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स्कूलों में नहीं सेफ्टी क्लब, प्रबंधन कमेटियां बनाकर खानापूर्ति

स्कूलों में अनुशासनहीनता और उदंडता के चलते आपराधिक वारदातें बढ़ रही हैं। अब ज्यादातर स्कूलों में न तो पढ़ने वाले...

Bhaskar News Network | Last Modified - Feb 01, 2018, 01:30 PM IST

स्कूलों में अनुशासनहीनता और उदंडता के चलते आपराधिक वारदातें बढ़ रही हैं। अब ज्यादातर स्कूलों में न तो पढ़ने वाले बच्चे और न ही स्टाफ सदस्य सेफ हैं। इसके लिए कुछ हद तक स्कूल प्रशासन भी जिम्मेदार है। सरकार के आदेशों के महीनों बाद भी स्कूलों में सेफ्टी के लिए सरकार की ओर से निर्धारित मानकों को लागू नहीं किया जा सका है। जबकि उन मानकों को लागू करने की अंतिम तारीख भी बुधवार को खत्म हो गई है।

भास्कर टीम ने विभिन्न स्कूलों में सेफ्टी के इंतजामों का जायजा लिया तो स्कूलों में सेफ्टी का सच उजागर हुआ। जिले में सरकारी स्कूलों की कुल संख्या 844 है और उनमें से सिर्फ 45 स्कूलों में सीसीटीवी कैमरे लगे हैं जबकि 240 प्राइवेट स्कूलों में से 55 स्कूलों में ही लगे हैं सीसीटीवी कैमरे लगे हैं। हैरत की बात तो यह है कि इनमें से 20 फीसदी सीसीटीवी कैमरे चालू अवस्था में नहीं हैं। उनको ठीक कराने की जहमत भी नहीं की गई है। सरकारी स्कूलों में आने वाले बच्चे अपने रिस्क पर ही सरकारी या प्राइवेट बस अथवा अन्य वाहन के जरिए ही आते हैं। जबकि प्राइवेट स्कूलों में स्कूल बस या ऑटो के जरिए आते हैं। स्कूली बसें तो सुरक्षा के मानकों पर कायम हैं क्योंकि इनकी समय-समय पर जांच होती रहती है। लेकिन कई ऑटो में स्कूली बच्चों को अभी भी भेड़-बकरियों की तरह ही ठूंसे जाते हैं। हालांकि जब कोई अनहोनी या दुर्घटना हो जाए तो कुछ दिन यातायात पुलिस स्कूली बच्चों को ढोने वाले ऑटो संचालकों की खिंचाई करते नजर आते हैं लेकिन बाद में फिर वही ढाक के तीन पात नजर आने लगते हैं।

स्कूल प्रबंधन कमेटी पर ही सेफ्टी क्लब की जिम्मेदारी

सभी सरकारी स्कूलों में स्कूल प्रबंधन कमेटी तो बनी हुई है लेकिन कमेटियों ने अलग से सेफ्टी क्लब का गठन नहीं किया है। जिला शिक्षा अधिकारी यज्ञ दत्त वर्मा का कहना है कि स्कूलों में बनी स्कूल प्रबंधन कमेटी ही सेफ्टी क्लब की जिम्मेदारी वहन करती है और सभी गाइड लाइन का पालन करती है।

प्रधान बोले- स्कूलों में कमजोर है सुरक्षा व्यवस्था

पेरेंट्स टीचर्स एसोसिएशन के प्रधान महावीर शर्मा का कहना है कि स्कूलों में सेफ्टी व्यवस्था काफी कमजोर है। कुछेक स्कूलों तो सेफ्टी व्यवस्था सही है लेकिन ज्यादातर स्कूलों में सेफ्टी व्यवस्था लचर है। उसी लचर व्यवस्था की वजह से ही स्कूलों में कहीं बच्चे के साथ तो कहीं टीचर के साथ अनहोनी घटना होती रहती है।

अनुशासन में रहने को प्रेरित किया

स्कूली बच्चों को नैतिकता और अनुशासन का पाठ भी समय-समय पर पढ़ाया जाता है ताकि वे अनुशासन में रहें और किसी भी तरह की उदंडता न करें। इसके लिए बीते दिनों जिला बाल संरक्षण अधिकारी डॉ. गुरप्रीत कौर और मनोविशेषज्ञ प्रो. रविंद्र पुरी के जरिए स्कूली बच्चों को पोक्साे एक्ट और ब्लू व्हेल गेम के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई थी। सरकारी स्कूलाें में गठित एसएमसी ही सेफ्टी क्लब के तौर पर काम करती हैं। -यज्ञ दत्त वर्मा, जिला शिक्षा अधिकारी, सिरसा।

ये हंै कमेटियों की जिम्मेदारी

हर स्कूल के अंदर आईएसआई अग्निशमन यंत्रों का होना सुनिश्चित किया जाए और ये ऐसी जगह रखें जाएं कि इनका तुरंत इस्तेमाल किया जा सके।

हादसे की स्थिति में प्राथमिक उपचार के लिए किट का प्रबंध होना जरूरी है। निर्धारित सूची के अनुसार इसमें सामान हो।

इमरजेंसी टेलीफोन नंबर जरूरी है। इसके अलावा शिक्षण संस्थानों के ऊपर से हाइटेंशन बिजली की तारें न हों।

विद्यार्थियों व स्टाफ सदस्यों को आत्मरक्षा के गुर सिखाने के लिए ट्रेनिंग कैंप लगाएं जाने चाहिए। इसमें छठी कक्षा से 12वीं कक्षा तक के विद्यार्थियों के लिए फायर फाइटिंग ट्रेनिंग जरूरी है।

शिक्षण संस्थान की इमारत को लेकर भी कई कड़े नियम हैं। इनमें छोटे बच्चों का स्कूल एक मंजिला होना चाहिए। इमारत ज्वलनशील और रसायनों के प्रभाव से दूर होनी चाहिए।

कक्षाओं व शौचालयों के रास्ते में सीसीटीवी कैमरे लगे होने चाहिए।

आटोरिक्शा में सवार स्कूली छात्र। फाइल फोटो।

जिले में सरकारी और निजी स्कूलों की संख्या

सरकारी स्कूलों की कुल संख्या



844

राजकीय मिडिल स्कूल



122

राजकीय हाई स्कूल



83

राजकीय प्राइमरी स्कूल



540

राजकीय सी. सेकंडरी स्कूल



99

प्राइवेट स्कूलों की संख्या



240

संविधान के अनुसार स्कूलों में सुरक्षित माहौल जरूरी

भारतीय संविधान के अनुसार स्कूलों में सभी को पढ़ने का अधिकार दिया गया है। प्रदेश सरकार को यह भी सुनिश्चित करना भी जरूरी है कि शिक्षण संस्थानों में बच्चों को पूर्ण सुरक्षित माहौल मिले। प्रदेश सरकार ने हरियाणा स्कूल एजुकेशन रूल 2007 के मुताबिक किसी भी स्कूल को नई मान्यता देने के लिए कुछ नियम तय किए हैं। इन नियमों को पूरा करने के बाद ही शिक्षा विभाग स्थायी मान्यता देगा।

जिला स्तरीय कमेटी में उपायुक्त हैं मुखिया

जिले के स्कूलों में सुरक्षा का माहौल बनाए रखने के लिए उपायुक्त की चेयरमैन शिप में कमेटी का गठन जरूरी है। इसमें जिला शिक्षा अधिकारी सचिव, जिला मौलिक अधिकारी अतिरिक्त सदस्य सचिव होंगे। इसके अलावा फायर स्टेशन ऑफिसर, सिविल सर्जन, एसई या उनका प्रतिनिधि, म्युनिसिपल कौंसिल से एग्जिक्यूटिव आफिसर, डिस्ट्रिक्ट टाउन प्लेननर और निजी स्कूलों से दो प्रतिनिधि कमेटी में होने जरूरी हैं। इसके अलावा डीसी अपने स्तर पर भी अन्य सदस्य की नियुक्त कर सकता है।

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