थिति से निपटने के लिए सरकार की प्रदेश को 5 जोन में बांटने की तैयारी है। ऐसा होने से नहरबंदी का समय 24 दिन की बजाए 32 दिन तक बढ़ जाएगा।

इधर, गेहूं व दलहनी फसलों का पीक पीरियड चल रहा है। यदि फसलों को समय से पानी नहीं मिला तो पैदावार प्रभावित होगी। इस बार सर्दी के मौसम में पहाड़ों पर बरसात बेहद कम होने और लगातार तापमान में गिरावट के चलते हथिनी कुंड बैराज में सूखे जैसे हालात बन रहे हैं। सिंचाई विभाग के मुख्यालय की ओर से अधिकारियों-कर्मचारियों को हर हाल में पानी की बर्बादी रोकने और पीने के पानी को प्राथमिकता देने की हिदायत दी गई है। अब तक चार जोन में बांटकर प्रदेश में पानी की सप्लाई नहरों के माध्यम से होती रही है, लेकिन संभावित जल संकट पर चंडीगढ़ में शीर्ष अधिकारियों की हुई बैठक के बाद अब प्रदेश को 5 जोन में बांटने की तैयारी है, ताकि काफी हद तक स्थिति को नियंत्रित किया जा सके। 4 जोन रहने पर हर 24 दिन बाद नहर में पानी की आपूर्ति शुरू हो जाती रही है। लेकिन 5 जोन बनने के बाद क्लोजर पीरियड 8 दिन और बढ़ जाएगा। ऐसे में 32 दिन बाद नहर में पानी की सप्लाई होगी।

रोहतक जिले को भुटाना ब्रांच, जेएलएन और भालौठ सब ब्रांच से पानी की आपूर्ति की जाती है, लेकिन क्षमता और डिमांड के अनुसार पानी नहीं मिलने से ही पिछले सप्ताह ही काहनौर क्षेत्र के किसानों ने दो दिन लगातार धरना प्रदर्शन किया था। 4 फरवरी को बीएसबी में पानी छोड़ने का शेड्यूल है, लेकिन 5 जोन बनने पर पानी की आपूर्ति में विलंब होगा, जो पीने के पानी और सिंचाई के लिए मुश्किल और बढ़ाएगा।

पहले भी फेल हो चुका है 5 जोन का प्रयोग

वर्ष 2016 में जल संकट से निबटने के लिए प्रदेश सरकार ने हरियाणा को 5 जोन में बांटकर जलापूर्ति करवाई थी, लेकिन यह प्रयोग पूरी तौर पर फेल साबित हुआ। एक रोटेशन और वह भी मात्र 18 दिन में ही फैसला वापस करते हुए पानी की सप्लाई की पूर्वत 4 जोन वाली स्थिति को बहाल कर दिया गया।

प्रदेश में चार जोन में बांटकर नहरों के माध्यम से होती रही है पानी की सप्लाई

तापमान स्थिर रहने से ग्लेशियर पिघलने की सुस्त हुई रफ्तार, फरवरी व मार्च में झेलना होगा जल संकट

हथिनी कुंड बैराज में जलस्तर का यह रहा ग्राफ

वर्ष जनवरी फरवरी मार्च

न्यूनतम-अधिकतम न्यूनतम-अधिकतम न्यूनतम-अधिकतम (क्यूसेक)

2015- 1742 - 2600 1588 - 2000 1788 - 9000

2016- 988 - 2000 1064 - 1400 1064 - 1300

2017- 1348 - 4153 1176 - 1963 1176 - 1500

5 ग्रुप बनाने की भेजी फाइल

इस बार दिसंबर व जनवरी महीने में बरसात नहीं हुई और तापमान कम होने से पहाड़ों पर बर्फ पिघलना कम हो गया है। नदी में पानी कम आने से प्रदेश में 5 ग्रुप बनाने की फाइल शीर्ष अधिकारियों को भेजी गई है। ग्रुप बढ़ने से चैनलों को पूरा पानी मिलने लगेगा। हालांकि क्लोजर पीरियड बढ़ जाएगा। -संजीव राठी, एसई सिंचाई विभाग

बैराज में पानी है ही नहीं : शर्मा

हथिनी कुंड बैराज में पानी है ही नहीं। जलस्तर कम होने से इस बार फरवरी और मार्च में पीने के पानी का संकट रह सकता है। सप्लाई में कटौती करना मजबूरी होगी। आम दिनों में 20 फीसदी तक पानी की बर्बादी हो रही है। लोगों से अपील है कि इस बर्बादी को रोकने के साथ ही जरूरत भर के ही पानी का इस्तेमाल करेें। शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों में भी पब्लिक हेल्थ विभाग की टीम भेजकर लोगों को जागरुक किया जाएगा। -भानु प्रकाश शर्मा, एक्सईएन पब्लिक हेल्थ

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Web Title: 20 हजार की जगह िमल रहा 1428 क्यूसेक पानी, फसलें प्रभावित
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