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स्वीमिंग पूल के लिए एक लाख में लेना होगा लाइसेंस

जिले में कामर्शियल गतिविधि के लिए स्वीमिंग पूल का संचालन करने के लिए अब संचालकों को लाइसेंस लेना होगा। एक लाख रुपए...

Bhaskar News Network | Last Modified - Feb 08, 2018, 04:35 AM IST

जिले में कामर्शियल गतिविधि के लिए स्वीमिंग पूल का संचालन करने के लिए अब संचालकों को लाइसेंस लेना होगा। एक लाख रुपए लाइसेंस फीस देने के बाद बाद ही वे पूल का संचालन करने के लिए मान्य होंगे। ये लाइसेंस एक साल के लिए मान्य होगा। बिना लाइसेंस के स्वीमिंग पूल का संचालन करने वाले संस्थानों पर खेल विभाग की ओर से कार्रवाई की जाएगी। नई व्यवस्था को अमल में लाने के लिए जिला उपायुक्त ने खेल विभाग को हरी झंडी दे दी है। लाइसेंस लेने की अंतिम तारीख 15 फरवरी निर्धारित की गई है।

01लाख रुपए में एक साल के लिए मिलेगी मंजूरी

स्वीमिंग पूल के नाम पर कामर्शियल गतिविधि संचालित करने वाली संस्थाओं पर सुरक्षा के मद्देनजर लागू की नई व्यवस्था

इन 6 मानकों पर उतरना होगा खरा

1. ट्रेनिंग सेंटर को लाइसेंस फार्म में पूरा ब्यौरा देना होगा।

2. सेंटर में लाइफ गार्ड कब-कब रहते हैं।

3. बच्चों की सिक्योरिटी के क्या इंतजाम है।

4. पूल सप्ताह में कितनी बार साफ होता है।

5. ट्रेनिंग देने वाले का नाम और कांटेक्ट नंबर देना होगा।

6. ट्रेनर्स को कितने वर्ष का अनुभव है, इसकी डिटेल देनी होगी।

समर सीजन में खुल जाते हैं तैराकी ट्रेनिंग देने वाले सेंटर :स्वीमिंग पूल के एक संचालक ने बताया कि समर सीजन में परीक्षाएं खत्म होने के साथ ही अवकाश भी हो जाते हैं। ऐसे में तैराकी का प्रशिक्षण लेने वाले युवाओं व बच्चों की संख्या में इजाफा होता है। ऐसे में फिर जगह जगह सुरक्षा मानकों को ध्यान में रखे बगैर ही ट्रेनिंग सेंटर खुल जाते हैं। मानक पूरे न होने से अनहोनी होने की आशंका भी बनी रहती है। स्वीमिंग पूल के मेंटीनेंस में एक से डेढ़ लाख रुपए तक का खर्च आता है। इसलिए फीस भी महंगी लेते हैं।

लाइसेंस फार्म के साथ ही तीन विभागों से एनओसी लेना जरूरी

जिला खेल अधिकारी निर्मला ने बताया कि संचालकों को लाइसेंस फार्म के साथ सीएमओ, पुलिस प्रशासन, नगर निगम या हुडा सहित पांच से छह विभाग से एनओसी लानी होगी। इसमें उन्हें यह भी स्पष्ट करना होगा कि 25 मीटर के पूल में दो लाइफबॉय व 50 मीटर के पूल में चार लाइफ बाय व ट्रेंड प्रशिक्षक उपलब्ध है या नहीं । समय समय पर निरीक्षण किया जाएगा।

स्कूल पूल में डूबने से गई

थी बच्चे की जान

गत वर्ष जींद रोड स्थित एक वाटर पार्क और दिल्ली रोड स्थित एक स्कूल के स्वीमिंग पूल में बच्चे की डूबने से मौत हो गई थी। घटनाक्रम की जांच में सुरक्षा मानकों का पालन न किया जाना पाया गया था। अफसरों की माने तो रोहतक ब्लॉक में 15 संस्थानों के साथ ही लाखनमाजरा, महम, सांपला व कलानौर ब्लॉक में स्वीमिंग पूल के संचालन में सुरक्षा मानकों का पूरी तरह से पालन नहीं किया जा रहा है। सुरक्षा को दृष्टिगत रखते हुए तत्कालीन जिला उपायुक्त अतुल कुमार ने लाइसेंस के बिना स्वीमिंग पूल का संचालन न किए जाने प्लान तैयार कराया था।

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