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3 घंटे थमी दिल्ली-जयपुर एक्सप्रेस-वे की रफ्तार

एससी-एसटी एक्ट पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ किए गए प्रदर्शन को लेकर गुड़गांव पुलिस की तैयारी नहीं दिखी। शहर...

Bhaskar News Network | Last Modified - Apr 03, 2018, 02:05 AM IST

3 घंटे थमी दिल्ली-जयपुर एक्सप्रेस-वे की रफ्तार
एससी-एसटी एक्ट पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ किए गए प्रदर्शन को लेकर गुड़गांव पुलिस की तैयारी नहीं दिखी। शहर के सभी चौक चौराहों पर 100 से अधिक पीसीआर तैनात की गई थीं, इसके बावजूद प्रदर्शनकारी एक्सप्रेस-वे तक पहुंच गए और करीब 3 घंटे तक एक्सप्रेस-वे की रफ्तार को रोक दिया। इस दौरान कुछ जगहों पर पुलिस के साथ प्रदर्शनकारी हाथापाई तक करते रहे, लेकिन हर जगह प्रदर्शनकारियों के सामने पुलिस कमजोर नजर आई। जबकि सरकार के गुप्तचर विभाग ने पहले ही पुलिस को भारत बंद पर होने वाले प्रदर्शन व हंगामे को लेकर अलर्ट कर दिया था। सुबह 9 बजे दलित संगठनों के लोग गाड़ियों से कमला नेहरू पार्क पहुंचे और उसके बाद रणनीति के तहत अलग-अलग टुकड़ियों में बंटकर अलग-अलग सड़कों पर प्रदर्शन करने लगे। गुड़गांव में सबसे पहले आरडी सिटी रोड पर पहुंचे और वहां का ट्रैफिक 9.15 बजे शुरू कर दिया। यहां पुलिस ने ट्रैफिक जाम खुलवाने का प्रयास किया, लेकिन महिलाएं आगे आकर सड़कों पर बैठ गईं, जिससे पुलिस बल असहाय दिखा। हालांकि पुलिस ने कई बार आरडी सिटी चौक पर लगे ट्रैफिक जाम को खुलवाने का प्रयास किया, लेकिन हर बार फेल रही।

एक्सप्रेस-वे पर ट्रैफिक जाम में फंसी रही एंबुलेंस

एक्सप्रेस-वे पर ट्रैफिक जाम में फंसी रही एंबुलेंस

एससी/एसटी वर्ग द्वारा अपनी मांगों को लेकर किए गए विरोध के कारण गुड़गांव का नेशनल हाईवे और एक्सप्रेस वे दोनों ही बुरी तरह प्रभावित रहे। इसमें एक्सप्रेस-वे पर एंबुलेंस भी फंसी रही। राजीव चौक पर एंबुलेंस करीब दो घंटे तक फंसी रही। मानेसर की तरफ से आने वाली इस एंबुलेंस को जाम में से निकलवाने के लिए दूर-दूर तक कोई पुलिसकर्मी नहीं दिखा।

एससी/एसटी वर्ग द्वारा अपनी मांगों को लेकर किए गए विरोध के कारण गुड़गांव का नेशनल हाईवे और एक्सप्रेस वे दोनों ही बुरी तरह प्रभावित रहे। इसमें एक्सप्रेस-वे पर एंबुलेंस भी फंसी रही। राजीव चौक पर एंबुलेंस करीब दो घंटे तक फंसी रही। मानेसर की तरफ से आने वाली इस एंबुलेंस को जाम में से निकलवाने के लिए दूर-दूर तक कोई पुलिसकर्मी नहीं दिखा।

नूंह | जिले में तहसील स्तर के बाद जिला मुख्यालय नूंह में अनुसूचित जाति व जनजाति के लोगों ने बड़ी तादाद में पहुंच कर सुरक्षा कवच के रूप में एससी एसटी एक्ट को पूर्व की तरह रखने की मांग की। इस एक्ट को यथावत बनाए रखने के लिए देश के राष्ट्रपति व प्रधानमंत्री के नाम जिला प्रशासनिक अधिकारियों के माध्यम से ज्ञापन सौंपा गया। इधर तावडू में पटौदी रोड पर स्थित अंबेडकर भवन में दलित समुदाय के लोगों ने एकत्र होकर सुप्रीम कोर्ट के फैसले का विरोध किया। इस दौरान नगर में भारी मात्रा में पुलिस बल मौजूद रहा। पिनगवां में रैली निकालकर जताया रोष : पिनगवां में समाज के लोगों ने हरिजन चौपाल पर धरना प्रदर्शन करने के बाद नगर में रैली निकालकर रोष जताया। रैली में लोगों ने सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की गई। रैली कस्बे के रास्तों से नगीना पुन्हाना मार्ग से होते हुए ब्लॉक कार्यालय पहुंची। प्रदर्शनकारियों ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले को दलितों के अधिकारों का हनन बताया।

फिरोजपुर झिरका में तहसीलदार को ज्ञापन सौंपा : नगीना कस्बा में कल सोमवार को भारी तादाद में दलित समाज के लोगो ने एससी एसटी कानून में बदलाव के लिए प्रदर्शन करते हुए नायब तहसीलदार नगीना को अपना ज्ञापन सौंपा। कार्यक्रम के संयोजक रिटायर्ड कमाडेंट रघुबीर सिंह राघव ने बताया कि हरिजन एक्ट में बदलाव हमें बर्दाश्त नहीं है जो सर्वोच्च न्यायालय ने हरिजन एक्ट में कुछ संशोधन किया है इससे ये एक्ट खत्म होने के कगार पर पहुंच जाएगा और ये सरासर हमारे अधिकारों का हनन है।

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एक्सप्रेस वे पर हंगामा करते दलित संगठनों के लोगों को समझाते पुलिसकर्मी

गुड़गांव. राजीव चौक व झाड़सा फ्लाईओवर के बीच सड़क के बीचो-बीच सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ प्रदर्शन करते लोग।

गुड़गांव. राजीव चौक व झाड़सा फ्लाईओवर के बीच सड़क के बीचो-बीच सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ प्रदर्शन करते लोग।

प्रदर्शनकारियों को खदेड़ते पुलिसकर्मी

प्रदर्शनकारियों ने नीतिबद्ध तरीके से शहर के विभिन्न इलाकों में प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारी ने कमला नेहरू पार्क, डीसी आवास, सोहना चौक होते हुए राजीव चौक व झाड़सा चौक के बीच करीब तीन घंटे तक प्रदर्शन किया। एक्सप्रेस-वे पर दिल्ली सिरहोल बॉर्डर से लेकर खेड़कीदौला टोल प्लाजा तक वाहनों की लंबी लाइनें लगी रहीं। वहीं हाईवे पर पुलिस बहुत कम संख्या में दिखा और ट्रैफिक जाम को खुलवाने में असमर्थ रही।

पारस चौक पर पथराव की कोशिश

प्रदर्शनकारियों ने पारस चौक पर प्रदर्शन के दौरान पथराव करने की भी कोशिश की। प्रदर्शन के दौरान कई युवक अपने हाथों में पत्थर लिए हुए थे। अगर युवकों के द्वारा पथराव कर दिया जाता तो प्रदर्शन हिंसक हो सकता था। पारस चौक की रेड लाइट पर हंगामे के दौरान पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को रोकने की कोशिश की और युवकों को पथराव करने से रोका।

जिला स्वास्थ्य विभाग रहा अलर्ट

सोमवार को एसी-एसटी समुदाय द्वारा भारत बंद के दौरान हिंसा की आशंका को देखते हुए जिला प्रशासन के अलावा स्वास्थ्य महकमा भी मुस्तैद रहा। कार्यकारी पीएमओ डॉ. ब्रह्मदीप ने बताया कि अस्पताल को हाई अलर्ट पर रखा था। इसके मद्देनजर इमरजेंसी वॉर्ड व एंबुलेंस को तैयार रहने के निर्देश दिए गए थे। अधिकारियों के मुताबिक इमरजेंसी में काम करने वाले चिकित्सक व स्टाफ की बैठक की गई थी। इस दौरान उन्हें आपात स्थिति को देखते हुए तैयार रहने के आदेश दिए गए थे। हालांकि इस दौरान कहीं से भी किसी तरह की हिंसा संबंधी कॉल एंबुलेंस कंट्रोल रूम में नहीं आई।

रोडवेज की बसों को डिपो में बुलाया

भारत बंद को लेकर किए गए प्रदर्शन को देखते हुए परिवहन विभाग के अधिकारियों ने रोडवेज के गुड़गांव डिपो से चंडीगढ़ के लिए गई सभी बसों को वापस बुला लिया। बताया जा रहा है कि चंडीगढ़ जाने वाली बसों को रोडवेज अफसरों ने जीरकपुर से ही लौटा लिया था।

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