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ई-वे बिल आज से लागू, अब ट्रेजरी में होगा पेपरलेस काम

ई-वे बिल बुधवार मध्य रात्रि 12 बजे से लागू हो गया है। इस बिल के लागू होने से अब कोई बहाना नहीं चलेगा। सरकारी विभागों...

Dainik Bhaskar

Feb 01, 2018, 01:30 PM IST
ई-वे बिल बुधवार मध्य रात्रि 12 बजे से लागू हो गया है। इस बिल के लागू होने से अब कोई बहाना नहीं चलेगा। सरकारी विभागों के क्लर्कों को अब चालान बिल पास कराने के लिए ट्रेजरी आफिस के बार-बार चक्कर लगाने की जरूरत नहीं होगी। उधर, व्यापारियों और ट्रांसपोर्टरों को ऑनलाइन ही ई-वे बिल के बारे में जानकारी मुहैया करानी होगी। उप आबकारी एवं कराधान आयुक्त रविंद्र सिंह की ओर से साफ तौर से सभी ट्रांसपोर्टरों और व्यापारियों को ई-वे बिल लागू करने के निर्देश दिए जा चुके हैं। इतना ही इस बारे में बीते दिनों विभिन्न जगहों पर सेमिनार आयोजित कर ट्रांसपोर्टरों और व्यापारियों को जागरूक भी किया गया था लेकिन ज्यादातर व्यापारी अभी भी इस सिस्टम से अनभिज्ञ ही हैं जिसकी वजह से उनकी मुश्किलें और बढ़ेंगी।

बता दें, ई-वे बिल लागू होने से अब संबंधित विभाग के प्रमुख आफिस में बैठे ही डिजिटल हस्ताक्षर करने के बाद इन बिलों को ऑनलाइन ट्रेजरी कार्यालय में भेजेंगे। यहां से ट्रेजरार इसे वेरिफाई कर डिजिटल हस्ताक्षर करेगा और बैंक को ऑनलाइन ही भेज देगा। इस काम में कोई रुकावट न आए और अधिकारी कोई बहाना न बना सकें इसके लिए जिले के करीब 500 डीडी पॉवर वाले विभाग प्रमुखों को डोंगल भी दिए जाने की व्यवस्था की जा रही है। इसके साथ ही वित्त विभाग के एडीशनल चीफ सेक्रेटरी ने सभी संबंधित को पत्र जारी कर एक फरवरी से इस योजना को अनिवार्य रूप से अमल में लाने का सभी को आदेश दिया है। वैसे तो इस योजना को ट्रायल के तौर पर दो नवंबर व एक दिसंबर से दो चरणों में प्रारंभिक तौर पर शुरू किया गया था। इसमें यह देखा गया कि क्या परेशानियां आ रहीं हैं। इनका अब पूरी तरह से समाधान किए जाने का दावा किया जा रहा है। इसी के तहत अधिकारियों को डोंगल दिए जा रहे हैं ताकि वे इंटरनेट कनेक्टिविटी का बहाना न बना सकें। साथ ही आफिस से बाहर मीटिंग आदि में होने पर वहां से भी काम कर सकें और कोई बिल वेवजह न अटका रह सके।

सरकारी विभागों के क्लर्कों को अब चालान बिल पास कराने के लिए ट्रेजरी आॅफिस के बार-बार चक्कर लगाने की जरूरत नहीं रह जाएगी

योजना पर्यावरण के लिए लाभकारी

अभी जिला कोषागार (ट्रेजरी) में हर माह औसतन दो हजार बिल (चालान) विभिन्न विभागों से पहुंचते हैं। एक बिल में कम से कम तीन पन्ने लगते हैं। इस तरह से सिर्फ ट्रेजरी के काम में ही साढ़े सात हजार पेज जो खराब होते थे वे बचेंगे। इसके साथ ही सारा रिकार्ड कंप्यूटर में सुरक्षित रहने से अलग से आफिस रिकार्ड कॉपी के लिए प्रिंट लेने की भी जरूरत नहीं होगी। जब जरूरत हो पुराना रिकार्ड बगैर किसी परेशानी के कहीं पर भी बैठकर अधिकारी देख सकेगा।

नई व्यवस्था से यह होगा लाभ

नई व्यवस्था से पारदर्शिता बढ़ेगी। इसके साथ ऑनलाइन बिल जनरेट होने के बाद यदि भुगतान में देरी होती है तो आसानी से पता चल जाएगा कि आखिर रुकावट कहां पर है। अधिकारी की जिम्मेदारी भी तय हो सकेगी। इसके साथ ही समय और धन की भी बचत होगी। कर्मचारियों को बिल का स्टेटस जांचने के लिए ट्रेजरी आफिस नहीं आना होगा। इसलिए विभाग का इन पर खर्च होने वाला टीए-डीए भी बचेगा।

ई-वे बिल सिस्टम से पेपरलेस काम होगा


सरकार कठाेर कदम न उठाए


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