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स्नातक पास युवा देसी केले की खेती कर कमा रहा है लाखों रुपए, अन्य किसान ले रहे हैं प्ररेणा

प्रवीन दत्तौड़ | सांपला (रोहतक) गांव अटायल निवासी युवा विकास मलिक ने स्नातक की परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद कृषि...

Danik Bhaskar | May 07, 2018, 03:35 AM IST
प्रवीन दत्तौड़ | सांपला (रोहतक)

गांव अटायल निवासी युवा विकास मलिक ने स्नातक की परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद कृषि विशेषज्ञों की सलाह ली। फरवरी 2016 सोनीपत जिले के गौरीपुर बाॅर्डर के पास स्थित गांव जाजल से 35 रुपए प्रति पौधा के हिसाब से 250 पौधे खरीद अपने खेत में लगाया। इन पौधों को 12 बाई 12 की दूरी पर एक एकड़ जमीन में रोपा गया। 8 माह बाद देसी केले की फसल तैयार हो गई। इसे बेचने के लिए मंडी में संपर्क किया गया। पहले 8 माह में ही सभी खर्च निकालने के बाद करीब 90 हजार रुपए का लाभ हुआ। इस लाभ को देख परिजनों ने एक एकड़ जमीन और विकास को दी। इस जमीन में भी देसी केले के पौधे रोपे गए। विकास के पास 1250 से ज्यादा केले के पेड़ हैं, जिनसे करीब 2.5 लाख रुपए सालाना की कमाई कर रहा है। दूर-दूर से किसान देसी केले की खेती देखने व जानकारी लेने गांव अटायल में विकास के पास आ रहे है।

जुलाई-अगस्त का माह पौधरोपण के लिए अच्छा

कृषि विशेषज्ञ डाॅ. राकेश कुमार का कहना है कि देसी केले की फसल में लगात बहुत कम आती है। देखभाल की भी अन्य फसलों की अपेक्षा कम जरूरत पड़ती है। एक बार रोपण के बाद 5 साल तक केले का पौधा चक्कर अनुसार उगता रहता है। केले का पौधा फरवरी-मार्च के अलावा जुलाई-अगस्त व सिंतबर तक रोपण किया जाता है। अप्रैल, मई में यह नहीं रोपा जाता। पौधा रोपण का सबसे अच्छा समय जुलाई-अगस्त माह होता है।