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निजी की जगह गांव के बच्चों को सरकारी स्कूल में पढ़ाएंगे

भास्कर न्यूज | रोहतक/सांपला जिले के सांपला ब्लॉक के खेड़ी साध के ग्रामीण गांव के 1800 बच्चों को प्राइवेट स्कूल से...

Bhaskar News Network | Last Modified - Apr 02, 2018, 03:55 AM IST

भास्कर न्यूज | रोहतक/सांपला

जिले के सांपला ब्लॉक के खेड़ी साध के ग्रामीण गांव के 1800 बच्चों को प्राइवेट स्कूल से हटाकर सरकारी स्कूल में पढ़ाने पर एकजुट हुए हैं। गांव के युवाओं व बुजुर्गों ने रविवार को सिंधू पाने में चौपाल लगाकर फैसला लिया कि अभिभावक प्राइवेट स्कूलों में प्रतिमाह 20 लाख रुपए की राशि खर्च कर रहे हैं। स्कूलों में मनमर्जी की ली जा रही फीस और फंड के नाम पर लूट से बचाने के लिए अभिभावकों से 20 लाख रुपए की पांच फीसदी राशि सरकारी स्कूलों की सुविधाओं को बढ़ाने पर खर्च की जाएगी। इस राशि से गांव में संचालित राजकीय सीनियर सेकेंडरी स्कूल को प्राइवेट स्कूल की तर्ज पर तैयार किया जाएगा। साढ़े तीन घंटे चली चौपाल में बुजुर्ग और युवाओं की 40 सदस्यीय कमेटी बनाने का फैसला लिया। सोमवार को कमेटी के गठन पर अंतिम मुहर लगाई जाएगी।

बैठक

खेड़ी साध गांव मेंे सभी 2100 बच्चों को सरकारी स्कूल में पढ़ाने के लिए बुलाई पंचायत, ग्रामीण बोले

सांपला. खेड़ी साध में ्राइवेट स्कूल से हटाकर सरकारी स्कूल में पढ़ाने को लेकर बैठक करते ग्रामीण।

20 लाख रुपए देते हैं प्राइवेट स्कूल को : मास्टर पवन ने बताया कि गांव के 20 युवाओं ने सर्वे किया था कि गांव में रह रहे परिवारों से कितने बच्चे सरकारी और प्राइवेट स्कूलों में जा रहे हैं। सर्वे में पाया गया कि प्राइवेट स्कूल में अभिभावक प्रतिमाह 20 लाख रुपए फीस देते है।

कम फीस में उपलब्ध होगी बस सेवा : चौपाल में तय किया है कि अब बच्चे प्राइवेट स्कूल में नहीं जाएंगे। स्कूल से घर तक छोड़ने के लिए 800 रुपए की बजाय प्रतिमाह 300 रुपए मासिक शुल्क पर बस की सुविधा दी जाएगी। चौपाल में पूर्व मास्टर रामप्रसाद, शीलगराम, मास्टर धरमबीर, मास्टर खजान, दयाचंद, राममेहर, विजय सिंधू, मास्टर पवन, कमल आदि थे।

ऐसे बनी योजना

जसवंत सिंधू ने बताया कि हम लोग एक दिन ने चौपाल में सरकारी और प्राइवेट स्कूलों से पढ़कर निकलने वाले बच्चों के भविष्य पर चर्चा कर रहे थे। तभी ग्रामीणों ने अपने अपने तर्क रखे। प्राइवेट स्कूल से पढ़कर निकलने वाले बच्चे अधिकतर बिजनेस या कंपनियों में जॉब करते हैं। जो कि अनिश्चितता भरा भविष्य होता है। जबकि सरकारी स्कूल से पढ़कर निकलने वाला छात्र या छात्रा प्रतियोगी परीक्षाओं में शामिल होकर आईएएस, आईपीएस व सिविल सर्विसेज की परीक्षाओं में शामिल होने लक्ष्य लेते हैं। फैसला लिया है कि अभिभावकों को जागरूक कर बच्चों को सरकारी स्कूल में पढ़ाने की पहल करें।

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