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बदमाशों के हमले में गेटमैन घायल, सूनी फाटक पर दिन भर कई बार थमे रेलगाड़ियों के पहिए

रोहतक-जींद रेलवे सेक्शन पर बने रेलवे फाटक नंबर 66 सी पर रविवार देर रात डेढ़ बजे ड्यूटी पर मौजूद बुजुर्ग रेलवे...

Dainik Bhaskar

Apr 17, 2018, 03:25 AM IST
बदमाशों के हमले में गेटमैन घायल, सूनी फाटक पर दिन भर कई बार थमे रेलगाड़ियों के पहिए
रोहतक-जींद रेलवे सेक्शन पर बने रेलवे फाटक नंबर 66 सी पर रविवार देर रात डेढ़ बजे ड्यूटी पर मौजूद बुजुर्ग रेलवे कर्मचारी बलबीर पर पांच युवकों ने लाठी डंडों से हमला कर दिया। हमलावर गेटमैन को मृत समझकर घटनास्थल से भाग निकले। 10 मिनट बाद होश आने पर खून से लथपथ बलबीर ने स्टेशन अधीक्षक सहित आरपीएफ व इंजीनियरिंग विभाग के अफसरों को घटना की सूचना दी। आनन फानन में सिंहपुरा गांव में रेलवे फाटक पर पहुंचे अफसर देर रात तीन बजे के करीब जख्मी हालत में बलबीर को रोहतक स्टेशन पर लाए। यहां पर रेलवे चिकित्सक ने प्राथमिक उपचार देकर पीजीआई के लिए रेफर किया। पीड़ित कर्मचारी बलबीर के सिर पर गंभीर चोट आईं हैं। घटना की खबर फैलते ही कर्मचारियों ने रेलवे फाटक पर ड्यूटी देने से मना कर दिया। इसकी वजह से 10 घंटे तक बिना गेटमैन के कॉशन आर्डर पर ट्रेनों को निकाला जाता रहा। सोमवार दोपहर 12 बजे से अफसरों ने दोनों फाटक बंद करा दिए। जिससे सिंहपुरा, समर गोपालपुर सहित आसपास के गांव के करीब 10 हजार लोगों को आवागमन में परेशानी का सामना करना पड़ा। ग्रामीणों काे पूरे दिन सिंहपुरा कलां गांव से समर गोपालपुर से होते हुए शहर की तरफ करीब 8 किमी का चक्कर काटकर गंतव्य तक पहुंचे। फाटक बंद होने से ग्रामीणों को अब 16 किमी की दूरी तय करने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। फाटक बंद किए जाने पर ग्रामीणों ने रेलवे प्रशासन के प्रति रोष जाहिर किया है।

हादसा टालने के लिए सहायक लोको पायलट ने निभाई गेटमैन की भूमिका : रात ढाई बजे से सोमवार दोपहर 12 बजे तक रेलवे कंट्रोल रूम से जींद की तरफ आने और जाने वाली मालगाड़ी व सवारी गाड़ियों के ड्राइवरों को सूचना जारी की गई कि गेट नंबर 65 सी और 66 सी के बीच में कॉशन आर्डर पर ट्रेनों का संचालन किया जाएगा। 10 घंटे तक खुले फाटक पर हादसा टालने के लिए ट्रेनों के सहायक लोको पायलट ने गेटमैन की भूमिका निभाकर ट्रेनों का संचालन कराया। गेहूं की ढुलाई का सीजन होने से दोनों फाटक पर ट्रैक्टर ट्रालियाें का आवागमन लगातार जारी है। जींद से चलकर दिल्ली को जाने वाली पैसेंजर गाड़ी नंबर 54032 सुबह करीब 9 बजे गांव समरगोपालपुर से पहले रुकी। लोको पायलट को फाटक खुला हुआ मिला। सहायक लोको पायलट ने इंजन से उतर कर देखा तो केबिन पर ताला लगा हुआ मिला। ड्राइवर ने वहां से चेन उठाकर रास्ता बंद किया और गाड़ी को निकाला। समर गोपालपुर का दूसरा रेलवे फाटक भी खुला मिला। ऐसे में गेट खुला रहने के दौरान ट्रेन आगमन पर हादसे की आशंका बनी रही।

रोहतक. रेलवे फाटक नंबर 66 सी पर हुई घटना।

3 घंटे तक बंद रखते हैं फाटक

सिंहपुरा कलां गांव के पूर्व सरपंच ऋषिपाल सहारण ने बताया कि रेलवे फाटक पर सिग्नल की व्यवस्था न होने से रेलवे कर्मचारी 30 मिनट से तीन घंटे तक रेलवे फाटक बंद रखते हैं। ट्रेन निकलने के बाद भी फाटक न खुलने से राहगीरों का इंतजार करना पड़ता है। कर्मचारियों से गेट खोलने को कहते हैं तो उनका जवाब होता है जब स्टेशन मास्टर का मैसेज आएगा तभी फाटक खोला जाएगा। रात में कर्मचारी पर हमला होने की बात पता चली है। हम रेलवे के उच्चाधिकारियों से फाटक खुलवाने की अपील करेंगे।

फाटक पर असुरक्षित महसूस करता है कर्मचारी

ऑल इंडिया ट्रैकमेंटेनर यूनियन के नार्दर्न जाेन के प्रेसीडेंट जसबीर ने बताया कि हम मांग करते आ रहे हैं कि रेलवे फाटकों पर रेलवे कर्मचारियों को सुरक्षा उपलब्ध कराई जाए। कर्मचारी जंगलों के बीच बने रेलवे फाटक पर 24 घंटे खुद को असुरक्षित महसूस करता है। वास्तविकता जानने के बाद डीआरएम और जीएम को ज्ञापन दिया जाएगा।

स्थायी तौर पर बंद किया फाटक, नहीं खुलेगा, ग्रामीणाें को फाटक की आवश्यकता नहीं

रोहतक सेक्शन के इंजीनियरिंग विभाग के एक अफसर ने बताया कि घटना के बाबत उच्चाधिकारियों को अवगत कराया गया है। उच्चाधिकारियों से अनुमति मिलते ही सोमवार दोपहर 12 बजे से स्थायी तौर पर गेट नंबर 65 सी और 66 सी को बंद करा दिया गया है। आगामी आदेश आने तक रेलवे फाटक बंद रखा जाएगा। कर्मचारी पर हुए हमले के बाद से ऐसा प्रतीत होता है कि ग्रामीणों को रेलवे फाटक की सुविधा की आवश्यकता नहीं है।

अफसरों से पूछ कर

दर्ज कराऊंगा बयान

जीआरपी के एसआई नरेश कुमार ने बताया कि घटना से सहमे रेल कर्मचारी बलबीर से बयान लिखित में दर्ज कराने को कहा गया। ताकि हमलावरों की तलाश शुरू की जा सके। लेकिन उसने मना करते हुए कहा कि वह अफसरों से पूछकर ही पूरे घटनाक्रम का बयान दर्ज कराएगा। उन्होंने बताया कि बलबीर ने बताया है कि वह रात में डेढ़ बजे गेट नंबर 66 सी पर ड्यूटी पर था। पांच युवक चेहरे पर काला कपड़ा बांधे हुए हाथ में लाठी डंडा लेकर केबिन की तरफ आते दिखे। मैंने उनकी मंशा भांपकर केबिन का दरवाजा अंदर से बंद कर लिया। उन्होंने लात मारकर दरवाजा तोड़ कर सिर पर लाठी से हमला कर दिया। बेहोश होने के बाद मुझे कुछ पता नहीं चला।

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