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गोरैया, गिलहरी और तोते की नेचुरल ब्रीडिंग के लिए अब भिंडावास में लगेंगे 50 कृत्रिम घोंसले

देसी और विदेशी परिंदोें की बर्ड सेंचुरी भिंडावास में गौरैया, गिलहरी व तोते जैसे पक्षियों की नेचुरल ब्रीडिंग...

Danik Bhaskar | May 01, 2018, 03:35 AM IST
देसी और विदेशी परिंदोें की बर्ड सेंचुरी भिंडावास में गौरैया, गिलहरी व तोते जैसे पक्षियों की नेचुरल ब्रीडिंग डेवलप करने की विशेष कार्य योजना तैयार की गई है। इसके पहले चरण में यहां के छायादार व फलदार वृक्षों की ऊंचाई वाली शाखाओं पर कृत्रिम घाेसले टांगे जाएंगे, लेकिन इनकाे पूरी तरह से नेचुरल टच दिया जाएगा ताकि पक्षी मीटिंग और ब्रीडिंग के दौरान सहजता महसूस कर सके। वन्य प्राणी विभाग की ओर से इस प्रकल्प के लिए सबसे पहले भिंडावास क्षेत्र का सर्वे कर वहां की जरूरत के अनुसार घोसले तैयार करवाए गए हैं। इन्हें 7 दिन के अंदर वहां के पेड़ों पर लगा दिया जाएगा, लेकिन इसके पहले सभी घोसलों के ऊपर और उसके अंदर घास व तिनकों का आवरण विकसित किया जाएगा।

तिलियार रोड पर मिनी चिड़ियाघर में पक्षियों को मिल रहा बेहतर वातावरण, शहर से भी रस्क्यू कर लाए जा रहे जंतु

कृित्रम घोसलों की पड़ताल करते डीडब्ल्यूएलओ मनोज कुमार डॉ. अशोक खासा।

पक्षियों की सहूलियत के लिए लगेंगे घोसले


बंदरों ने उजाड़ा घोंसला, लोगों की सतर्कता से बची गिलहरी के 4 नन्हे बच्चों की जान

भास्कर न्यूज | रोहतक

झुंड में पहुंचे उत्पाती बंदरों ने ताड़ के पेड़ पर लगे गिलहरी के घोंसले को उजाड़ दिया। इससे उसमें पल रहे 4 नन्हें चूजे जमीन पर आ गिरे। इसी दौरान लोगों की नजर पड़ी तो उन्होंने बंदरों को मार भगाया और गिलहरी के बच्चों को सुरक्षित करते हुए इसकी सूचना तिलियार के वन्य प्राणी विभाग कार्यालय में दी। मौके पर पहुंची कर्मचारियों की टीम गिलहरी के बच्चों को रेस्क्यू कर मिनी चिड़ियाघर लेकर आई। जहां उन्हें परवरिश दी जा रही है। घटना सोमवार को डेरा बाबा लक्ष्मणपुरी महाराज गोकर्ण तीर्थ में संतों की समाधि स्थल के निकट ताड़ के पेड़ की है। सुबह 8 बजे के लगभग शोर मचाते हुए बंदरों का झुंड वहां आया। उसमें तीन बंदर ताड़ के पेड़ पर चढ़े और गिलहरी का घोसला तोड़ दिया।

अमेरिकी दूध से पलेंगे गिलहरी के बच्चे

डीडब्ल्यूएलओ मनोज कुमार ने बताया कि चारों गिलहरी के बच्चे लगभग 12 दिन के हैं। अभी तक उनकी आंखें नहीं खुली हैं। उनको स्पेशल केयर फीडिंग के लिए अमेरिका में निर्मित किटेन मिल्क रिप्लेसर (केएमआर) दूध मंगाया गया है। तीन महीने में ये बच्चे पूर्ण विकसित हो जाएंगे। इस दौरान विशेषज्ञ इन्हें मन पसंद अनाज, फल, फूल व पत्तों को खाने तथा पेड़ों पर चढ़ने की ट्रेनिंग देंगे। आत्मनिर्भर होने के बाद गिलहरी के बच्चों को चिड़ियाघर में ही स्वतंत्र छोड़ दिया जाएगा।

चिड़ियाघर में गिलहरी के बच्चों को दिखाती बर्ड डाटा इंट्री आॅपरेटर पूनम।