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33 घंटे बाद लोहे की चादर के नीचे मिला ट्रॉला चालक का शव

शनिवार देर रात दिल्ली से मनाली जा रही वॉल्वो बस की एक ट्रॉले से हुई टक्कर में मारे गए ट्रॉला चालक का शव 33 घंटे बाद...

Bhaskar News Network | Last Modified - Jul 10, 2018, 03:40 AM IST

शनिवार देर रात दिल्ली से मनाली जा रही वॉल्वो बस की एक ट्रॉले से हुई टक्कर में मारे गए ट्रॉला चालक का शव 33 घंटे बाद सोमवार सुबह साढ़े 10 बजे लोहे की चादरों के नीचे मिला। ट्रॉले के सहचालक की मौके पर ही मौत हो गई थी, लेकिन उस समय इस शव को चालक का समझा जा रहा था।

रविवार शाम को जब चालक नरेश कुमार के परिजन आगरा से पहुंचे तो शव की पहचान सहचालक लक्ष्मण निवासी एटा के रूप में की। वहीं चालक का शव ट्रॉले में लदी लोहे की चादरों के नीचे फंस गया था और उस स्थान पर पानी होने के कारण चादरों को हटाने में दिक्कत हुई। सोमवार सुबह दोबारा चादरों को हटाने का काम शुरू हुआ। जहां चादरों के नीचे से ट्राले के चालक नरेश कुमार का शव मिला। बता दें कि गांव धंतौड़ी के पास सब्जी से लदे एक कैंटर ने दिल्ली से मनाली जा रही एक वॉल्वो बस को टक्कर मार दी। दोनों चालकों के बीच कहासुनी हुई और उनका समझौता कराने के लिए दो अन्य ट्रकों के चालक भी खड़े हो गए। इसी दौरन दिल्ली से लुधियाना जा रहे एक ट्रॉले ने कैंटर को टक्कर मार दी। दुर्घटना में ट्रॉला के सहचालक की मौके पर ही मौत हो गई थी और चालक का पता नहीं चल पाया था।

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