सिरसा

  • Home
  • Haryana News
  • Sirsa
  • किसानों के खाते में रुपये सीधे डालने के आदेश वापस, हड़ताल भी स्थगित
--Advertisement--

किसानों के खाते में रुपये सीधे डालने के आदेश वापस, हड़ताल भी स्थगित

आढ़तियों विरोध के चलते सरकार ने किसान के खाते में सीधा भुगतान करने के आदेश को वापस ले लिया है। इसलिए सिरसा जिला में...

Danik Bhaskar

May 01, 2018, 03:40 AM IST
आढ़तियों विरोध के चलते सरकार ने किसान के खाते में सीधा भुगतान करने के आदेश को वापस ले लिया है। इसलिए सिरसा जिला में आढ़तियों ने मंगलवार से हड़ताल पर जाने के अपने फैसले को टाल दिया है। मंडी प्रधान सुरेंद्र मिंचनाबादी ने बताया कि सरकार की तरफ डीएफएसई के पास सोमवार शाम को पत्र आ गया था कि सरकार ने अपने नए आदेश वापस लेते हुए प्रदेशभर में पुरानी व्यवस्था के तहत ही गेहूं खरीद करने का आदेश जारी कर दिया है। इसलिए अब आढ़ती भी हड़ताल नहीं करेंगे।

यहां बता दें कि सोमवार को आढ़ती एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने मीटिंग करके मंगलवार से हड़ताल पर जाने का निर्णय लेना था, मगर जैसे ही मीटिंग शुरू हुई। उसी समय डीएफएसई की ओर से उन्हें मैसेज मिला कि सरकार ने उनकी मांगें मान ली है। प्रधान सुरेंद्र मिंचनाबादी ने बताया कि प्रदेश के 12 जिलों में सरकार ने 27 अप्रैल के बाद से खरीदी गई गेहूं की पेमेंट सीधे किसानों के खातों में करने का फैसला लिया था। जो आढ़तियों के लिए सही नहीं था। हालांकि इस फैसले में सिरसा जिला को नहीं शामिल किया गया था, मगर फिर भी इस फैसले के खिलाफ वे बाकी जिलों के आढ़तियों के साथ मिलकर लड़ाई लड़ रहे थे। इसलिए जिले के सभी आढ़ती बाकी जिलों की तरह हड़ताल पर जाने के लिए रणनीति बना रहे थे।

यह था पूरा मामला

सरकार ने 27 अप्रैल के बाद खरीदी गई गेहूं की पेमेंट सीधे किसानों के खातों में करने का फैसला लिया था लेकिन आढ़तियों ने इसका विरोध कर दिया। 12 जिलों के आढ़ती तत्काल प्रभाव से हड़ताल पर चले गए। आढ़तियों ने बताया कि गत वर्ष सितंबर में सीएम के साथ इस मुद्दे पर मीटिंग हुई थी। उस समय सीएम मनोहर लाल ने प्रदेश भर के आढ़तियों को आश्वासन दिया था कि इस साल फसल खरीद पुरानी प्रक्रिया से ही होगी। लेकिन सरकार ने बिना प्लानिंग के यह फैसला दोबारा लिया। जो आढ़तियों के लिए सही नहीं था।

यहां लागू किया था आदेश

अंबाला, भिवानी, हिसार, करनाल, कैथल, कुरुक्षेत्र, पानीपत, सोनीपत, फरीदाबाद, पलवल, जींद और यमुनानगर

सिरसा। जनता भवन में आढ़तियों की बैठक को संबोधित करते प्रधान सुरेंद्र मिंचनाबादी।

इसलिए था विरोध

जिला प्रधान सुरेंद्र मिंचनाबादी ने बताया कि सरकार के इस फैसले से सभी आढ़तियों को नुकसान होना तय था। आढ़ती व किसानों के संबंध भी आपस में खराब होते। किसान सालभर आढ़तियों से पैसा लेकर काम चलाते हैं। ऐसे में आढ़तियों का पैसा भी वापस नहीं आता। इसके अलावा किसान भी पुराने नियमों के तहत अपनी फसल नही बेच पाते। किसान को भी सरकार के नए नियम के तहत अपनी फसल को मंडी में बेचने के लिए फर्द, आधार कार्ड व बैंक अकाउंट डिटेल भी देनी पड़ती। जो किसान के लिए बड़ी परेशानी थी।

Click to listen..