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अरावली के मोरों में फैली न्यू कैसल डिसीज, 50 से ज्यादा की मौत, बतख और मुर्गियों पर खतरा बढ़ा

भास्कर न्यूज | गुड़गांव/सोहना अरावली क्षेत्र में बीते तीन सप्ताह से राष्ट्रीय पक्षी मोर खतरे में हैं। रानीखेत...

Bhaskar News Network | Last Modified - Jun 02, 2018, 02:10 AM IST

अरावली के मोरों में फैली न्यू कैसल डिसीज, 50 से ज्यादा की मौत, बतख और मुर्गियों पर खतरा बढ़ा
भास्कर न्यूज | गुड़गांव/सोहना

अरावली क्षेत्र में बीते तीन सप्ताह से राष्ट्रीय पक्षी मोर खतरे में हैं। रानीखेत बीमारी के कारण अब तक 50 से अधिक मोरों की मौत हो चुकी है, जबकि 72 से अधिक मोर बीमारी की चपेट में हैं। संक्रामक बीमारी रानीखेत अन्य पक्षियों के लिए खतरनाक हो सकती है। इधर, मामले को लेकर वाइल्ड लाइफ डिपार्टमेंट और पशु पालन विभाग के विशेषज्ञ सुस्त नजर आ रहे हैं। करीब 20 दिन बाद रेस्क्यू सेंटर बनाया गया, जिसमें बीमार मोरों को वैक्सीन दी जा रही है।

पिछले 16 दिन से नेचर केयर के आसपास लगातार मोरों की हो रही मौत की वजह का जीव जंतु विभाग ने खुलासा किया। न्यू कैसल डिसीज यानी रानीखेत वायरल डिसीज की बीमारी इलाके में चल रही है। इस कारण लगातार मोर बेहोश हो रहे हैं और उनकी मौत हो रही है। इसका सबसे बड़ा कारण क्षेत्र में बने पोल्ट्री फॉर्म को बताए जा रहे हैं। विभाग के विशेषज्ञों ने यह भी कहा है कि इस वायरस से आदमी के स्वास्थ्य कोई फर्क नहीं पड़ता। वहीं इसके लिए विभाग ने पशुपालन विभाग को भी सतर्क रहने को कहा है। अब मोरों को लसोटा वैक्सीन दी जा रही है।

16 दिन में 72 मोर बेहोशी की हालत में मिले

नेचर केयर के पास लगातार 16 दिनों में गांव अकलीमपुर, बीएसएफ कैंप, भोंडसी व टिकली में 72 मोर बेहोशी की हालत में मिले। इसके बाद जीव-जंतु विभाग हरकत में आया और नेचर केयर के पास ही रेस्क्यू सेंटर बनाया, जिसमें सभी मोरों का इलाज किया जा रहा है। अब तक इनमें 21 मोरों की मौत हो चुकी है। विभागीय अधिकारी के मुताबिक पहले हीट स्ट्रोक के कारण मोरों की मौत बताई जा रही थी, लेकिन बरेली से आई रिपोर्ट के अनुसार मोरों की मौत न्यू कैसल डिसीज यानी रानीखेत के कारण हो रही है। अब उसी को लेकर विभाग लसोटा वैक्सीन मोरों को दे रहा है। वहीं बताया जा रहा है कि यह बीमारी क्षेत्र में बने मुर्गी फॉर्म के कारण फैली है व लार से एक दूसरे में चली जाती है।

मोर बेहोश मिले तो रेस्क्यू सेंटर पर लाएं : कौशिक

वाइल्ड ऑफिसर श्याम सुंदर कौशिक ने बताया कि क्षेत्र में जगह-जगह विभाग प्रचार कर रहा है कि किसी भी मोर को बेहोशी की हालत में देखें तो तुरंत रेस्क्यू सेंटर में लाएं, वहीं उन्हें लसोटा टीका लगाया जा रहा है, ताकि उन्हें इस वायरस से मुक्ति मिल सके।

सोहना. न्यू कैसल डिसीज से पीड़ित मोरों का रेस्क्यू सेंटर में हो रहा इलाज।

जांच में एक मोर का सैंपल पॉजीटिव आया है

कुल 72 मोर बीमार हैं, जिनके लिए भारत यात्रा के नजदीक रेस्क्यू सेंटर बनाया हुआ है। जिसमें वाइल्ड लाइफ व पशु पालन विभाग के कुल 6 डॉक्टर बारी-बारी से सेवाएं दे रहे हैं। एक मोर का सैंपल रानीखेत पॉजीटिव पाया गया है, उस मोर की मौत हो चुकी है। ये सैंपल वाइल्ड लाइफ डिपार्टमेंट की ओर से भेजे गए थे। बीमार मोरों को वैक्सीन दी जा रही है। अधिकतर मोरों में हीट स्ट्रॉक के लक्षण हैं, जिनके लिए कूलर लगाए गए हैं। रानीखेत का आदमी कोई असर नहीं पड़ता, लेकिन इनफेक्टेड अंडे व मुर्गियों से बचाव करना चाहिए। - डॉ. पुनीता गहलावत, उपनिदेशक, पशु पालन विभाग।

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