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चुनाव से पहले राजस्थान और मध्य प्रदेश में अध्यक्ष-प्रभारी बदलने की तैयारी में भाजपा

लोकसभा चुनाव 2019 से पहले इस साल होने वाले सेमीफाइनल के लिए भाजपा मध्य प्रदेश और राजस्थान के प्रदेशाध्यक्ष बदलने जा...

Bhaskar News Network | Last Modified - Mar 28, 2018, 03:50 AM IST

लोकसभा चुनाव 2019 से पहले इस साल होने वाले सेमीफाइनल के लिए भाजपा मध्य प्रदेश और राजस्थान के प्रदेशाध्यक्ष बदलने जा रही है। दरअसल, भाजपा के अंदरूनी सर्वेक्षणों में इनके अलावा छत्तीसगढ़ और कर्नाटक में भी पार्टी की हालत चिंताजनक दिखाई गई है। भाजपा अगर इस साल के चुनाव हारी तो सीधे 2019 के समीकरण बिगड़ेंगे। मध्य प्रदेश और राजस्थान पर सबसे ज्यादा जोर इसलिए है, क्योंकि पिछले उपचुनावों में यहां पार्टी को हार का सामना करना पड़ा था। इसके अलावा त्रिपुरा और पंजाब में भी बदलाव की तैयारी है। कुछ राज्यों में प्रभारियों की नियुक्ति भी संभव है। आंध्र प्रदेश में राम माधव को प्रभारी बनाया गया है। वहीं, अविनाश राय खन्ना को गोवा का अतिरिक्त प्रभार मिल सकता है।

मध्य प्रदेश | पिछले दो टर्म जैसे नहीं दिख रहे हालात, इसलिए पीछे हट रहे तोमर

सूत्रों के मुताबिक हाईकमान केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर को मध्य प्रदेश में अध्यक्ष बनाना चाहता है। संघ में भी उनके नाम पर सहमति बनती दिख रही है। लेकिन अंदरूनी सर्वेक्षणों से वाकिफ तोमर अभी इसके लिए तैयार नहीं हैं। प्रदेशाध्यक्ष की दौड़ में नरोत्तम मिश्रा और कैलाश विजयवर्गीय का नाम भी है लेकिन पहली पसंद तोमर ही माने जा रहे हैं। क्योंकि, 2008 और 2013 के चुनाव के दौरान भी वह प्रदेशाध्यक्ष थे। संगठन पर उनकी गहरी पकड़ है। चुनाव से छह माह पहले पार्टी किसी नए चेहरे पर भरोसा नहीं करना चाहती। यह रणनीति आगे बढ़ी तो तोमर केंद्रीय मंत्री रहते हुए प्रदेशाध्यक्ष की कमान भी संभालेंगे। भाजपा के सत्ता में लौटने पर शिवराज की जगह तोमर को तरजीह भी दी जा सकती है। हालांकि, तोमर को राज्य में हालात 2008 और 2013 जैसे नहीं दिख रहे। ऐसे में वह प्रदेश की जिम्मेदारी लेने से हिचकिचा रहे हैं।

राजस्थान | पार्टी सामाजिक समीकरणों पर दांव चलेगी

उपचुनाव में मिली हार के बाद हाईकमान प्रदेशाध्यक्ष अशोक परनामी को हटाने पर काम कर रहा है। अंदरूनी स्तर पर उन्हें हटाने का फैसला हो चुका है। उनकी जगह सांसद ओम बिरला और केंद्रीय राज्यमंत्री अर्जुन राम मेघवाल को पद सौंपा जा सकता है। सूबे में दलितों का वोट परंपरागत तौर से कांग्रेस का माना जाता है। ऐसे में अगर मेघवाल को कमान सौंपी जाती है तो उसकी रणनीति दलित वोट साधने की होगी। ओम बिरला भी सांगठनिक क्षमता की वजह से अहम दावेदार हैं। वैश्य समुदाय के बिरला के नाम पर सहमति बनने के आसार ज्यादा हैं। उनके नाम पर मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे और विरोधी गुट राजी हो सकते हैं।

पंजाब | सांपला के खिलाफ नाराजगी, श्वेत मलिक को मिल सकती है कमान

पंजाब के प्रदेशाध्यक्ष विजय सांपला के खिलाफ पार्टी में नाराजगी बढ़ रही है। ऐसे में राज्यसभा सांसद श्वेत मलिक को प्रदेश की कमान सौंपी जा सकती है। पंजाब में भाजपा दो धड़ों में बंटी है। एक धड़ा अकाली दल से गठबंधन तोड़ने या लोकसभा सीटों का समीकरण बदलने का हिमायती है। पार्टी चाहती है कि नया अध्यक्ष लाकर अकाली दल से नए सिरे से बातचीत की जाए।

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