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जुगाड़ के सहारे चल रही कोचिंग क्लास की फीडबैक लेने पहुंची सर्वेक्षण टीम, यूजीसी को भेजी जाएगी रिपोर्ट

Bhaskar News Network | Last Modified - Feb 02, 2018, 02:20 AM IST

चौधरी देवीलाल यूनिवर्सिटी में फंड के अभाव में जुगाड़ के सहारे चल रही यूजीसी कोचिंग क्लास स्कीम का फीडबैक सर्वे के...
चौधरी देवीलाल यूनिवर्सिटी में फंड के अभाव में जुगाड़ के सहारे चल रही यूजीसी कोचिंग क्लास स्कीम का फीडबैक सर्वे के लिए न्यूपा की उच्चस्तरीय टीम गुरुवार को सीडीएलयू पहुंच गई। दो प्रोफेसरों पर आधारित इस टीम ने सीडीएलयू के वीसी, रजिस्ट्रार और स्कीम कॉर्डिनेटर से भी मुलाकात की। अब इसकी रिपोर्ट प्लानिंग कमीशन और यूजीसी को भेजी जाएगी। इस आधार पर तय होगा कि भविष्य में देशभर में यह योजना संचालित की जाए या नहीं। टीम सदस्य यह भी पता करेंगे कि यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (यूजीसी) की ओर से चलाई जा रही यूजीसी कोचिंग क्लास स्कीम का सीडीएलयू के विद्यार्थियों को लाभ मिला या नहीं।

सरकार ने फैसला किया कि यूजीसी कोचिंग स्कीम का सर्वे कराया जाए ताकि पता चल सके कि यह योजना विद्यार्थियों के लिए लाभकारी है या नहीं। इसका फीडबैक सर्वे करने की जिम्मेदारी न्यूपा (नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ एजुकेशन प्लानिंग एंड एडमिनिस्ट्रेशन) को सौंपी गई है। गुरुवार को न्यूपा के डॉ. मलीश और डॉ. निधि सभ्रवाल पर आधारित टीम चौधरी देवीलाल यूनिवर्सिटी पहुंची। यहां टीम सदस्यों का स्कीम कॉर्डिनेटर प्रो. उमेद सिंह के नेतृत्व में शोध छात्रा रेखा रानी, प्रदीप कुमार, मीनू, राधे भुक्कल ने स्वागत किया। इस दौरान पहले टीम सदस्यों ने स्कीम कॉर्डिनेटर प्रो. उमेद सिंह से फीडबैक लिया और इसके बाद वीसी प्रो. विजय कायत और रजिस्ट्रार प्रो. असीम मिगलानी से भी मुलाकात की। इस दौरान हालांकि फंड के अभाव की समस्या को टीम सदस्यों के संज्ञान में लाया गया।

उच्चस्तरीय टीम के सदस्यों ने स्कीम कॉर्डिनेटर, वीसी और रजिस्ट्रार से की मुलाकात

सीडीएलयू में रजिस्ट्रार से बात करते न्यूपा टीम के सदस्य।

प्लान खत्म होने से फंड का अभाव झेल रही स्कीम

12वीं पंचवर्षीय योजना में यूजीसी कोचिंग स्कीम के लिए फंड जारी हुआ था जिसकी अवधि पिछले वर्ष समाप्त हो चुकी है। इसके बाद 13वें योजना के तहत फंड नहीं मिला। इस कारण सीडीएलयू में स्कीम की स्थिति डांवाडोल हो गई। यूजीसी नेट के लिए लगाई जाने वाली कक्षाएं फंड के अभाव में बंद पड़ी है। हालांकि पिछले वर्ष के शेष बचे फंड से रेमेडियल कोचिंग क्लास और एंट्री इन टू सर्विसिस की कक्षाएं चल रही हैं। सभी कक्षाएं समुचित संचालित करने के लिए प्रतिवर्ष 6 लाख रुपये का फंड चाहिए जिसका अभी तक भी अभाव है।

क्या है यूजीसी कोचिंग स्कीम

यूजीसी की ओर से प्रदेश की सभी यूनिवर्सिटी में कोचिंग स्कीम चलाई जा रही है। इस योजना के तीन भाग हैं। अनुसूचित जाति, पिछड़ा वर्ग और गरीब वर्ग के विद्यार्थियों के लिए नि:शुल्क कोचिंग की व्यवस्था की गई है। इसके तहत नेट की तैयारी कराई जाती है। विद्यार्थियों को सरकारी सेवाओं के टेस्ट की तैयारियां भी करानी होती है।

वीसी प्रो. विजय कायत ने टीम सदस्यों को आश्वासन दिया कि यूजीसी से फंड मिला तो ठीक, अन्यथा यूनिवर्सिटी अपने लेवल पर यह कक्षाएं आयोजित करती रहेगी। - प्रो. उमेद सिंह, कॉर्डिनेटर, यूजीसी कोचिंग सेल, सीडीएलयू।

फंड नहीं मिला तो भी देंगे कोचिंग

3 दिन तक चलेगा फीडबैक का काम

यह टीम तीन दिन दिन चौधरी देवीलाल यूनिवर्सिटी में फीडबैक सर्वे का काम करेगी। इस दौरान प्राध्यापकों, विद्यार्थियों और अधिकारियों से बातचीत की जाएगी और रिकाॅर्ड भी खंगाला जाएगा।

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Web Title: जुगाड़ के सहारे चल रही कोचिंग क्लास की फीडबैक लेने पहुंची सर्वेक्षण टीम, यूजीसी को भेजी जाएगी रिपोर्ट
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