Hindi News »Haryana »Sampla» बिल्डिंग मैटीरियल के भाव बढ़ने से विकास कार्य बाधित

बिल्डिंग मैटीरियल के भाव बढ़ने से विकास कार्य बाधित

बिल्डिंगमैटीरियल के भाव में तेजी आने से ग्राम पंचायतों के विकास कार्यों पर ब्रेक से लग गया है। सरकार ने ग्राम...

Bhaskar News Network | Last Modified - Jan 07, 2018, 10:10 AM IST

बिल्डिंगमैटीरियल के भाव में तेजी आने से ग्राम पंचायतों के विकास कार्यों पर ब्रेक से लग गया है। सरकार ने ग्राम पंचायतों को जो बिल्डिंग मैटीरियल के रेट दिया हैं वह बाजार भाव से बहुत कम है। सरपंच रेट बढ़वाने के लिए अधिकारियों के चक्कर काट रहे हैं। ब्लॉक के सरपचों ने एसडीएम से मुलाकात कर भी रेट बढ़ाने की मांग की है। ताकि विकास कार्यों में बाधा आए।

दिवाली पर्व के समय लगातार बढ़े प्रदूषण स्तर को कम करने के लिए नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल से पिछले दिनों जारी की गई गाइड लाइन का असर बिल्डिंग मैटीरियल पर पड़ा है। प्रदूषण स्तर कम करने के लिए पुरानी तकनीक से चल रहे र्इंट भट्ठों पर रोक लगने के कारण बिल्डिंग मैटीरियल के रेट में बढ़ोतरी हुई है। सरकार के आदेश के अनुसार पंचायत को विकास कार्यों के लिए भट्टा ईंट 4590 रुपए प्रति हजार तक खरीदने के आदेश हैं, लेकिन अब भट्टा ईंट का भाव 5500 रुपए प्रति हजार तक जा पहुंचा है। ऐसे में पंचायत विकास कार्य कराएं भी तो कैसे? लोगों का कहना है कि पहले इतने कम समय में इतनी तेजी कभी नहीं आई। वहीं, बजरी, जमना रेती, ब्लॉक ईंट और टाइल के रेट भी पंचायतों को दी गई रेट लिस्ट से बहुत ज्यादा हैं। प्रशासन की ओर से पंचायतों को आश्वासन तो दिया जा रहा है, लेकिन अभी तक कुछ नहीं किया गया।

जुलाई में बंद हुए भट्‌ठे अभी नहीं हुए चालू, पुराना स्टाक खत्म

एनजीटीके आदेश के बाद इलाके के पुरानी तकनीक लकड़ी, कचरे अन्य अवशेषों से चलने वाले ईंट भट्ठे गत वर्ष जुलाई से ही बंद पड़े हैं। ज्यादा खर्च की वजह से नई जिग जैग तकनीक से भट्ठे चालू करने में अभी समय लगेगा। क्योंकि नई तकनीक पर लाखों रुपए का खर्चा है। अब जो पहले माल तैयार था वह खत्म हो चुका है। नई तकनीक के बारे में भट्ठा संचालक विदानंद और कृष्ण कुमार का कहना है कि नई तकनीक से भट्ठा चलाने में 35 से 40 लाख रुपए का खर्चा है। जल्दी ये भी चालू नहीं हो रहे हैं, जबकि पुरानी ईंटों का स्टाक कम रह गया

सरकार रखे एक समान

रेट, भेदभाव नहीं करे

नवबंरमहीने में क्रेशर का रेट 29 रुपए प्रति फुट था, लेकिन अब यह बढ़कर 35 रुपए प्रति फुट हो गया है। ऐसे ही बजरी, रेत का है। जो 27 रुपए प्रति फीट थी अब बजरी 34 से 35 रुपए फीट मिल रही है। जो र्इंट 4500 रुपए प्रति हजार थी वे अब 5500 रुपए प्रति हजार हो गई, जबकि सरकार की ओर से केवल 5000 रुपए प्रति हजार ईंट और 80 एमएम साइज की इंटरलोक ईंटों के रेट दूसरे जिलों में जहां 1400 प्रति हजार रेट दिया जाता है वहीं, रोहतक में साढ़े 12 सौ प्रति हजार का रेट दिया जा रहा है। पाकस्मा सरपंच मुकेश राणा और गांधरा के प्रधान सोनू मलिक ने कहा कि सरकार को प्रदेश के सभी जिलों में मैटीरियल के एक जैसे रेट रखने चाहिए। भेदभाव नहीं रखना चाहिए।

सर रेट में सुधार कराओ : सरपंच

सरकारसे बिल्डिंग मैटीरियल रेट घटाने को लेकर दो दिन पूर्व सरपंच बिजेंद्र मलिक, राजेश कुमार, अनुप सिंह, लीला, सोनू, विनोद और जसबीर सिंह हरेंद्र, संदीप, मुकेश राणा प्रदीप कुमार आदि ने एसडीएम तरुण कुमार से मिलकर रेट में सुधार कराने का आग्रह किया है। सरपंचों ने कहा कि सरकार ने जो मैटीरियल के रेट दिए हैं उस रेट में कोई सामान नहीं मिल रहा। सरकारी रेट पर सामान खरीदते हैं तो उस सामान की गुणवत्ता कम होती है। ऐसे में विकास कार्य बाधित हो रहे हैं।

सांपला. पुरानीनई ईंटों से हो रहा गली निर्माण।

परेशानी

दैनिक भास्कर पर Hindi News पढ़िए और रखिये अपने आप को अप-टू-डेट | अब पाइए Sampla News in Hindi सबसे पहले दैनिक भास्कर पर | Hindi Samachar अपने मोबाइल पर पढ़ने के लिए डाउनलोड करें Hindi News App, या फिर 2G नेटवर्क के लिए हमारा Dainik Bhaskar Lite App.
Web Title: बिल्डिंग मैटीरियल के भाव बढ़ने से विकास कार्य बाधित
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

More From Sampla

    Trending

    Live Hindi News

    0

    कुछ ख़बरें रच देती हैं इतिहास। ऐसी खबरों को सबसे पहले जानने के लिए
    Allow पर क्लिक करें।

    ×