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नेशनल वेट लिफ्टिंग में कांस्य विजेता उषा मजदूरी करने को मजबूर

वेट लिफ्टिंग में गांव मोरखेड़ी की बेटियों ने राज्य व नेशनल स्तर पर कई पदक जीत गांव को एक नई पहचान दिलाई है।...

Dainik Bhaskar

Apr 22, 2018, 03:25 AM IST
नेशनल वेट लिफ्टिंग में कांस्य विजेता उषा मजदूरी करने को मजबूर
वेट लिफ्टिंग में गांव मोरखेड़ी की बेटियों ने राज्य व नेशनल स्तर पर कई पदक जीत गांव को एक नई पहचान दिलाई है। संसाधनों के अभाव में भी गांव की उषा, सविता, दीक्षा, प्रीति बिडला, प्रीति ने कई पदक जीते है। परिवार की आर्थिक हालत ठीक नहीं होने के कारण वह खेल छोड़कर 20 से 25 दिनों से खेतों में गेहूं की कटाई कर रही है। इंडिया गेट वेट लिफ्टिंग की ओर से आयोजित वेट लिफ्टिंग में हरियाणा से 8 खिलाड़ियों का चयन हुआ था। इनमें से 5 महिला खिलाड़ी गांव मोरखेड़ी से चयनित हुई थी। यह प्रतियोगिता विशाखापट्टनम में 2017 में 20 से 25 फरवरी तक हुई थी। इस प्रतियोगिता में माेरखेड़ी की उषा ने कांस्य जीता था। उषा के पिता गांव में बिजली मिस्त्री का काम करते है। वहीं अन्य खिलाड़ी आर्थिक स्थिति कमजोर होने के चलते प्रतियोगिता में भाग नहीं ले सकी थी।

सांपला. माता-पिता के साथ पदक दिखाते कांस्य पदक विजेता उषा।

सांपला. दूसरों के खेतों में गेहूं काटते उषा।

पिता राजमिस्त्री का करते हैं काम

वेट लिफ्टर खिलाड़ी सविता के पिता रामनिवास गांव में हीरा राज मिस्त्री का काम करते है। वह भी आर्थिक स्थिति खराब होने के कारण प्रतियोगिता में भाग नहीं ले सकी थी। वर्ष 2014 में आयोजित राज्य स्तरीय प्रतियोगिता के 58 किलोग्राम भार में सविता ने गोल्ड मेडल जीता था। वर्ष 2018 में यूथ नेशनल प्रतियोगिता के लिए प्रदेश स्तर से चयन हुआ था। गांव में ही बिजली मिस्त्री सुरेंद्र की बेटी उषा ने वर्ष 2016 में वेट लिफ्टिंग का गेम शुरू किया। वर्ष 2016 में ही 44 किलोग्राम भार में जिला स्तर व राज्य स्तर पर गोल्ड जीता था। वर्ष 2017 में गोवाहटी में राष्ट्रीय स्तर पर हुई प्रतियोगिता में कांस्य पदक प्राप्त किया। गांव की अन्य बेटी दीक्षा 69 किलोग्राम भार, प्रीति बिडला 48 किलोग्राम व प्रीति 58 किलोग्राम भार में चयनित होने के बाद भी नहीं खेल पाई थी। दीक्षा के पिता का देहांत हो चुका है, अब मां ही खिलाड़ी का पालन-पोषण कर रही है।

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