Hindi News »Haryana »Rohtak» Interview Of Wrestler Reena

15 किमी साइकिल चला आती थी रेसलिंग सीखने, मेडल जीते तो पहलवान रीना के नाम से गूंजने लगा सिंहपुरा कलां का नाम

कॉमनवेल्थ गेम 2010 की बात है। खिलाड़ियों ने अपने प्रदर्शन के दम पर मेडल जीते। अपना व अपने गांव का नाम रोशन किया।

Bhaskar News | Last Modified - Nov 06, 2017, 06:59 AM IST

  • 15 किमी साइकिल चला आती थी रेसलिंग सीखने, मेडल जीते तो पहलवान रीना के नाम से गूंजने लगा सिंहपुरा कलां का नाम
    +1और स्लाइड देखें
    रोहतक.कॉमनवेल्थ गेम 2010 की बात है। खिलाड़ियों ने अपने प्रदर्शन के दम पर मेडल जीते। अपना व अपने गांव का नाम रोशन किया। इसमें सिंहपुरा कलां का नाम कहीं नहीं था। मुझे बहुत बुरा लगा। इसलिए अपने गांव के लिए कुछ करने की मन में ठानी और कुश्ती दंगल में उतर आई। दावपेच सीखने के लिए गांव से 15 किलोमीटर दूर साइकल से छोटूराम स्टेडियम रोहतक आती थी। अब तक 8 नेशनल, 8 इंटरनेशनल में पांच गोल्ड मेडल के अलावा एशियन चैंपियनशिप में सिल्वर मेडल जीत चुकी हूं। अब सिंहपुरा कलां का नाम मंचों पर गूंजने लगा है।यह मन की बात है सिंहपुरा कलां के किसान परिवार से संबंध रखने वाली 19 साल की पहलवान रीना की।
    मां बनाना चाहती थी डॉक्टर
    - एमडीयू में ऑल इंडिया इंटर यूनिवर्सिटी रेसलिंग चैंपियनशिप में भाग लेने आई रीना से उसके कुश्ती दंगल में उतरने का कारण पूछा तो उसने अपने गांव का नाम सुर्खियों में लाने का सपना बताया।
    - रीना ने कहा कि कुश्ती की ड्रेस सबसे अच्छी लगती है। इसलिए इसी खेल में उतरी। वह तीन भाई बहनों में दूसरे नंबर पर है। परिवार में वही अकेली महिला पहलवान है। मां मुझे डॉक्टर बनाना चाहती थी। इसलिए 12वीं तक मेडिकल से पढ़ाई की। अब बीएससी स्पोर्ट्स साइंस फाइनल ईयर की छात्रा हूं।
    - रीना का कहना है कि उसके साथ उसके पिता अनार सिंह व गांव का नाम खेल की दुनिया में सम्मान से लिया जाता है।
    हर रोज 7 घंटे अभ्यास
    - रीना ने बताया कि दावपेच सीखने के लिए गांव से 15 किलोमीटर दूर साइकिल से छोटूराम स्टेडियम रोहतक आती थी।
    - घर दूर होने के कारण एक साल तक दिन में एक ही समय अभ्यास कर पाई। अब शहर में किराए पर रहकर सुबह चार घंटे व शाम को तीन घंटे अभ्यास में लगाती हूं।

    चोट से उबरकर भैंसवाल की पहलवान ने जीता गोल्ड :
    - एमडीयू में हुई ऑल इंडिया इंटर यूनिवर्सिटी रेसलिंग चैंपियनशिप के 72 किलोग्राम वर्ग में भैंसवाल कलां की सुदेश कुमारी ने चोट से उबरकर लंबे समय बाद वापसी करते हुए गोल्ड मेडल जीता।
    - 23 साल की छात्रा का लक्ष्य ओलंपिक में गोल्ड मेडल जीतना है। यह छात्रा सीनियर नेशनल कुश्ती चैंपियनशिप में गोल्ड व जूनियर चैंपियनशिप में सिल्वर और ब्रांज मेडल जीत चुकी है।
  • 15 किमी साइकिल चला आती थी रेसलिंग सीखने, मेडल जीते तो पहलवान रीना के नाम से गूंजने लगा सिंहपुरा कलां का नाम
    +1और स्लाइड देखें
आगे की स्लाइड्स देखने के लिए क्लिक करें
दैनिक भास्कर पर Hindi News पढ़िए और रखिये अपने आप को अप-टू-डेट | अब पाइए News in Hindi, Breaking News सबसे पहले दैनिक भास्कर पर |

More From Rohtak

    Trending

    Live Hindi News

    0

    कुछ ख़बरें रच देती हैं इतिहास। ऐसी खबरों को सबसे पहले जानने के लिए
    Allow पर क्लिक करें।

    ×