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परम्परागत नहीं, आधुनिक तरीके से करें प्याज का भंडारण, मिलेगा अच्छा मुनाफा

प्रवीन दत्तौड़ | सांपला (रोहतक) प्याज की खेती हर प्रकार की भूमि में आसानी से कि जा सकती है। ज्यादा पैदावार लेने के...

Bhaskar News Network | Last Modified - Jun 15, 2018, 03:55 AM IST

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    प्रवीन दत्तौड़ | सांपला (रोहतक)

    प्याज की खेती हर प्रकार की भूमि में आसानी से कि जा सकती है। ज्यादा पैदावार लेने के लिए हल्की दोमट या दोमट मृदा सर्वोत्तम मानी जाती है। इसकी खेती विभिन्न प्रकार की जलवायु में सफलतापूर्व की जा सकती है। ज्यादा पैदावार प्राप्त करने के लिये सही किस्म का चयन करना महत्वपूर्ण है। प्याज की अनेकों उन्नतशील किस्मों का विकास किया गया है।

    स्थानीय एंव परम्परागत किस्मों की अपेक्षा इनकी पैदावार 15 से 20 प्रतिशत अधिक होती है। साथ ही इन किस्मों में रोग व कीटो का प्रकोप भी अपेक्षाकृत कम होता है। प्याज की उन्नत किस्मों में प्रमुख रूप से एग्री फाउंड डार्क रेड, एग्री फाउंड व्हाइट, एग्री फाउंड लाइट रेड, हिसार 2, पंजाब चयन, निफाड 53, अर्का कल्याण, अर्का प्रगति, पंजाब 48, उदयपूर 102, उदयपूर 103, नासिक 53, लाल पत्ती व पूसा व्हाइट वांउड सहित अनेक है। प्याज की बुवाई मैदानी क्षेत्र में जनवरी से लेकर फरवरी माह के बीच की जाती है। मार्च माह में फसल को रोगो से बचाने के लिये थ्रीपश का स्प्रे किया जाता है। प्याज के ऊपरी भाग (आल) पर धब्बा दिखाई दे तो रिडोमिल गोल्ड का भी स्प्रे किया जाता है। एक मई से जुलाई के प्रथम सप्ताह तक इसको जमीन से निकाल लिया जाता है। निकालने के बाद इसको कुछ समय तक छंाव में रखा जाता है। एक एकड़ में 150 से 200 क्विंटल तक प्याज का उत्पादन प्राप्त हो जाता है।

    इस विधि से करें प्याज का भंडारण

    किसान शीलकराम ने बताया कि प्याज को सीधा मंडी में तत्काल बेचने से ज्यादा लाभ नहीं मिलता। पहले वह टांटियों या प्लास्टिक के कट्टों में भरकर प्याज का स्टोक करता था। लेकिन बरसात व आंधी तूफान से प्याज खराब ज्यादा होता। इससे बचने के लिये उसने 500 टमाटर रखने वाली करेट खरीदी। पहले वह इन करेटो को नवंबर दिसंबर में टमाटर रखने के लिये प्रयोग करता है। इसके बाद जुलाई, अगस्त, सिंतबर, अक्टूबर में प्याज रखने के लिए प्रयोग करता है। 17 बाई 15 के एक रूम में इन करेटों को रखा जाता है। एक करेट में करीब 26 किलो प्याजा आता है। करेट से करेट की दूरी हवा आने जाने के लिये 30 सेंटीमीटर छोड़ी जाती है। कोई प्याज खराब होने लगता है तो उसे तत्काल निकाल बाहर फेंक दिया जाता है। ताकि दूसरे प्याज खराब ना हो सके। परम्परागत विधि के स्टोक में एक बार प्याज खराब होना शुरू होता है, तो ज्यादा नुकसान उठाना पड़ता था। नवंबर-दिसबंर में प्याज का भाव ज्यादा होता है। उस वक्त बेच दिया जाता है।

    प्याज के औषधीय गुण

    कटा हुआ प्याज वातावरण में मौजूद बैक्टीरिया सोख लेता है।

    गर्म राख में भुनकर निचोडऩे से कान व दांत का दर्द में राहत मिलती है।

    बारूद से जलने के बाद प्याज लगाने से शरीर को आराम मिलता है।

    पेट के कीड़े प्याज का रस पिलाने से नष्ट हो जाते है।

    नाक से खूऩ बह रहा हो तो कच्चा प्याज काट कर सूंघने से फायदा होता है।

    मधुमेह की बिमारी को कंट्रोल करता है।

    कच्चा प्याज हाइ ब्लड प्रेशर को नार्मल व कोलेस्ट्राॅल को कंट्रोल करता है।

    गिरते हुए बालों की जगह लगाने से बाल झडना बंद हो जाते है।

    प्याज के रस को चीनी में मिलाकर पीने से पथरी की समस्या कम हो जाती है।

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Web Title: परम्परागत नहीं, आधुनिक तरीके से करें प्याज का भंडारण, मिलेगा अच्छा मुनाफा
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