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मशरूम की खेती कर किसान मालामाल कम जगह में ज्यादा आमदनी देती है फसल

प्रवीन दत्तौड़ | सांपला (रोहतक) मशरूम की खेती किसानों के लिए आय का बेजोड़ साधन साबित हो रही है। घरेलू महिला से...

Bhaskar News Network | Last Modified - May 24, 2018, 03:55 AM IST

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    प्रवीन दत्तौड़ | सांपला (रोहतक)

    मशरूम की खेती किसानों के लिए आय का बेजोड़ साधन साबित हो रही है। घरेलू महिला से लेकर छोटे बड़े किसान आसानी से इस खेती को कर सकते हैंै। कम जगह में ज्यादा लाभ देने वाली मशरूम की खेती दिन प्रति दिन लोकप्रिय होती जा रही है। कृषि ज्ञान केंद्र या बागवानी विभाग से कुछ समय की ट्रेनिंग लेकर इसको शुरू किया जा सकता है। मशरूम वेजीटेरियन लोगों की पहली पंसद बन चुकी है। इसलिए इसकी मांग दिन प्रति दिन बढ़ती जा रही है। सितंबर माह से ही मशरूम की बिजाई का सीजन शुरू हो जाता है। साल में 2 बार इसकी फसल ली जा सकती है। तुड़ी के कंपोस्ट में फंगस मिला कर खेती को तैयार किया जाता है। खेती के ऊपर सैड डाला जाता है ताकि धूप से मशरूम की बीजाई को बचाया जा सके।

    15 दिन बाद होता है अंकुरित

    मशरूम की खेती करने वाले गांव आसन निवासी किसान मनोज का कहना कि बीजाई के 15 दिनों बाद अंकुर आने शुरू हो जाते हैंै। अंकुर आने के बाद खेती में स्प्रे पंप से प्रति दिन पानी देना चाहिए। फरवरी में बीजाई करने वाले किसान को मई में फसल की कटाई करनी चाहिए । किसान इस फसल को रेक लगाकर जमीन से 8 फीट ऊपर तक खेती कर सकता है।

    घरेलू महिलाएं घर पर ही उगा सकती हैं मशरूम

    कृषि विशेषज्ञ पवन दलाल ने बताया कि भारतीय बागवानी अनुसंधान संस्थान ने घरेलू स्तर पर मशरूम उत्पादन करने के लिए योजना तैयार की है। इस योजना से महिलाओं को घर बैठे उपभोग के अलावा आय अर्जित करने का भी मौका मिलेगा। इस विधि से एक फीट वर्ग क्षेत्र में 5.5 फीट की ऊंचाई तक डेढ़ से 2 किलो मशरूम का उत्पादन हो सकेगा। देश की 50 प्रतिशत महिलाओं की आबादी कृषि से जुड़ी हुई गतिविधियों में 90 फीसदी योगदान देती है।

    दवा के तौर पर उपयोगी

    कृषि विशेषज्ञ डॉ. राकेश कुमार ने बताया कि मशरूम में प्रोटीन भरपूर मात्रा में होता है। यह शाकाहारी परिवारों के लिए बहुत फायदेमंद है। घर के प्रत्येक सदस्य को 100 ग्राम प्रतिदिन मशरूम का सेवन करने से ह्रदय रोग का खतरा कम हो जाता है। यह मधुमेह को नियंत्रित करता है। कैंसर रोगियों के कीमोथेरेपी के बाद होने वाले साइड इफेक्ट को कम करता है।

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