• Hindi News
  • Haryana
  • Sampla
  • जिसको मंदबुद्धि मानकर टरका देते थे सहपाठी, टीचर के दुलार से टॉपर बनी

जिसको मंदबुद्धि मानकर टरका देते थे सहपाठी, टीचर के दुलार से टॉपर बनी / जिसको मंदबुद्धि मानकर टरका देते थे सहपाठी, टीचर के दुलार से टॉपर बनी

Bhaskar News Network

Apr 02, 2018, 03:55 AM IST

Sampla News - ग्रामीणों और स्कूल वालों की गलत धारणा को तोड़ते हुए अटायल गांव की छात्रा निशा कक्षा तीन में टॉप करके सभी को हैरान...

जिसको मंदबुद्धि मानकर टरका देते थे सहपाठी, टीचर के दुलार से टॉपर बनी
ग्रामीणों और स्कूल वालों की गलत धारणा को तोड़ते हुए अटायल गांव की छात्रा निशा कक्षा तीन में टॉप करके सभी को हैरान कर दिया। निशा को ग्रामीणों, स्कूल और पड़ाेसी ने मंदबुद्धि मान लिया था। निशा काे सही करने का श्रेय अटालय कन्या स्कूल की टीचर किरण को जाता है। टीचर किरण ने बताया कि निशा और किरण दोनों बहनें कन्या माध्यमिक स्कूल में पढ़ने आती थी। दोनाें का आईक्यू लेवल शुरुआत में जीरो था। निशा को वर्णमाला तक नहीं आती थी। किरण काे डॉक्टर ने मंदबुद्धि घोषित किया हुआ था। निशा भी किरण के साथ-साथ रह कर उसी की तरह गतिविधियां करने लग गई थी।

आई क्यू लेवल जांचने के बाद टीचर रखने

लगी विशेष नजर

टीचर किरण बाला का तबादला सितंबर 2016 में गांव गिझी से अटायल कन्या उच्च विद्यालय में हुआ था। उन्हें कक्षा तीन की जिम्मेदारी दी गई थी। कक्षा में 21 विद्यार्थियों में से 16 स्कूल आते थे। उन्होंने विद्यार्थियों को आई क्यू लेवल जांचने के लिए छात्रों काे चार-चार के ग्रुप में बांटा। इसी दौरान टीचर किरण को निशा के बारे में पता चला। उन्होंने निशा की मां सुदेश को स्कूल में बुलाया और निशा व आशा दोनों को नहाकर स्कूल भेजने को कहा। उसको खिलौने व अन्य उपहार देकर भी दिनचर्या बदलवाने का प्रयास शुरू किया । कुछ समय बाद प्रयास का परिणाम भी दिखाई देने लग गया।

पिता टीबी से पीड़ित : निशा के पिता जगबीर टीबी रोग से पीड़ित चल रहे है। बड़ी बहन आशा जन्म से ही मंदबुद्वि है। उसके दो छोटे भाई अंकुश व अंकित है। मां एक निजी बैंक में सफाई का काम करके घर का बड़ी मुश्किल से खर्च चला रही है।

X
जिसको मंदबुद्धि मानकर टरका देते थे सहपाठी, टीचर के दुलार से टॉपर बनी
COMMENT