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जिस एक हजार गज जमीन पर वक्फ बोर्ड कर रहा था दावा उसे कोर्ट ने स्कूल की माना

शहर के बीचोंबीच लगभग एक हजार गज जमीन मामले में अम्बाला कमिश्नर कोर्ट ने फैसला स्कूल के हक में दिया है। इस जमीन को...

Bhaskar News Network | Last Modified - Feb 01, 2018, 01:25 PM IST

शहर के बीचोंबीच लगभग एक हजार गज जमीन मामले में अम्बाला कमिश्नर कोर्ट ने फैसला स्कूल के हक में दिया है। इस जमीन को लेकर पिछले कई सालों से विवाद चल रहा था। नगरपालिका ने कभी इसे स्कूल को दिया था। हालांकि इस पर कब्जा स्कूल का रहा, लेकिन बाद में जगह के खाली हिस्से पर वक्फ बोर्ड ने अपना दावा जताते हुए शहर वासी एक व्यक्ति को लीज पर दे दिया।

उक्त व्यक्ति के निधन के बाद उसके बच्चों ने जमीन वापस सरेंडर कर दी थी। बाद में नप, शिक्षा व वक्फ बोर्ड के बीच मालिकाना हक को लेकर मामला कोर्ट में चला गया। खास बात यह है कि एसडीएम ने इस मामले में फैसला वक्फ बोर्ड के हक में दे दिया था। जिसे पार्षद नीलम साहनी व शिक्षा विभाग की तरफ से हाईकोर्ट में चुनौती दी। हाईकोर्ट ने मामला अम्बाला कमिश्नर की अदालत में भेजने के निर्देश दिए थे।

दो साल पहले वक्फ बोर्ड के हक में फैसला : पार्षद साहनी ने बताया कि 20 दिसम्बर 2016 को एसडीएम शाहाबाद ने इस जमीन को हरियाणा वक्फ बोर्ड की मलकीयत बताया था। जिसके बाद भूमाफिया ने उक्त जमीन पर कब्जा करके प्लाट काटने शुरू कर दिए थे। जबकि यह शहर के बीच होने से काफी कीमती जमीन है। इसे नपा ने स्कूल को दिया था। इसकी शिकायत सीएम विंडो और कष्ट निवारण समिति में की थी।

एडीसी की कमेटी ने की जांच : शिकायत पर हरियाणा के खाद्य आपूर्ति एवं वन राज्यमंत्री कर्णदेव काम्बोज ने एडीसी धर्मबीर सिंह, कष्ट निवारण समिति के सदस्य रविंद्र सांगवान, सहदेव मल्हान व अशोक वत्स को मामले की जांच कर रिपोर्ट सौंपने को कहा था। एडीसी धर्मबीर ने कष्ट निवारण समिति की 3 मई 2017 को हुई बैठक में अपनी रिपोर्ट दी थी। बताया कि जिस जमीन पर नाजायज कब्जा दिखाया गया वह जमीन आज भी मौके पर खाली है । राजकीय कन्या उच्च विद्यालय व जन स्वास्थ्य विभाग के ट्यूबवेल लगे हैं। लगभग एक हजार वर्ग जमीन मौके पर खाली पड़ी है जिसे हरियाणा वक्फ बोर्ड कुरुक्षेत्र अपनी मलकीयत बता रहा है। जबकि खसरा नम्बर 116 में शहर का काफी भाग सम्मिलित है जिसकी सही निशानदेही संभव नहीं है। रिपोर्ट में बताया कि कंवरपाल सिंह, महिंद्र सिंह व सुखविंद्र पाल सिंह इस मामले में पार्टी रह चुके हैं।

सरेंडर के बाद दोबारा लीज पर : एडीसी ने रिपोर्ट दी थी कि वक्फ बोर्ड ने जिसे लीज पर दी थी, उसके परिजन उक्त जमीन को सरेंडर कर चुके हैं। फिर वक्फ बोर्ड ने बिना विज्ञापन दिए, इसे कुछ अन्य लोगों को लीज पर दे दिया। जबकि कोर्ट से इसे लेकर फैसला भी नहीं आया।

बीईओ व सचिव पर गिरी चुकी गाज : बता दें कि इस मामले में ढंग से पैरवी न करने पर कर्णदेव कंबोज ने कष्ट निवारण समिति की मीटिंग में खंड शिक्षा अधिकारी और वक्फ बोर्ड के पटवारी को सस्पेंड करने व नपा के तत्कालीन सचिव पर भी कार्रवाई के आदेश दिए थे। तब बाकायदा पूछा था कि नोट बंदी के दौरान जमीन लीज पर लेने के लिए संबंधित लोग कहां से 12 लाख रुपए नकद लेकर आए। उन दिनों बैंक भी पुराने नोट के बदले में चार पांच हजार रुपए ही दे रहे थे। इस मामले की जांच इंकम टैक्स को भी सौंपी थी।

पहले भी दो बार स्कूल के हक में हो चुका है फैसला

पार्षद साहनी ने बताया कि इस मामले में हारने के बाद वक्फ बोर्ड ने खुद ऊपरी अदालत में चुनौती दी। अब इस मामले में अम्बाला कमिश्नर ने स्कूल के हक में फैसला दिया है। पहले भी दो बार फैसला स्कूल के हक में हो चुका है। 30 जनवरी को अम्बाला के कमिश्नर ने वक्फ बोर्ड की अपील को खारिज करते हुए फैसला स्कूल के हक में दिया। जगदीश पाहवा, पिंकी साहनी, हरभजन सिंह सेठी, रोशनलाल मोंगा, सुरेश कुमार पीपलानी, सतीश लाल मोंगा, सतपाल पाहवा, सतपाल बुद्धिराजा ने कहा कि फैसले की कॉपी मिलने के बाद जल्दी ही वार्डवासियों के सहयोग से स्कूल की चारदीवारी की जाएगी। ताकि भविष्य में इस जमीन पर कोई कब्जा करने की सोच भी न सके।

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