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एनसीआर नहर से मिलेगा हसनगढ़ को पानी

14 हजार आबादी वाले गांव हसनगढ़ को अब एनसीआर (नेशनल कैपिटल ब्रांच) नहर का पानी मिलेगा। हसनगढ़ प्रदेशभर में पहला ऐसा...

Danik Bhaskar | Apr 16, 2018, 03:30 AM IST
14 हजार आबादी वाले गांव हसनगढ़ को अब एनसीआर (नेशनल कैपिटल ब्रांच) नहर का पानी मिलेगा। हसनगढ़ प्रदेशभर में पहला ऐसा गांव होगा जिसे एनसीआर नहर का पानी मिल रहा है। इस नहर का निर्माण पीने के पानी की आपूर्ति के लिए किया गया था। हसनगढ़ गांव के जलघर से नहर तक 3 किलोमीटर लंबी पाइप लाइन बिछाने का कार्य लगभग पूरा हो चुका है। अप्रैल माह के अंत तक ग्रामीणों को नहरी पानी मिलना शुरू हो जाएगा। यहां 8 इंच मोटी लोहे की पाइप लाइन बिछाई गई है। लाइन के माध्यम से पानी जलघर तक पहुंचेगा। इस पर लगभग एक करोड़ 56 लाख रुपए का खर्च आया है। गांव में पहले सिसाना माइनर नंबर 14 से जलघर के पानी कनेक्शन को जोड़ा गया था। माइनर 14 का पानी हसनगढ़ तक नहीं पहुंच पा रहा था। जन स्वास्थ्य विभाग की ओर से बनाए दोनों वाटर टैंक खाली पड़े रहते थे। गांव में खारा व कड़वा पानी आता था। इससे ग्रामीण बीमार हो रहे थे। इसी समस्या को लेकर वह पंचायत के साथ मुख्यमंत्री से मिले थे। जन स्वास्थ्य विभाग की टीम ने नवंबर 2017 में पानी की समस्या को लेकर गांव में सर्वे करवाया था। इसके बाद पंचायत रेजुलेशन पास करने के बाद टेंडर निकाला गया। ग्राम प्रधान अनिल ने बताया कि इसी माह एनसीआर नहर से जलघर के लिए पानी मिलना शुरू हो जाएगा है। जिसके चलते ग्रामीणों को स्थाई तौर पर पानी की समस्या से निजात मिलेगी।

गुरुग्राम की मांग पर बनाई थी नहर

नहर का निर्माण एनसीआर के अन्तर्गत पड़ने वाले गुरुग्राम, मानेसर, बहादुरगढ़ तथा खरखौदा औद्योगिक शहरों की पानी की मांग को पूरा करने की दृष्टि से किया गया था। झज्जर व गुरुग्राम में इसकी जलापूर्ति के लिए इसका निर्माण किया गया था।

मुख्यमंत्री से की थी शिकायत : गांव में पानी की समस्या को लेकर सरपंच ने अधिकारियों से शिकायत की थी। गंदा पानी पीने से बच्चे बीमार हो रहे थे। इसको लेकर पंचायत के साथ सीएम से मिले थे। इस पर जनस्वास्थ्य विभाग ने गांव में पानी की समस्या को लेकर सर्वे करवाया था। उसके बाद ग्रामीणों और सरंपच की मांग पर अधिकारियों ने नहर का पानी देना का फैसला लिया था।

हुडा विभाग ने बंद की थी नहर

पानी छोड़ने की जोरदार अपील और अब पानी बंद करने की गुजारिश से हुडा विभाग की प्लानिंग पर सवाल खड़े होने शुरू हो गए थे। एनसीआर वॉटर चैनल में पानी छोड़ने को लेकर कई बार सिंचाई विभाग से गुहार लगाई गई थी। नहर में पानी छोड़ने के बाद जब उसे संभाला नहीं जा सका और वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट व आसपास के गांवों में पानी भरने का डर सताने लगा तो हुडा विभाग ने पानी बंद करने को कहा। एनसीआर वॉटर चैनल में पानी की सप्लाई बंद कर दी गई। वहीं तर्क दिया गया कि चंदू बुढेड़ा वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट की मशीनरी फेल हो गई है। हुडा की पाइपलाइन की क्षमता क्षमता 50 एमजीडी (मिलियन गेलन पर डे) से अधिक नहीं है।