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कन्याओं के लिए श्रद्धालुओं को करनी पड़ी भागदौड़, घर-घर से बुलाकर लाए

Dainik Bhaskar

Mar 26, 2018, 04:00 AM IST

Sampla News - रोहतक. नवरात्र समापन पर माता दरवाजा के पास प्रसाद लेकर अपने परिजनों के साथ जातीं कन्याएं। भास्कर न्यूज | रोहतक ...

कन्याओं के लिए श्रद्धालुओं को करनी पड़ी भागदौड़, घर-घर से बुलाकर लाए
रोहतक. नवरात्र समापन पर माता दरवाजा के पास प्रसाद लेकर अपने परिजनों के साथ जातीं कन्याएं।

भास्कर न्यूज | रोहतक

शहर के मंदिरों और घरों में अष्टमी-नवमी की कंजकें एक साथ पूजी गईं। रविवार को सुबह 5 बजे ही घरों में अष्टमी और नवमी की तैयारियां शुरू हो गई। प्रसाद बनते ही कन्याओं को ढूंढने का सिलसिला शुरू हुआ। नौ कन्याओं को एक ही स्थान पर भोजन कराने की परंपरा निभाने के लिए एक घर से दूसरे घर में कन्याओं की खोज शुरू हुई, तब जाकर 5 से 7 कन्याएं पूरी हो पाई। फिर, कन्याओं को भोजन कराया गया। दोपहर तक श्रद्धालुओं को काफी भागदौड़ करनी पड़ी। एक गली से दूसरी गली में जाकर कन्याओं काे पकड़कर लाना पड़ा। सेक्टरों या पॉश एरिया में लोगों को कन्याएं नहीं मिली तो मंदिरों और झुग्गी झोपड़ियों में जाकर कन्या पूजन पूरा किया।

चैत्र नवरात्र में अष्टमी और नवमी पर महिलाओं को कन्याएं ढूंढने में कई घंटे इधर से उधर भागदौड़ करनी पड़ी। शिवाजी काॅलोनी निवासी गौरव ने बताया कि उन्हें 11 कन्याओं को पूजना था और 5 की कमी रह गई थी। इसके लिए अपने दोस्त और रिश्तेदारों की बेटियों को बुलाकर कन्या पूजन का कार्य पूरा किया। डीएलएफ काॅलोनी की निकिता ने बताया कि 6:30 बजे ही पूजन के लिए कन्याएं नहीं मिलती है, इसलिए जल्दी-जल्दी उठकर प्रसाद बनाया और कन्याएं बिठाई। दुर्गा भवन मंदिर, सनातन धर्म मंदिर, प्राचीन गुफा मंदिर, शीतला माता मंदिर, पाड़ा मोहल्ला माता मंदिर आदि में भी कन्या पूजन किया गया।

मंदिरों में किया कन्या पूजन

सांपला | ग्रामीण क्षेत्राें में कन्या पूजन के लिए कन्याओं की कमी देखने को मिली। श्रद्धालुओं को कन्याएं ढूंढ़ने से भी नहीं मिली। नवरात्र समाप्ति पर कन्या पूजन की मान्यता है। इसी के चलते सुबह होते ही कन्या पूजन के लिए लोगों ने कन्याओं को ढूंढना शुरू कर दिया। कन्याओं का ढूंढ़ने का सिलसिला दोपहर तक चलता रहा। कन्याओं की कमी के चलते कई श्रद्धालुओं ने मंदिरों में ही कन्या पूजन किया। एक ही कन्या को कई श्रद्धालुओं को अपने घर भोजन करना पड़ा। वहीं सांपला के साथ-साथ महम, कलानौर क्षेत्र में कन्या पूजन के लिए कन्याओं की कमी रही।

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