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एनसीआर में रेड जोन में पहुंचा प्रदूषण, 6 गुना तक बढ़ा

bhaskar news | Last Modified - Nov 05, 2017, 05:34 AM IST

दीपावली के बाद से हवा में घुले पटाखों के धुएं और पराली के प्रदूषण की वजह से एनसीआर की हवा खतरनाक स्तर पर पहुंच गई है।
एनसीआर में रेड जोन में पहुंचा प्रदूषण, 6 गुना तक बढ़ा
रोहतक.दीपावली के बाद से हवा में घुले पटाखों के धुएं और पराली के प्रदूषण की वजह से एनसीआर की हवा खतरनाक स्तर पर पहुंच गई है। पार्टिकुलेट मैटर्स (पीएम 2.5) का स्तर सुरक्षा मानकों से 5 से 6 गुना तक बढ़ गया है। भारतीय मानकों के तहत ये 50 से 60 माइक्रोग्राम से ज्यादा नहीं होना चाहिए, लेकिन एनसीआर में यह 300 के पार पहुंच गया है, जिससे एरिया प्रदूषण के रेड जाेन में गया है। इससे छोटे बच्चों, बुजुर्गों और सांस के मरीजों की तकलीफ बढ़ रही है। यह तत्व एक व्यक्ति की ऊंचाई यानि जमीन से 5 से 6 फुट तक ही अधिक रहता है। इस वजह से यह ज्यादा नुकसानदेह है। पटाखों और पराली के साथ-साथ उद्योग और बढ़ रहे वाहनों का धुएं भी प्रदूषण बढ़ा रहा है। विशेषज्ञों की सलाह है कि पर्यावरण को स्वच्छ रखने के लिए तत्काल कारगर कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले समय में सांस की बीमारियां, दिल के दौरे, मस्तिष्क घात और फेफड़े के कैंसर महामारी का रूप धारण कर सकते हैं।
शरीर पर यह नुकसान
1. आंखोंमें जलन
2.गलेमें खराश
3.त्वचापर एलर्जी
4.सांसकी बीमारियां
5.एनिमियाफेफड़े कमजोर होना
6.सीनेमें दर्द 7.सीधेदिमाग और दिल में असर डालता है।
यूं समझें पीएम 2.5 को
पर्यावरणविदडॉ. सुदेश वाघमारे के मुताबिक पॉर्टिकुलेट मैटर यानी पीएम 2.5 एक 10 सेंटीमीटर की लंबाई वाले बाल का 24वां हिस्सा होता है यानी इतना सूक्ष्म की इसे नंगी आंखों से देखा नहीं जा सकता। ये सीधे दिमाग और दिल में असर डालता है। पीएम 2.5 का साइज 2.5 माइक्रॉन है। छोटे साइज की वजह से इन कणों को शरीर में घुसने से नहीं रोका जा सकता।
पीएम2.5 का स्तर 25 माइक्रोग्राम से नीचे हो, जा रहा 60 तक
डब्ल्यूएचओके मानक के मुताबिक औसतन पीएम 2.5 का स्तर एक साल में 10 माइक्रोग्राम से अधिक नहीं होना चाहिए। एक दिन में यह 25 माइक्रोग्राम के नीचे होना चाहिए। भारतीय में यह स्तर 60 तक जाता है।
ओस गिरने पर ही मिलेगी राहत : सबसे हैरान करने वाली बात है कि अधिक संख्या में पेड़ लगाने से भी इस समस्या का समाधान नहीं हो पाया है। चूंकि पीएम 2.5 पार्टिकल गैस नहीं है, इसलिए पेड़ के पत्ते भी इसका निपटान नहीं कर पाते। पेड़ों की संख्या अधिक होने पर इनकी स्थिति बिगड़ सकती है क्योंकि हवा में अधिक नमी से ये माइक्रो पार्टिकल वातावरण में फैलने की बजाय फंस जाएंगे। अब ओस गिरने से ही इससे राहत मिल सकती है।

यह बरतनी होंगी सावधानियां
पीजीआईएमएसके पल्मॉनरी एंड रेस्पिरेटरी मेडिसन के सीनियर प्रोफेसर डॉ. ध्रुव चौधरी ने बताया कि इन समस्याओं से बचने के लिए सरकार लोगों को चाहिए कि पराली जलाने पर पूरी तरह से रोकथाम लगाई जाए। शीशा युक्त पेट्रोल का प्रयोग वाहनों में किया जाए। औद्योगिक इकाइयों में हेवी मेटल्स निकलने वाले पदार्थों का उचित तरीके से निस्तारण किया जाए। इन उद्योगों से जुड़े कर्मचारियों को भी जागरूक किया जाए कि वे सेफ्टी किट लगाकर काम करें। उद्योगों में काम करने वाले लोगों के खून नसों में हेवी मेटल जाने से कुछ समय बाद बीमारियां आनी शुरू हो जाती हैं। पीएम 2.5 से बचाव के लिए एन-95 या कॉटन के मास्क डालना जरूरी है।
आज से गिरने लगेगा तापमान
मौसममें सर्दी का अहसास अब दिन में भी होने लगेगा। तापमान में गिरावट रविवार सुबह से शुरू हो जाएगी। इसके लिए तापमान में एक डिग्री की गिरावट आने की संभावना है। न्यूनतम तापमान 17 डिग्री दर्ज किया जा सकता है। साथ ही स्मॉग का असर भी बढ़ रहा है। इस स्माॅग का असर शनिवार सुबह भी रोहतक के बाहरी खुले क्षेत्रों में देखने को मिला।
ये है प्रदूषण के हालात (पीएम 2.5)
300
रोहतक
338
गुरुग्राम
323
फरीदाबाद
351
दिल्ली
396
गाजियाबाद
नोट: पीएम 2.5 की मात्रा माइक्रोग्राम प्रति सेंटीमीटर में है।
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Web Title: ensiaar mein red jon mein phunchaa prdusn, 6 gaunaa tak badhaa
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

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