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जानलेवा फैक्ट्रियां बेपरवाह प्रशासन

भास्कर न्यूज | सांपला/रोहतक कुलताना-बेरी रोड पर आरएसपी रबर्स रिसोलिंग फैक्ट्री में आग लगने के मामले में गुरुवार...

Bhaskar News Network | Last Modified - Jan 12, 2018, 02:35 PM IST

भास्कर न्यूज | सांपला/रोहतक

कुलताना-बेरी रोड पर आरएसपी रबर्स रिसोलिंग फैक्ट्री में आग लगने के मामले में गुरुवार को श्रम विभाग की टीम ने जांच रिपोर्ट मुख्यालय भेज दी है। जांच के दौरान काफी गंभीर कमियां निकलकर सामने आई हैं। बिना मानकों के बनाए गए टायर रिसोलिंग के पायरोलिसिस प्लांट में जुगाड़ की मशीनरी के सहारे काम हो रहा था। जांच में टीम ने पाया कि मोटी चादर के रिसोलिंग टैंक की जगह आमतौर पर प्रयोग में आने वाला पानी का पुराना टैंकर ही यहां लगा था। मजदूरों ने भी इसकी शिकायत मालिक से की थी, लेकिन इसे बदला नहीं गया। इसके वाल्व के साथ एक पाइप टूट गई थी। इसे वेल्डिंग करके कर्मचारी जोड़ने का प्रयास कर रहे थे। इस टैंक में ही टायर को गलाने के लिए डाला जाता था और इसमें से तेल निकालने की प्रक्रिया चलती थी। इस प्रक्रिया के दौरान ही टैंक में मिथेन गैस बनने लगी और जब यह मिथेन गैस टूटे हुए पाइप से बाहर रिसकर आने लगी, उसी समय वेल्डिंग का काम भी चल रहा था। अचानक शाम 2 बजे वेल्डिंग की चिंगारी के संपर्क में मिथेन गैस आई तो टैंक में जबरदस्त ब्लास्ट हो गया। इसमें जलकर बिहार निवासी मजदूर कमल की मौत हो गई, जबकि मुन्ना व सुनील घायल हो गए।

दो वर्ष की सजा व एक लाख रुपए जुर्माना का प्रावधान

श्रम विभाग के सहायक निदेशक शैलेष अहलावत ने कहा कि इस मामले में जांच रिपोर्ट मुख्यालय भेज दी गई है। अब इस रिपोर्ट के आधार पर फैक्टरी संचालक को नोटिस जारी किया जाएगा। इसमें एक महीने का समय दिया जाता है। संचालक की चंडीगढ़ में लेबर कमिश्नर के सामने सुनवाई की जाती है। इसमें पोस्टमार्टम, एफआईआर व गवाह के आधार पर जांच को आगे बढ़ाया जाएगा। गलती पाए जाने पर दो साल की सजा और एक लाख रुपए तक प्रति नियम उल्लंघना के आधार पर जुर्माना वसूला जाता है। वहीं, एफएसएल एक्सपर्ट डॉ. सरोज दहिया ने भी घटनास्थल का दौरा कर साक्ष्य जुटाए।

सांपला में टायर रिसोलिंग फैक्ट्री में लगी आग की प्रशासन ने भेजी रिपोर्ट, मालिक को देंगे नोटिस

श्रम विभाग की जांच में मिलीं खािमयां, टायरों के गलने से बनी मिथेन गैस का कमजोर टैंक से रिसाव होने पर हुआ था धमाका

सांपला. टायर रिसोलिंग फैक्ट्री में मौजूद पुराना टैंक, जिस पर सवाल उठ रहे हैं।

इस तरह निकाला जाता है तेल :फैक्टरी में पुराने टायरों से तेल निकालने का काम किया जाता था। इस काम को करने के लिए एक बड़ा रिएक्टर लगाया हुआ है। इसमें कटे हुए टायरों को डाला जाता है। इसके बाद रिएक्टर के नीचे लकड़ियों को जलाकर ज्यादा तापमान पैदा किया जाता है। इसके बाद रिएक्टर काम करना शुरू कर देता है। इस प्रक्रिया के करने से टायरों का तेल निकलने लग जाता है वह अन्य स्प्रेटा टैंक में इकट्ठा होने लगता है। यह तेल काफी गर्म होता है। स्प्रेटा टैंक से दो लोहे की बनी पाइप निकलती है। एक पानी के टैंक में जाती है। पानी का टैंक जमीन से काफी ऊपर रखा जाता है। दूसरी पाइप उस टैंक में आती है, जहां गर्म तेल आता है। यह टैंक जमीन के अंदर करीब चार फुट नीचे बनाया गया है।

रात को खुले आसमान तले काटी मजदूरों ने रात :फैक्ट्री में तेल टैंक से हुए हादसे से सभी मजदूर गुरुवार को भी दहशत में नजर आए। मजदूरों का कहना है कि वे फैक्ट्री के अंदर पूरी रात कड़ाके की ठंड में बाहर अलाव जलाकर बैठे रहे। फैक्ट्री मालिक उनकी मजदूरी का हिसाब कर देगा तो वे उसी दिन अपने प्रदेश जाएंगे।

सीटू ने घटनास्थल का दौरा कर किया प्रदर्शन

सीटू राज्य सह सचिव विनोद व नरेश के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने घटनास्थल का दौरा कर पीड़ित मजदूरों से बातचीत की। इसके बाद उन्होंने सचिवालय में प्रदर्शन कर डीडीपीओ को ज्ञापन सौंपा। उन्होंने कहा कि पिछले साल जिले में दर्जनों मजदूर दुर्घटनाओं में मारे जा चुके हैं। जिले के श्रम विभाग द्वारा जो आंकड़े दिए गए हैं, उसमें केवल 227 फैक्ट्रियां ही रजिस्टर्ड हैं। फिर हजारों फैक्ट्रियां कैसे चल रही हैं। इसमें श्रम विभाग तथा सेफ्टी एवं हेल्थ विभाग की भारी मिलीभगत के चलते मजदूरों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ रहा है। सीटू ने मांग की है कि मृतक मजदूरों के परिवारजनों को 10-10 लाख रुपये मुआवजा दिया जाए, घायलों को फ्री इलाज व 2-2 लाख रुपये दिए जाएं, फैक्ट्री मालिक के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज हो व श्रम विभाग, सेफ्टी एवं हेल्थ विभाग के अधिकारियों के खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जाए। संगठन ने मांग की है कि सभी फैक्ट्रियों का समयबद्ध ढंग से सर्वे हो व न्यूनतम वेतन सहित तमाम श्रम कानूनों को लागू करवाए जाए।

नगर निगम क्षेत्र में अभी प्राॅपर्टी की स्थिति

1383

एग्रीकल्चर लैंड

21979

काॅमर्शियल

15

हार्टीकल्चर

758

इंडस्ट्रियल

470

इंस्टीट्यूशनल

466

म्युनिसिपल एसेस्ट

91867

रेजीडेंशियल

613

अंडर कंस्ट्रक्शन

2047

खाली प्लाट काॅमर्शियल

155

खाली प्लाट इंडस्ट्रियल

23

खाली प्लाट इंस्टीट्यूशनल

445

धार्मिक स्थल

55401

खाली प्लाट रेजीडेंशियल

175622

कुल

दोनों हादसों में दी जाएगी 5-5

लाख रुपए की मदद : बल्हारा

वहीं श्रम कल्याण बोर्ड के चेयरमैन रमेश बल्हारा ने कहा कि अभी तक जिले में दो बड़ी घटनाएं हो चुकी हैं। इनमें अमूल मिल्क प्लांट में दीवार गिरने से मजदूर की मौत और आरएसपी रबर्स फैक्टरी में मजदूर की मौत के मामले में 5-5 लाख रुपए मुआवजा परिजनों को दिया जाएगा।

10 घंटे काम करने के बाद पराली बिछा जमीन पर सोते हैं मजदूर

फैक्ट्री में सभी मानक ताक पर रखे गए थे। कर्मचारियों का आरोप है कि उनसे 10 घंटे से ज्यादा काम लिया जा रहा था। फैक्ट्री के अंदर रहने के लिए जो कमरे दिए गए हैं, उनकी हालत दयनीय है। इनमें कर्मचारी जमीन पर पराली बिछाकर सोते हैं। पानी तक का इंतजाम नहीं है। कर्मचारी मिथुन ने कहा कि 10 घंटे काम करकेे 10 हजार रुपए मिलते हैं।

प्रशासन की ओर से कोई सांत्वना तक देने नहीं पहुंचा

रिसोलिंग फैक्टरी में हुए इतने बड़े हादसे के बाद भी प्रशासन की आंखें बंद हैं। गुरुवार को भी प्रशासन की और से कोई बड़ा अधिकारी मौके का जायजा लेने और सांत्वना व मदद देने नहीं पहुंचा। मजदूरों ने बताया कि एफएसएल की टीम के अलावा कोई नहीं पहुंचा है।

तीन बेटियों के सिर से उठा पिता का साया

बिहार निवासी मृतक कमल तीन बेटियों का बाप है। अभी उसके परिजन बिहार से नहीं पहुंचे हैं। घायल मुन्ना राम के पिता वीरेंद्र भी इसी फैक्टरी में काम करते हैं। जो ठेकेदार सुनील के रिश्ते में फूफा लगते हैं। मुन्ना राम की डेढ़ वर्ष की बेटी है। प|ी जम्मू में अपने माता-पिता के पास रहती है। सभी मजदूर ठेकेदार सुनील के रिश्तेदार हैं। सुनील के गांव से कपिल देव, जितेंद्र, मिथुन, हमेता, कमल, चंद्रकेतु, विकास, निक्की हैं, जबकि वीरेंद्र व मुन्ना राम बिहार के सिवाना जिले के रहने वाले हैं।

पड़ताल | नगर निगम व विकास भवन के कार्यालयों में भी एक्सपायरी डेट के लगे हैं अग्निशमन यंत्र, बदलने की अभी भी नहीं हुई पहल

271 के पास ही फायर एनओसी, 22 हजार काॅमर्शियल यूनिट्स की कोई जांच नहीं

भास्कर न्यूज | रोहतक

फायर एक्ट 2009 को लेकर नगर निगम और एफएसओ कार्यालय गंभीर नहीं है। वर्ष 2011 के सर्वे के अनुसार नगर निगम क्षेत्र में एक लाख 75 यूनिट्स हैं, जिसमें 21979 यूनिट्स कामर्शियल हैं, जिनके लिए फायर डिपार्टमेंट से एनओसी लेना अनिवार्य है। पर वर्ष 2017 में पूरे जिले में मात्र 271 प्रतिष्ठानों को ही एनओसी जारी की गई। कारण, इससे ज्यादा ने इन विभागों के पास आवेदन ही नहीं किया। बावजूद इसके दोनों विभागों ने भी बाकी बची यूनिटों पर कभी कोई कार्रवाई नहीं की। बल्कि उन्हें कभी नोटिस तक जारी नहीं किया। अब सांपला के इंडस्ट्रियल एरिया में बुधवार को हुए हादसे के बाद फिर से अफसर सक्रिय हुए हैं। फायर सेफ्टी ऑफिसर को सभी कामर्शियल यूनिट्स की जांच कर मानक पूरे नहीं होने पर कार्रवाई के आदेश दिए गए हैं। वर्ष 2011 के बाद से अकेले नगर निगम क्षेत्र में 30 हजार से ज्यादा कामर्शियल यूनिट्स वर्तमान समय में चल रही हैं। इधर सरकारी कार्यालयों में भी एक्सपायरी डेट के अग्निशमन यंत्रों को साल बदलने के बाद चेंज नहीं किया गया। नगर निगम के डीएमसी इंद्रजीत कुल्हड़िया ने बताया कि नगर निगम क्षेत्र में 21979 काॅमर्शियल यूनिट्स हैं। फायर एनओसी नहीं लेने वालों की जांच और कार्रवाई के निर्देश एफएसओ को दिए गए हैं।

अग्निशमन यंत्र पर नहीं

लगी एक्सपायरी डेट

नगर निगम के कमिश्नर दफ्तर से लेकर विकास भवन तक कहीं भी फायर एक्ट के नियमों की पालन नहीं दिखाई दी। गुरुवार को अंबेडकर चौक स्थित नगर निगम कार्यालय के ग्राउंड फ्लोर की मुख्य गली में सीढ़ी के पास लगे अग्निशमन यंत्र पर 7 जनवरी वर्ष 2017 की डेट की पर्ची लगी है, जबकि निगम के ही नागरिक सुविधा केंद्र में लगे अग्निशमन यंत्र पर एक्सपायरी डेट की पर्ची ही फटी पड़ी है। इसी क्रम में विकास भवन के किसी भी तल पर लगे अग्निशमन यंत्र पर एक्सपायरी डेट की पर्ची तक नहीं लगी है। ऊपर से विकास भवन परिसर में लगे फायर बाक्स के शीशे टूटे पड़े हैं।

शीर्ष अधिकारियों के

आदेश पर चेकिंग अभियान

फायर एनओसी के लिए अप्लाई करने वालों की यूनिट्स की ग्राउंड रियलटी चेक करने के बाद उनकी फाइल बनाकर शीर्ष अधिकारियों को भेज दी जाती है। जहां से अनुमति मिलने के बाद एनओसी मिलती है। कामर्शियल यूनिट्स में फायर नार्म्स की जांच के लिए नगर निगम कमिश्नर या डीसी के स्तर से आदेश मिलने पर चेकिंग अभियान चलाया जाता है। -देवेंद्र कुमार नंदा, फायर सेफ्टी ऑफिसर

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