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कारनेशन फूल की खेती से किसान हो रहे हैं गुलजार

प्रवीन दत्तौड़ | सांपला (रोहतक ) कारनेशन फूल की खेती से किसानों के घर गुलजार हो रहे हैं। किसान पॉली हाउस में आसानी...

Bhaskar News Network | Last Modified - Jun 01, 2018, 04:15 AM IST

कारनेशन फूल की खेती से किसान हो रहे हैं गुलजार
प्रवीन दत्तौड़ | सांपला (रोहतक )

कारनेशन फूल की खेती से किसानों के घर गुलजार हो रहे हैं। किसान पॉली हाउस में आसानी से खेती कर लाखों रुपए सालाना कमा रहे हैं। कारनेशन प्रजाति का एक फूल डायानथूस कार्योफीललुस की 5 पंखुड़ियां होती हैं। यह डबल फूल का काम करता है। सफेद रंग से गुलाबी से बैंगनी रंग में बदल जाता है। बॉर्डर कारनेशन क्युलटिवर्स में 40 पुंखड़ियां तक हो जाती हैं। ये फूल रेड, पींक, यलो, व्हाइट, परपल और स्त्रिपेड के प्रतीक के रूप में विशेष तौर पर जाना जाता है। एक पौधा 10 रुपए का बेंगलुरू से खरीद यातायात सहित दिल्ली एनसीआर तक पहुंचता है। एक साल में लागत का करीब 6 गुणा लाभ किसान हो जाता है। इसको 90 सेंटीमीटर की चौड़ाई व 20 सेंटीमीटर की ऊंचाई के बेड पर रोपित किया जाता है। बेड टू बेड के बीच करीब 40 सेंटीमीटर का फासला आवागमन व कार्य करने के लिए छोड़ा जाता है। बेड के ऊपर पहली रो लोहे की तार से बनी नेट की लगाई जाती है, ताकि पौधे का ठीक से विकास हो। इसके बाद प्लास्टिक के तार से बनी नेट लगाई जाती जो पौधे की ऊंचाई अनुसार होती है। गाय का गोबर, वर्मी कंपोस्ट व जमीन का ट्रीटमेंट करने के बाद कारनेशन के पौधों को रोपित किया जाता है। इसके रोपण का सही समय अगस्त व सिंतबर माह होता है।

वामिका बाहेती

20 स्टिक के 200 रुपये

हमायुपुर निवासी शीलक राम धनखड़ ने बताया कि कारनेशन फूल की बहुत ज्यादा मांग है। इसको गाजीपुर मंडी में बेचा जाता है। 20 स्टिक का एक बंच बनाकर उसको 200 रुपए में आसानी से बेच दिया जाता है।

दिल को मिलता है सकून

दिल्ली के जनकपूरी निवासी वामिका बाहेती ने साल 2014 में सीए की पढ़ाई पूरी करने के बाद कारनेशन फूल की खेती को अपनाया। गांव टांडाहेड़ी में 3 एकड़ पर पोली हाऊस बना कारनेशन की खेती शुरू की। फूलों की खेती करने से दिल को सकून मिलता है।

पौधों के लिए धूप जरूरी है

बागवानी विशेषज्ञ डा.राकेश कुमार का कहना कि कारनेशन के पौधे की उचित देखभाल बहुत जरूरी है। प्रतिदिन कुछ घंटो की धूप के अलावा उनको नम रखना भी जरूरी है। अधिक पानी देने से पौधा खराब होने का डर बना रहता है। खराब या मुरझाए फूलों को पौधे से हटा देना चाहिए ।

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