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मां-बाप की खुशी से बढ़कर दुनिया की कोई उपलब्धि नहीं

भारतीय संस्कृति इस बात की साक्षी रही है कि बेटा एक कुल का तो बेटियां दो कुलों के मान सम्मान की रक्षक होती है। आदि...

Danik Bhaskar | May 17, 2018, 03:45 AM IST
भारतीय संस्कृति इस बात की साक्षी रही है कि बेटा एक कुल का तो बेटियां दो कुलों के मान सम्मान की रक्षक होती है। आदि काल से परंपरा रही है कि नारी जाति ने कभी भी अपने दायित्व से मुहं नहीं मोड़ा। बेटियों के मान सम्मान की बात आए तो बस इतना ही पर्याप्त है कि उनको कभी शिक्षा से वंचित नहीं किया जाए। महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए यह जरूरी है कि महिलाओं की शिक्षा का प्रबंध समुचित हो। महिलाओं का सशक्तिकरण बिना शिक्षा के कभी संभव नहीं हो पाया है। यह बात आज खंड के गांव भैसरू कलां में महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय के इतिहास विषय में एम ए टॉपर कुसुम लता व यूपीएससी में 111वां स्थान प्राप्त करने वाली पूजा वशिष्ठ के सम्मान में भैसरू कलां में आयोजित एक कार्यक्रम में लोगों को संबोधित करते हुए कही। उन्होंने कहा कि हर अभिभावक को अपनी संतान के प्रति कभी दो भाव नहीं रखने चाहिए। अगर बेटी मेहनत करती है तो उसको भी बराबर का मौका देना चाहिए।

विश्वविद्यालय के इतिहास में एमए टॉपर कुसुमलता और यूपीएससी में 111वां स्थान प्राप्त करने पर पूजा सम्मानित

सांपला . कुसुमलता और पूजा को सम्मानित करते ग्रामीण।

हर नागरिक देश हित में कार्य करें

कार्यक्रम में गांव की ओर से कुसुम लत्ता और पूजा वशिष्ठ को पगड़ी व स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर दोनों बेटियों की उपलब्धि पर ग्रामीणों ने उनका नोट मालाओं से स्वागत किया। कुसुम ने कहा कि भारत का इतिहास हमेशा गौरवमयी रहा है, और इस देश के हर नागरिक का कर्तव्य है कि वो देश हित में कार्य करे और अपने मां बाप को खुश रखे क्योंकि मां बाप की खुशी से बढ़कर दुनिया की कोई उपलब्धि नहीं है। उन्होंनें कहा कि हर संतान का यह दायित्व है कि वो कोई भी कार्य करने से पहले ये अवश्य सोच ले कि इस कार्य से मेरे मां बाप का गौरव समाज में कहीं कम तो नहीं हो रहा है। इस अवसर पूर्व प्रधान लख्मीचंद, बालकिशन पहलवान,अशोक, चांदराम, गंगा देवी, सुशील कौशिक, मास्टर अमीर सिंह, फतेह सिंह, प्रदीप मान, हरिओम, प्रवीन कौशिक, अभिनंदन शर्मा, विकास कौशिक, कपिल पारासर, रोशन लाल आदि मुख्य रूप से उपस्थित थे।