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छोटी-छोटी बातों पर न करें क्रोध, इससे जीवन में आती है अशांति

छोटी-छोटी बातों पर क्रोध नहीं करना चाहिए। क्रोध, ईष्या और लोभ से जीवन में अशांति आती है। नकारात्मक विचार जीवन को...

Bhaskar News Network | Last Modified - May 01, 2018, 03:35 AM IST

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    छोटी-छोटी बातों पर क्रोध नहीं करना चाहिए। क्रोध, ईष्या और लोभ से जीवन में अशांति आती है। नकारात्मक विचार जीवन को नरक बनाते हैं, इसलिए इनसे मनुष्य को बचना चाहिए। यह प्रवचन कथावाचक महामंडलेश्वर स्वामी विश्वेश्वरानंद गिरी ने व्यक्त किए। वह सोमवार को माता दरवाजा के पास संकट मोचन मंदिर में चल रही श्रीमद् भागवत कथा में बोल रहे थे। हरियाणा डेयरी विकास एसोसिएशन के चेयरमैन जीएम शर्मा ने ज्योत प्रचंड कर कथा की शुरुआत की। स्वामी विश्वेश्वरानंद गिरी ने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा मन को मजबूत करता है। मनुष्य को जीवन जीने के लिए मिला है, ना कि गंवाने के लिए। थल और जल में करोड़ों प्राणी रहते हैं, पर मनुष्य उनमें सबसे सर्वश्रेष्ठ है। आज का मनुष्य भौतिक सुख सुविधाएं और सोशल वेबसाइट्स में फंसकर अपने जीवन को नष्ट कर रहा है। रिश्ते पीछे छूट रहे हैं, उन्होंने भक्तों केा सोशल साइट पर अधिक समय व्यतीत नहीं करने को कहा। कथावाचक गिरी ने भक्तों को भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाएं, गोवर्धन पूजा और कंस वध के प्रसंग सुनाए। इस दौरान हरि भजनों पर भक्त भाव विभोर होकर कई देर तक नृत्य किया। मंदिर की संचालिका मानेश्वरी देवी ने कहा कि ब्रह्मलीन गुरुमां गायत्री की याद में भागवत कथा कराई जा रही है।

    रोहतक. संकट मोचन मंदिर में श्रीमद भागवत कथा के दौरान मौजूद भक्त

    रोहतक. संकट मोचन मंदिर में चल रही श्रीमद् भागवत कथा के 5वें दिन कथा सुनाते स्वामी विश्वेश्वरानंद।

    तन मन धन

    परमात्मा की देन

    रोहतक | संत निरंकारी मंडल ब्रांच की ओर से सोमवार को निरंकारी बाल लघु वर्कशॉप का आयोजन किया गया। मुख्यातिथि संत महाबीर ने कहा कि बच्चे परिवार व समाज की नींव होते है। बच्चे ही आगे चलकर अच्छे नागरिक बनते हैं। जिस परिवार के बच्चे सत्कर्म में लग जाते हैं उस परिवार का कल्याण हाे जाता है। संत अमन डंग ने बच्चों को पावर पॉइंट प्रेजेंटेशन से बताया कि तन मन धन परमात्मा की देन है। इसे परमात्मा का समझ कर अभिमान नहीं करना चाहिए। ऐसा करने से जीवन मे अहम से मुक्ति मिलती है। अहम ही दुखों का कारण है। इस अवसर पर ब्रांच मुखी महात्मा चांदराम, महाबीर आदि मौजूद रहे।

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