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गलत धारणाओं को दूर करने के लिए खुलकर करनी होगी बातचीत: अजय

महिला होना सबसे अलग है, क्योंकि केवल उन्हें ही मां बनने का अधिकार प्राप्त है। जब सभी महिलाएं खुलकर मासिक धर्म जैसे...

Bhaskar News Network | Last Modified - Feb 07, 2018, 05:05 AM IST

महिला होना सबसे अलग है, क्योंकि केवल उन्हें ही मां बनने का अधिकार प्राप्त है। जब सभी महिलाएं खुलकर मासिक धर्म जैसे विषय पर बात करेंगी, तभी समाज में से मासिक धर्म से संबंधित गलत धारणाओं को दूर किया जा सकेगा। यह बात अतिरिक्त उपायुक्त मिशन के निदेशक अजय कुमार ने कही।

वे मंगलवार को सांपला ब्लॉक में हरियाणा राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं के लिए हुई जागरूकता कार्यशाला में बोल रहे थे। यह कार्यशाला मासिक धर्म स्वास्थ्य पर की गई थी। इसमें व्योमीनी संस्था ने भी महिलाओं को जागरूक किया, जो सेनीटरी नेपकिन बनाने का कार्य करती है। संस्था की निदेशिका प्राची कौशिक ने कहा कि मासिक धर्म या माहवारी जैसे शब्द जब हमें कहीं सुनाई देते हैं तो हम चुप हो जाते हैं। इस विषय पर बात करने से कतराते हैं। उन्होंने कहा कि समाज में धारणा बनी हुई है कि मासिक धर्म अपवित्र है। जबकि यह एक महिला के जीवन की स्वाभाविक दैहिक प्रक्रिया है, इन्हीं की वजह से वो जननी कहलाती है। पर, धारणा यह है कि वे रसोई में खाना पकाने और मंदिर में जाने जैसे कार्य नहीं कर सकती है। यह भी धारणा है कि बालिकाओं को अपने बाल नहीं धोने चाहिए, जबकि गर्म पानी से नहाना मासिक धर्म के दौरान एठन को कम करने में मदद करता है। इस कार्यशाला में 132 स्वयं सहायता समूहों की 700 से अधिक महिलाओं ने भाग लिया। इस अवसर पर जिला आजीविका मिशन के जिला कार्यक्रम प्रबंधक डॉ. विनोद धनखड़, सांपला खंड शिक्षा अधिकारी कृष्णा फौगाट, भैंसरु कलां की सरपंच मीना देवी मौजूद रहे।

रोहतक. सांपला में स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को सबोंधित करते एडीसी अजय कुमार।

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