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टाउन पार्क में मांगों के समर्थन में किसान संसद लगाई

अखिल भारतीय किसान सभा व हरियाणा किसान सभा जिला कमेटी के आह्वान पर टाउन पार्क में बुधवार के किसानों की मांगों के...

Dainik Bhaskar

Feb 01, 2018, 02:55 AM IST
अखिल भारतीय किसान सभा व हरियाणा किसान सभा जिला कमेटी के आह्वान पर टाउन पार्क में बुधवार के किसानों की मांगों के समर्थन में एक किसान संसद का आयोजन किया। इस किसान संसद की अध्यक्षता सुरजीत सिंह व हरदेव सिंह, विकल पचार व जगरूप सिंह ने संयुक्त रूप से की। किसान संसद का उद्घाटन किसान नेता स्वर्ण सिंह विर्क ने किया और कहा कि किसानों व मजदूरों को कर्ज मुक्त करने, कर्ज की राशि केंद्र सरकार स्वयं वहन करे, राज्य व जिला स्तर पर कर्जा निपटारा बोर्ड का गठन करने, फसलों के लाभकारी मूल्य देने, फसलों की सरकारी खरीद सुनिश्चित करने, डाॅ. स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट लागू करने, सहकारी क्षेत्र को मजबूत करने व कृषि में प्रयोग होने वाली वस्तुओं को जीएसटी ( सेवा माल कर) के दायरे से बहार करने की मांग को लेकर किसान संसद का आयोजन किया है। वहीं प्रधानमंत्री के नाम किसानों की जायज मांगों से संबंधित ज्ञापन भी कार्यकारी तहसीलदार संजय बिश्नोई को सौंपा।

किसान संसद में गुलजारी लाल ढाका, सतनाम सिंह, राजकुमार शेखुपुरिया, लक्ष्मण सिंह शेखावत, राजकुमार शेखुपुरिया, ओपी सुथार, मास्टर गुरटेक सिंह, गुरदिताराम व जंटा सिंह किसान प्रतिनिधी उपस्थित रहे। किसान संसद में स्वर्ण सिंह ने कहा कि देश व प्रदेश की 70 प्रतिशत से ज्यादा जनसंख्या का जीवन और रोजी- रोटी कृषि क्षेत्र पर निर्भर है, सरकार की पूंजीपतिप्रस्त नीतियों की बजह से यह क्षेत्र तेज गति से बर्बादी के कगार की ओर जा रहा है। वहीं किसान सभा के प्रधान सुरजीत सिंह ने कहा कि सरकार की किसान विरोधी नीतियों की बजह से आमदनी के घटने और लागत बढऩे से किसान और मजदूर कर्ज के फंदे में फंसे हैं, स्कूल- कॉलेजों की बढ़ती फीसें, बीमारी के इलाज का भारी खर्च और रोजमर्रा की चीजों की कमरतोड़ महंगाई ने आम आदमी की जिंदगी को संकटग्रस्त बना दिया है। किसान नेताओं ने कहा कि सरकारी आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 1990 के बाद देश में तीन लाख से ज्यादा किसान आत्महत्या कर चुके हैं।

किसान नेता राजकुमार शेखुपुरिया ने आरोप लगाया कि कृषि का वर्तमान संकट कोई प्राकृतिक कारणों से पैदा नहीं हुआ बल्कि शासक वर्गों की ओर से 1990 के बाद समय समय पर थोपी गई उदारीकरण व निजीकरण की नीतियों से पैदा हुआ है। इस किसान संसद में प्रस्ताव पारित करके यह मांग की गई कि सभी किसानों व मजदूरों को कर्ज मुक्त किया जाए, फसलों के लाभकारी भाव दिए जाएं, फसलों की सरकारी खरीद सुनिश्चित की जाए, डाॅ. स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट लागू की जाए, कृषि में प्रयोग होने वाली वस्तुओं को जीएसटी से बहार की जाए। इस किसान संसद में उपरोक्त मांगों पर आधारित मांग पत्र प्रधान मंत्री के नाम भेजा है। वहीं किसानों ने चेतावनी भी दी है कि अगर उनकी मांगों पर सरकार ने ध्यान नहीं दिया, तो वह आगामी आंदोलन की रणनीति बनाएंगे।

किसानों ने जायज मांगों का प्रस्ताव पारित कर प्रधानमंत्री मोदी के नाम तहसीलदार को सौंपा ज्ञापन

किसान संसद के पदाधिकारी व किसान नेता कामरेड र्स्वण सिंह तहसीलदार को ज्ञापन सौपते हुए।

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