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मलिक ने केंद्रीय मंत्री बीरेंद्र से मिलकर रखीं मांगें, केंद्र और राज्य के आरक्षण की करें समयसीमा तय

अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति ने वर्ष 2017 में दिल्ली कूच के बाद अब फरवरी 2018 में जींद कूच का फैसला लिया है। इस...

Danik Bhaskar | Feb 08, 2018, 04:35 AM IST
अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति ने वर्ष 2017 में दिल्ली कूच के बाद अब फरवरी 2018 में जींद कूच का फैसला लिया है। इस मामले को लेकर बुधवार को जसिया में धरनास्थल पर बैठक की गई। इस दौरान जिले को सेक्टर में बांटा गया और उनके जिम्मेदार लोगों को जसिया में 15 फरवरी के लिए ड्यूटी सौंप दी गई। इसमें अठगामा, महम, किलोई, लाखनमाजरा, सांपला, कलानौर सेक्टर के जिम्मेदार जसिया बैठक में पहुंचे।

इस दौरान समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष यशपाल मलिक ने कहा कि अब सरकार को जाट रैली की तरह नेट बंद करने और धारा 144 लगाने जैसी कार्रवाई जींद रैली को लेकर भी कर देनी चाहिए। चूंकि सिर्फ जाटों की रैली को लेकर ही सरकार दहशत फैलाती आई है।

चंडीगढ़ में मंगलवार को भी अधिकारियों के साथ बैठक की गई थी। इसके बाद सरकार की ओर से फिर से कुछ केस वापसी का ड्रामा किया है, जबकि सरकार को कहा गया था कि वे सभी केस वापस ले लें। ऐसा नहीं किया जा रहा है।

अब इस बारे में केंद्रीय चौ. बीरेंद्र सिंह से भी मुलाकात की गई। साथ ही कहा कि केंद्र सरकार इस बात में हस्तक्षेप करें और पांच मांगों को पूरा किया जाए। केंद्र और राज्य सरकार की ओर से आरक्षण को लेकर तारीख तय कर देनी चाहिए कि कितने समय में आरक्षण दे दिया जाएगा। सरकार साकारात्मक रवैया नहीं अपना रही है। वहीं चेतावनी देते मलिक ने कहा कि अब 18 फरवरी से शुरू होने वाले आंदोलन के बाद जो भी अधिकारी आएगा वह यह सोच-समझकर आए कि अब विश्वासघात बर्दाश्त नहीं होगा। उन्होंने कहा कि भाजपा के बड़े पदाधिकारी हरियाणा में जहां भी आएंगे, उनसे हर जगह जाट समाज की मांगों के बारे में जवाब मांगा जाएगा।

18 को मनेगा बलिदान दिवस

मलिक ने कहा कि 18 फरवरी को बलिदान दिवस मनेगा और उसी दिन जाट समाज की मांगों को लेकर आंदोलन की घोषणा होगी। मलिक ने कहा कि जाट समाज की एक ही मांग है कि सरकार के साथ पिछले साल 19 मार्च काे हुए समझौते को पूर्ण रूप से लागू किया जाएगा। यह समझौता सीएम मनोहर लाल खट्टर, केंद्रीय मंत्री पीपी चौधरी व बीरेंद्र सिंह की मौजूदगी में हुआ था। इसके बाद साझा प्रेस कांफ्रेंस में समझौते की सभी शर्तों को लागू करने की बात कही गई थी।