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कपड़ों में रेत भरने से ऊपर नहीं आए शव, 4 किमी के दायरे में ही थे, नहर बंद की तो 57 घंटे बाद मिले

सोनीपत के रोहट में नहर में डूबे तीनों युवकों के कपड़ों में रेत भर गया था। इसके बाद शव ऊपर नहीं आ सके और रेत के नीचे ही...

Bhaskar News Network | Last Modified - Jan 24, 2018, 07:35 PM IST

सोनीपत के रोहट में नहर में डूबे तीनों युवकों के कपड़ों में रेत भर गया था। इसके बाद शव ऊपर नहीं आ सके और रेत के नीचे ही दब गए। दिल्ली को जाने वाली पश्चिमी यमुना लिंक नहर में पानी अधिक होने की वजह से शवों को तलाशा नहीं जा सका। साेमवार को परिजनों ने जब जाम लगाया तो उसी रात 8 बजे नहर बंद कर दी गई। मंगलवार सुबह नहर का पानी रुकने के बाद शवों की तलाश की। सुबह करीब साढ़े 9 बजे रेत में दबे सौरभ के शव काे गोताखोर का पैर लगा। इसके बाद तलाश करने पर वहां पर सौरभ का शव मिल गया। इसके बाद करीब 100 मीटर की दूरी पर रोहित तो चार किलोमीटर की दूरी पर हितेश का शव मिला। सांपला में जब तीनों दोस्तों के शव ले जाए गए तो चीख-पुकार मच गई। एक साथ तीनों दोस्तों की चिता को अग्नि दी गई। वहां लोगों ने यही कहा कि यदि पहले दिन ही नहर बंद करवा दी जाती तो शवों की 57 घंटे तक पानी में दुर्गति नहीं होती। - संबंधित खबर पेज 3 पर

सांपला में एक साथ जली तीनों दोस्तों की चिता, एक का पहले हो चुका संस्कार

सीए का एग्जाम क्लीयर होने पर पार्टी करने निकले थे 5 दोस्त, चार की मौत

सांपला मेन बाजार के रहने वाले लक्ष्य, रोहित, सौरभ, हितेश और चिराग शनिवार रात मुरथल ढाबे पर पार्टी करने के लिए घर से चले थे। हितेश का सीए का एग्जाम क्लियर होने की खुशी में पार्टी दी जा रही थी। होंडा इमेज कार से रविवार रात को पांचों सोनीपत की तरफ चले तो रोहट के पास पश्चिमी यमुना लिंक नहर पर अचानक चालक सौरभ ने संतुलन खो दिया। कार रांग साइड में चली गई। आगे से ट्रक आने पर सौरभ ने बचाव का प्रयास किया। कार ने पुल की रेलिंग तोड़ दी और फिर पानी में जा गिरी। एक साइड का शीशा टूटने से चिराग पास की झाड़ी पकड़कर बच गया। लक्ष्य का अगली सुबह कार निकालते वक्त शव मिला, जबकि तीन अन्य के शव नहीं मिले। नहर में पानी कम नहीं करने पर परिजनों ने सोमवार को 3 जगह जाम लगाया। इसके बाद सोमवार रात 8 बजे नहरी पानी रोक दिया गया।

रोहतक. सांपला के श्मशान घाट में विलाप करते युवकों के परिजन।

60 से अधिक गाेताखोरों ने की तलाश

मंगलवार को नहर बंद होने के बाद पता चला कि तीनों शवों के कपड़ों में रेत भरने से डेड बॉडी ऊपर नहीं आ पाई और धीरे-धीरे रेत में ही दब गई। नहर बंद नहीं होती तो शव ढूंढना मुश्किल था। सरकारी औैर आसपास के क्षेत्र के 60 से अधिक तैराक बुलाए गए। नहर का पानी दिल्ली जाने की वजह से नहर बंद करना मुश्किल पड़ रहा था। परिजनों द्वारा जाम लगाने के बाद नहर बंद करने का फैसला लिया।

रोहित वधवा।

सौरभ सचदेवा।

हितेश धमीजा।

सर्च अभियान के

बाद बारिश आई

नहर बंद होने के बाद शव मिले। इसके बाद ही बरसात का दौर शुरू हो गया। तीनों शवों को अस्पताल पहुंचाकर पोस्टमार्टम करवाया गया। सभी का कहना था कि बारिश शुरू होने के बाद शव तलाशना मुश्किल हो जाता। काफी संख्या में खरखौदा और सांपला से लोग अस्पताल में पहुंचे थे।

चिराग को तैरना नहीं आता था, वही बचा

परिजनों ने बताया कि चिराग को ही तैरना नहीं आता था, जबकि हादसे में वही बच पाया। उसे अभी साथियों के बारे में बताया नहीं गया है।

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Web Title: kpdeon mein ret bharne se oopar nahi aaye shv, 4 kimi ke daayre mein hi the, nhar band ki to 57 Ghante baad mile
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

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