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मन को नियंत्रण में करने को उसे 100 जूते लगाओ

ये मन बड़ा चंचल है। इसे नियंत्रण में करने के लिए उठते-सोते समय सौ जूते लगाने चाहिए। भक्तों का उदगार करते हुए साक्षी...

Danik Bhaskar | May 18, 2018, 03:35 AM IST
ये मन बड़ा चंचल है। इसे नियंत्रण में करने के लिए उठते-सोते समय सौ जूते लगाने चाहिए। भक्तों का उदगार करते हुए साक्षी गोपालदास महाराज ने भक्तों का उदगार किया। इस्कॉन प्रचार समिति की ओर से मदनलाल ढींगड़ा में आयोजित श्रीमद भागवत कथा के छठे दिन कृष्ण जन्मोत्सव मनाया गया। झांकियों और मनमोहक प्रस्तुतियों ने पंडाल में कृष्ण रस घोल दिया। हरे राम, हरे राम...राम राम हरे हरे...हरे कृष्ण, हरे कृष्ण, कृष्ण कृष्ण हरे हरे... के जयकारों से कथा पंडाल गूंज उठा। कथा व्यास ने श्रीकृष्ण और अर्जुन का किस्सा सुनाया। उन्होंने बताया कि अर्जुन ने भी स्वीकार किया कि मैं एक बार के लिए वायु के वेग को वश में कर सकता हूं पर मन को नहीं। इस पर भगवान कृष्ण ने जवाब देते हुए अर्जुन को ध्यान योग करने को कहा। अर्जुन ने जब इसके लिए मना कर दिया तो भगवान बोलते योग का प्रयास कर ही तुम अपने मन को वश में करने में सक्षम हो पाओगे। इस अवसर पर कालीदास महाराज, उद्योगपति सुरेन्द्र जैन ने बतौर मुख्यअतिथि शिरकत की। इस मौके पर डाॅ. मनोज गोयल, सुरेश तायल, अशोक तायल, दिनेश तायल, कुलभूषण जैन, एलपीएस बोसार्ड के डायरेक्टर राजेश जैन, संस्था के प्रधान सुभाष तायल, विजय बाबा, राजीव जैन, विपिन गोयल, सुनील बल्ली, सन्नी निझावन, जगदीश बालंदिया, अमित गोयल, अमित गुप्ता, प्रेमचंद गर्ग, शंकर लाल मित्तल, सतीश भारद्वाज, सुभाष गुप्ता चांदी, नरेश शर्मा, नर्सिंग गुप्ता, सुशील मंगला, अशोक सिक्का आदि मौजूद रहे।

यज्ञ, तपस्या, दान तीनों मनुष्य योनि के लिए बेहद जरूरी

साक्षी गोपाल दास महाराज ने बताया कि भगवान कहते हैं मनुष्य योनि में तीन कार्य यज्ञ, दान, तपस्या कभी त्यागने नहीं चाहिए। यज्ञ आज के कलियुग में हरिनाम संकीर्तन है। हरिनाम की महिमा कलियुग में यज्ञ के बराबर है। हर अवस्था में दान करना चाहिए। शारीरिक तपस्या में एकादशी व्रत का पाचन है जो गृहस्थ, ब्रह्मचारी, संन्यासी सभी को करना चाहिए।

रोहतक. कृष्ण जन्मोत्सव की झांकी निकालते श्रद्धालु। (इनसेट) प्रवचन देते साक्षी गोपालदास।