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चोट से अंतरराष्ट्रीय पदक का सपना टूटा तो नशे से घिरा, अब नशे के खिलाफ जोगेंद्र करा रहे दंगल

Dainik Bhaskar

Feb 05, 2018, 04:30 AM IST

Sampla News - करौंथा गांव के जोगेंद्र का नाम कुश्ती में प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर पर खूब चमका। वर्ष 1990 में होने वाले मुकाबलों में...

चोट से अंतरराष्ट्रीय पदक का सपना टूटा तो नशे से घिरा, अब नशे के खिलाफ जोगेंद्र करा रहे दंगल
करौंथा गांव के जोगेंद्र का नाम कुश्ती में प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर पर खूब चमका। वर्ष 1990 में होने वाले मुकाबलों में उसके दांव पेच की खूब तारीफ होती थी। पर वर्ष 1993 में अंतरराष्ट्रीय स्पर्धा की तैयारी में जुटे जोगेंद्र को घुटने में चोट लगी। इस चोट से जोगेंद्र उबर नहीं पाया। चिकित्सकों ने उसे खेल से दूर रहने की हिदायत जारी कर दी। खेल से हटने के बाद जोगेंद्र को अकेलेपन ने ऐसा खाया कि वो नशे के जाल में फंस पूरा कॅरियर खराब करने लगा। इसी दौरान उसे अखाड़े के अपने उस्ताद पहलवान मेहर सिंह ने जिंदगी का नहीं दांव सिखाया। जोगेंद्र को नशे के दलदल से बाहर निकलने में मदद की और उसे नया मकसद भी दिया। इसी मकसद के तहत जोगेंद्र ने युवाओं को नशे से दूर रहने के लिए जागरूक करने का अभियान चलाया। वर्ष 2008 में बाबा गरीबदास युवा संगठन बनाया। ये संगठन जागरूकता अभियान के तहत गांवों में दंगल आयोजित कराने लगा। सबसे पहला बड़ा मुकाबला गांव करौंथा में ही 2009 में भारत कुमार कुश्ती दंगल कराया। इसमें देशभर से नामी पहलवान जुटे। हौसला मिला तो करौंथा के आसपास के करीब 20 गांवों में संगठन ने बच्चों और युवाओं को खेलों से जोड़ने का अभियान छेड़ दिया।

खेलों से युवा जोड़े, फिर मंच देने के लिए बनाई अकादमी

जोंगेंद्र करौंथा ने 20 से ज्यादा गांवों में युवाओं को खेलों से जोड़ने का बड़ा अभियान चलाया। काफी संख्या में बच्चे और युवा खेल से जुड़े। इसी दौरान जोगेंद्र के सामने समस्या आई की दंगल का आयोजन नियमित तौर पर कराने के लिए उसे प्रशिक्षित युवा चाहिए। इसके लिए उसने 2014 में गांव में ही अपने परिवार की मदद से जमीन खरीदी और उस पर कुश्ती अकादमी शुरू कर दी। इस अकादमी में बच्चों को चयन होने के बाद उससे कोई खर्च नहीं लिया जाता। अकादमी की ओर से ही पहलवान का रहने खाने से लेकर प्रतियोगिताओं में भाग लेने का खर्च उठाया जाता है। कुछ संगठन भी इसमें जोगेंद्र की मदद करते हैं। जोगेंद्र की करौंथा अकादमी में इस समय 40 बच्चे कुश्ती का प्रशिक्षण लेते हैं। ये सभी बच्चे प्रदेश स्तर की कई प्रतियोगिताओं में पदक जीत चुके हैं। प्रदेश के किसी भी कोने में होने वाला कोई ऐसा दंगल नहीं होता जहां इस अकादमी के बच्चे हिस्सा न लेते हों और पदक न जीतते हो। जोगेंद्र खुद प्रशिक्षण की कमान संभालता है।

देश के लिए पदक जीतने का सपना अब इनसे पूरा करूंगा


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