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स्कूलों की साइंस लैब में रखे उपकरण हुए कंडम, सिर्फ परीक्षा में प्रैक्टिकल के वक्त हो रहे इस्तेमाल

गवर्नमेंट सीनियर सेकेंडरी स्कूलों में बनी केमिस्ट्री, बायोलॉजी व फिजिक्स की प्रयोगशालाएं कंडम हालत में पहुंच चुकी हैं।

Bhaskar News | Last Modified - Nov 14, 2017, 05:17 AM IST

स्कूलों की साइंस लैब में रखे उपकरण हुए कंडम, सिर्फ परीक्षा में प्रैक्टिकल के वक्त हो रहे इस्तेमाल

रोहतक |जिले के 9 से 12वीं तक के गवर्नमेंट सीनियर सेकेंडरी स्कूलों में बनी केमिस्ट्री, बायोलॉजी व फिजिक्स की प्रयोगशालाएं कंडम हालत में पहुंच चुकी हैं। प्रैक्टिकल में उपयोग होने वाले काफी उपकरण अलमारियों में ही बंद हैं। कुछ बाहर रखे हैं तो उन पर धूल की परत चढ़ने से कई खराब हो चुके हैं। विद्यार्थी बताते हैं कि सिर्फ बोर्ड परीक्षाओं के समय दो-तीन दिन में ही कक्षा 9 से 10वीं में 20 नंबर व कक्षा 11 व 12वीं में 30 नंबर के प्रैक्टिकल कराकर औपचारिकता निभा दी जाती है। इसके बाद पूरे वर्ष लैब की तरफ कोई भी झांकने नहीं जाता है। यह स्थिति तब है जब राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान के तहत जिले के 9 से 12वीं कक्षा तक के 162 स्कूलों को प्रतिवर्ष 40 लाख 50 हजार रुपए के करीब मेंटीनेंस बजट दिया जाता है। लेकिन फिर भी इससे मेंटीनेंस नहीं हो पा रहा है। अब ऐसे में सवाल यह है कि आखिर स्कूलों में यही हालात रहे तो भविष्य के वैज्ञानिकों की नींव मजबूत कैसे होगी। विद्यार्थी व अभिभावक के अलावा विभाग के सामने भी ये प्रश्न बना है।

राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, गांधी नगर
इस विद्यालय में 9 से 12वीं तक की कक्षाएं संचालित होती है। स्कूल की साइंस मानव संरचना समझने के काम आने वाला कंकाल जर्जर हालत में है। लैब के उपकरणों पर धूल की मोटी परत जमा हो चुकी है। अधिकांश उपकरण एक कांच की टूट चुकी अलमारी में रखे हैं। यहां के शिक्षकों ने बताया कि लैब अटेंडेंट न होने से मेंटीनेंस नहीं हो पा रही। इसलिए अलमारी में बंद करके रख दिया गया है। जब बच्चों काे प्रयोग कराने होते हैं, तभी इसे खोलते हैं।

राजकीय कन्या वरिष्ठ विद्यालय, मॉडल टाउन
व्यवस्थित स्कूल संचालन व लगातार अवॉर्ड जीतने वाले इस स्कूल की प्रयोगशाला का रखरखाव तो कुछ हद तक संतोषजनक लगा। लेकिन यहां पर भी अलमारी में बंद रखे उपकरणों की दशा से प्रतीत हो रहा था कि यहां पर छात्राओं को रोजाना प्रयोग नहीं कराए जाते। एक शिक्षिका ने बताया कि गैर शैक्षणिक कार्यों में स्टाफ अधिक व्यस्त रहता है, इसलिए प्रयोगशाला में रोज-रोज प्रयोग कराना असंभव रहता है। फिर भी लैब के मेंटीनेंस का पूरा ध्यान रखा जाता है।

राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, गांधी कैंप
इस स्कूल में लैब की हालत बदतर हालत में पहुंच चुकी है। लैब में काम आने वाले सारे उपकरणों को समेट कर एक कोने में रखा गया है। विद्यार्थियों ने बताया कि करीब दो माह से उन्हें लैब में कोई प्रयोग नहीं कराया गया। वहीं स्कूल प्रबंधन कहता है कि उनका प्रयास रहता है कि 15 दिन में एक या दो बार फिजिक्स, केमिस्ट्री व बायोलॉजी के प्रयोग जरूर कराएं जाएं। जब प्रयोग कराते हैं तो उपकरणों को बाहर निकालते हैं, नहीं तो टूटने के डर से उन्हें कोने में रख देते हैं।

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