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रियो ओलिंपिक गोल्ड मेडलिस्ट क्रिस्टा बोले- खेलों से भी होती है देश सेवा

अफगानिस्तान में तालिबानी हमले का शिकार आस्ट्रेलिया के क्रिस्टा मैक्ग्राथ रियो में हुए पैरा ओलंपिक में गोल्ड जीतकर विश्व

Danik Bhaskar | Nov 30, 2017, 07:03 AM IST

झज्जर . अफगानिस्तान में तालिबानी हमले का शिकार आस्ट्रेलिया के क्रिस्टा मैक्ग्राथ रियो में हुए पैरा ओलंपिक में गोल्ड जीतकर विश्व भर में सुर्खियों में आए। बुधवार को वे झज्जर के सहवाग इंटरनेशनल स्कूल में बच्चों के बीच थे। तब दोनों पैर खोने वाले इस सैनिक की खेल भावना से प्रभावित हुए स्कूल के बच्चों ने न सिर्फ उनके जज्बे को जाना,वहीं क्रिस्टा ने भी बच्चों को मोटीवेट किया कि हालात कितने ही विपरीत हों,अगर आप हौसला नहीं खोते हैं मंजिल जरूर मिल जाएगी।

मिसाइल हमले में गंवाया था एक पैर
क्रिस्टा वर्ष 2012 में सेना कमांडों के रूप में अफगानिस्तान में तालिबानों के खिलाफ मोर्चा संभाले हुए थे। तभी एक मिसाइल उनके पास आकर फटी,जिसमें उनके हाथ - पैर बुरी तरह जख्मी हुए। बाद में डाक्टर्स ने उनके हाथ तो बचा लिए लेकिन दोनों पैर जांघों के नीचे से काटने पड़े। अब इन कटे पैरों से लाचार होने की बजाए क्रिस्टा ने अपना ध्यान खेलों की तरफ मोड लिया। क्रिस्टा ने रोइंग खेल को अपनाया, जिसमें हाथों से चप्पू चलाकर नाव की रेस होती है। क्रिस्टा को अपने ऊपर भरोसा रहा और आस्ट्रेलिया की ओर से पहली बार रियो के पैरा ओलंपिक में शामिल होकर इस खेल में गोल्ड जीता।


अब निगाह 2020 के टोकियो ओलंपिक पर
क्रिस्टा मैक्ग्राथ ने बताया कि उनकी निगाह अब टोकियो में वर्ष 2020 में होने वाले पैरा ओलंपिक पर है। इसके लिए वे लगातार प्रेक्टिस कर रहे हैं। क्रिस्टा ने कहा कि टोकियो ओलंपिक में भी वे अपने देश आस्ट्रेलिया के लिए गोल्ड जीतेंगे।

विद्यार्थियों से साझा किए हादसे के पल
हौसले की इसी कहानी को क्रिस्टा ने झज्जर के बच्चों के साथ साझा किया। यहां क्लास 9 वीं के आयुष ने पूछा कि दोनों पैर गंवाने के बाद भी अपने किस तरह हौसला बनाए रखा। इसके जवाब में क्रिस्टा ने कहा कि बात जब देश के सम्मान की आती है तो हौसला अपने आप आ जाता है। वहीं छात्रा रोहन ने पूछा कि जब आपको लहुलुहान हालत में हैलीकॉप्टर से रेस्क्यू करके लाए जा रहे थे तब क्या विचार आ रहे था। इस पर क्रिस्टा बोले कि तब यही सोचा कि अगर जीवित रहा तब भी देश के लिए काम करुंगा।