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प्राइवेट अस्पतालों के 17 मामलों में पीएमओ ने लेटर जारी कर मांगा जवाब

प्राइवेट अस्पतालों में इलाज के दौरान हुई मेडिकल नेग्लिजेंसी और हॉस्पिटल के खिलाफ पिछले दो महीने में आई शिकायतों...

Dainik Bhaskar

Feb 07, 2018, 02:05 AM IST
प्राइवेट अस्पतालों में इलाज के दौरान हुई मेडिकल नेग्लिजेंसी और हॉस्पिटल के खिलाफ पिछले दो महीने में आई शिकायतों में अपना पक्ष रखने के लिए जांच कमेटी पीड़ित और आरोपी दोनों पक्षों को लेटर लिखकर सूचित कर रही है। अस्पतालों को ई-मेल के माध्यम से भी जानकारी दी जा रही है। कमेटी के अधिकारियों द्वारा पीड़ितों से फोन कर उनकी सहूलियत के हिसाब से सुनवाई का दिन तय कर रही है। स्वास्थ्य विभाग के पास इस प्रकार के नए पुराने कुल 17 मामलों की जांच के लिए शिकायत आई हैं, जिसमें से कुछ शिकायतों की अंतिम सुनवाई होनी है। बाकी कुछ नए मामलों में पीड़ित को अपने बयान दर्ज करवाने के लिए कहा गया है। जांच कमेटी से जुड़े एक अधिकारी ने बताया कि कई बार प्राइवेट अस्पताल लेटर मिलने के बाद भी समय पर नहीं आते हैं। उलटे कमेटी को शिकायत करते हैं कि उन्हें इस बारे में सूचना नहीं दी जाती है, इसलिए जांच लंबी खींचती है।

पीएमओ को जांच कमेटी का प्रभारी बनाया

पीएमओ डाॅ. प्रदीप शर्मा को जांच कमेटी का प्रभारी बनाया गया है। उनके अनुसार हॉस्पिटल को लेटर के अलावा उन्हें मेल भेजकर और मेल का प्रिंट आउट भी फाइल में जोड़ा रहा है ताकि आरोपी अस्पताल प्रबंधन कोई आना-कानी न कर सकें। ये हैं मुख्य शिकायतें इन मामलों में शीतला माता मंदिर रोड स्थित शिवा अस्पताल में वार्डन द्वारा किशोरी मरीज के साथ छेड़छाड़ का मामला, पारस अस्पताल में 7 महीने आईसीयू में दाखिल एक मरीज के परिजन ने अस्पताल प्रबंधन पर इलाज में कोताही और ओवर चार्जिंग की शिकायत, पारस के ही एक अन्य मरीज द्वारा हार्निया का गलत ऑपरेशन करने की शिकायत, मेदांता में डेंगू के इलाज के लिए करीब 15 लाख 88 हजार रुपए के बिल की शिकायत, फोर्टिस हॉस्पिटल में डेंगू के इलाज के लिए करीब 16 लाख रुपए के बिल का मामला, सोहना रोड स्थित संवित अस्पताल में डॉक्टरों की लापरवाही के चलते मौत का मामला और पार्क अस्पताल में 11 साल के बच्चे की गलत इंजेक्शन से हुई मौत का मामला, मेदांता हॉस्पिटल में एक डॉक्टर के इलाज में कोताही और नेग्लिजेंसी, पालम विहार के एक हॉस्पिटल में इलाज के दौरान बैड से गिरकर मौत आदि की शिकायतें स्वास्थ्य विभाग को दी गई हुई हैं। इन सभी मामलों में कमेटी ने अपना फैसला सुनाना है।

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