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वीडियो वायरल होने पर BSF से बर्खास्त हो चुका ये जवान, अब कर रहा है ये काम

अफवाह फैली कि उसकी मौत हो गई, मगर वायरल खबर झूठ निकली। खैर, तेज बहादुर इन दिनों कहां है और क्या कर रहा है ?

Dainik Bhaskar

Nov 15, 2017, 12:39 AM IST
तेज बाहदुर सामाजिक कार्यक्रम तेज बाहदुर सामाजिक कार्यक्रम

रेवाड़ी. बीएसएफ में दिए जाने वाले खाने का वीडियो वायरल करने के बाद अनुशासनहीनता के आरोप में बर्खास्त हुए जवान तेज बहादुर यादव बीतों दिनों काफी चर्चा में थे, लेकिन फिर उनसे जुड़ी खबरें आनी बंद हो गईं। बाद में अफवाह यह भी फैली कि उनकी मौत हो गई, मगर सोशल मीडिया पर वायरल यह खबर झूठ निकली। तेज बहादुर इन दिनों कहां हैं और क्या कर रहे हैं? जानने के लिए पढ़िए पूरी खबर...

- दरअसल, जवान तेज बहादुर यादव इन दिनों 'फौजी एकता न्याय कल्याण मंच' नाम से एक एनजीओ चला रहे हैं।

- यह संस्था वैसे सैनिकों की कानूनी मदद करेगी, जिन पर बिना किसी ठोस वजह के कार्रवाई की जाती है।
- किसी सैनिक के शोषण और प्रताड़ना की स्थिति में भी यह एनजीओ उसकी मदद करेगी।

- इसके लिए 'फौजी एकता न्याय कल्याण मंच' नाम से एक वेबसाइट भी बनाई गई है, जिस पर विजिट कर पूरी जानकारी ली जा सकती है।

क्या आरोप लगाए थे वीडियो में?
- 9 जनवरी 2017 को तेज बहादुर ने फेसबुक पर एक वीडियो पोस्ट किया था।
- तेज बहादुर ने वीडियो में दावा किया था, "हम किसी सरकार के खिलाफ आरोप नहीं लगाना चाहते, क्‍योंकि सरकार हर चीज, हर सामान हमको देती है। मगर आला अफसर सब बेचकर खा जाते हैं, हमें कुछ नहीं मिलता। कई बार तो जवानों को भूखे पेट सोना पड़ता है। मैं आपको नाश्‍ता दिखाऊंगा, जिसमें सिर्फ एक पराठा और चाय मिलती है।"
- "उसके साथ अचार नहीं होता। दोपहर के खाने की दाल में सिर्फ हल्‍दी और नमक होता है, रोटियां भी दिखाऊंगा। मैं फिर कहता हूं कि भारत सरकार हमें सब मुहैया कराती है, स्‍टोर भरे पड़े हैं, मगर वह सब बाजार में चला जाता है। इसकी जांच होनी चाहिए।"
- यादव ने कहा था कि सीमा पर कई बार तो जवानों को भूखे पेट सोना पड़ता है।

8 माह पहले पहुंचे थे गांव
- बर्खास्त होने के बाद 21 अप्रैल 2017 को पहली बार अपने हरियाणा के रेवाड़ी जिले स्थित पैतृक गांव राता कलां में आए तेज बहादुर ने दैनिक भास्कर से बातचीत में कहा था कि उनकी सितंबर 2015 में जम्मू-कश्मीर में तैनाती हुई थी।
- उन्होंने बताया था कि खराब खाने की शिकायतें होती भी हैं तो दबा दी जाती हैं, क्योंकि ऊंचाई पर सिविल एजेंसी नहीं जा सकती। इसीलिए शिकायत बाहर आने की संभावना कम रहती है।
- तेज बहादुर ने आरोप लगाया था कि जब भी शिकायत आती है, तो ऐसे जवान की पोस्ट बदल दी जाती है या उसे कोर्स पर भेज दिया जाता है। कोर्स पर जाने पर जो खर्च होता है, वह जवान को खुद वहन करना पड़ता है। इसलिए इससे बचने के लिए शिकायतें बाहर नहीं होती हैं। जवान को यह डर भी होता है कि शिकायत करने पर कहीं छुट्टी न रोक ली जाए।

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