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सांघी के 257 साल पुराने डेरे में पहली वारदात, लाखों की नकदी के साथ हजारों की आस्था पर डाला डाका

सांघी गांव के डेरा लोधीवाला में मंगलवार अ‌ाधी रात के बाद पांच बदमाशों ने डकैती डाली। डेरा 257 साल पुराना बताया जा...

Bhaskar News Network | Last Modified - Feb 01, 2018, 01:25 PM IST

सांघी गांव के डेरा लोधीवाला में मंगलवार अ‌ाधी रात के बाद पांच बदमाशों ने डकैती डाली। डेरा 257 साल पुराना बताया जा रहा है। हजारों लोगों की इससे आस्था जुड़ी है। इतने पुरने डेरे में ये पहली वारदात हुई है। पांच बदमाशों ने डेरे से करीब ढाई लाख रुपए की नकदी समेत सोने व चांदी के कई आभूषण लूट लिए। सारी रकम डेरे में दो दिन से चल रहे मेले व खेल आयोजन के लिए ग्रामीणों के दिए चंदे की थी। बदमाश रात दो बजे के करीब तीन बदमाश महंत सुंदरनाथ के कमरे में पिछले दरवाजा तोड़कर अंदर घुसे थे। बाद में उनमें से एक ने कमरे का बड़े गेट की ओर वाला दूसरा दरवाजा खोला और दो अन्य बदमाश भी अंदर घुस आए। पांचों ने नकाब पहने हुए थे। एक बदमाश हाथ में पिस्तौल लिए था।

अंदाजा लगाया जा रहा है कि बदमाशों को डेरे में लाखों रुपए की नकदी होने के बारे में पहले से पता था। करीब एक घंटे तक बदमाशों ने महंत सुंदरनाथ को अपने कब्जे में रखा। इस दौरान दो कमरों में रखा सारा सामान खंगाला। नकदी के अलावा वहां जो कीमती सामान मिला उसे ले लिया। महंत सुंदरनाथ ने बताया कि पांचों युवक बोलचाल से आसपास के इलाके के ही लग रहे थे। सभी रोहतक की खड़ी हरियाणवी बोल रहे थे। सुबह सूचना मिलने पर सदर थाना प्रभारी पुलिस ने महंत सुंदरनाथ की शिकायत पर पांच अज्ञात युवकों पर केस दर्ज कर लिया है।

रोहतक. डेरा लोधीवाला में डकैती होने पर रोष जताते ग्रामीण।

आपबीतीदहशत का 1:00 घंटा

डेरा लोधीवाला में हुई वारदात के दौरान पांचों बदमाश करीब एक घंटे तक डेरे में रहे। बाबा सुंदरनाथ ने बताया कि मंगलवार रात 11 बजे तक सभी ग्रामीण घर चले गए थे। इसके बाद वो भी अधिक थका होने के कारण गुरुगद्दी वाले कमरे में सो गया। रात करीब दो बजे बदमाश कमरे में पहुंचे। उन्होंने उसे बिस्तर में ही दबोच लिया। एक युवक ने उसकी कनपटी पर पिस्तौल लगा दी। गोली मारने की धमकी देते हुए उससे काफी देर तक कहां क्या सामान रखा के बारे में पूछते रहे। दो युवक उसे पकड़े बैठे रहे और बाकी तीन कमरे में रखे सामान को खंगालते रहे। इस दौरान उन्होंने उसकी हाथ में पहनी सोने की अंगूठी उतरवा ली। बाद में वो उसे लेकर दूसरे कमरे में चले गए। जहां अलमारी में नकदी रखी थी। उन्होंने उससे चाबी लेकर अलमारी खोली और उसमें नकदी के अलावा दो सोने की अंगूठी व चांदी के सात सिक्के ले लिए। बाद में उसे वहीं पड़े कपड़ों से एक कुर्सी पर बांध दिया।

तीन दिन से मेले में जिम्मेदारी संभाल खूब थका था, सोते हुए को बिस्तर में ही दबोचा

सबसे पहले आया राजेश बोला-महाराज

ने आवाज देकर कहा डेरे में डकैती हो गई

डेरा परिसर में सांघी का राजेश रोजाना सफाई के लिए आता है। करीब सात बजे जब वो डेरे में पहुंचा तो उसने बाहरी परिसर में सफाई शुरू करनी शुरू कर दी। राजेश के अनुसार बाहरी परिसर की सफाई कर जब वो महाराज सुंदरनाथ के कमरे के पास पहुंचा तो वो अंदर से आवाजें लगा रहे थे कि डेरे में डकैती हो गई, कमरे के बाहर का कुंडा खोले मुझे छुड़ाओ। इसके बाद उसने दरवाजा खोल महाराज को बाहर निकाला।

15 साल की उम्र में ही आए थे बाबा सुंदरनाथ

बाबा सुंदर नाथ मूलरूप से जींद जिले के गांव उझाना के है। करीब 15 वर्ष की उम्र में ही वह बाबा गोपीनाथ के पास इस डेरे में आए थे। बाबा गोपीनाथ के चोला छोड़ने के बाद से डेरे की जिम्मेदारी सुंदर नाथ ने संभाली थी। डेरे की संपदा में गांव में करीब 10 एकड़ खेतीबाड़ी की जमीन है। मंदिर में सालाना लाखों रुपए चंदा भी आता है।

3 अंगूठी मिली थी दक्षिणा में :बाब सुंदर नाथ योगी ने बताया कि उसे एक अंगूठी बाबा चांदनाथ योगी के चोला छोड़ने पर तो दूसरी अंगूठी भी उसको मस्तानाथ मठ से ही दान में मिली थी। तीनों अंगूठी उसे दान में मिली हुई थी।

ग्रामीणों की मान्यता- मराठा सेनापति सदाशिव राव भाऊ ने शुरू किया था डेरा

सांघी के डेरे के पीछे ग्रामीणों की मान्यता है कि इसे 1761 में पानीपत की तीसरी लड़ाई में हार के बाद साधु बने मराठा सेनापति सदाशिव राव भाऊ ने शुरू किया था। हालांकि इतिहास में सदाशिव राव भाऊ के लड़ाई में मारे जाने का तर्क है पर ग्रामीणों का कहना है कि उस लड़ाई में वो बच गए थे। घायल हालत में वो मस्तनाथ मठ पहुंचे और ठीक होने पर नाथ संप्रदाय में दीक्षा ली। इसके बाद उन्होंने आसपास के कई गांवों में तपस्या की और बाद में सांघी में डेरा लोधीवाला शुरू किया। ग्रामीण आज भी इसी पर यकीन करते हैं।

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