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गुड़गांव डिपो को तीन साल में मिलीं 17 नई बसें, 81 कंडम, 400 से ज्यादा की जरूरत

हरियाणा रोडवेज के गुड़गांव डिपो में तीन साल में बसों की संख्या लगातार कम हो रही है। वर्ष 2015 के बाद डिपो को मात्र 17...

Bhaskar News Network | Last Modified - May 11, 2018, 02:15 AM IST

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    हरियाणा रोडवेज के गुड़गांव डिपो में तीन साल में बसों की संख्या लगातार कम हो रही है। वर्ष 2015 के बाद डिपो को मात्र 17 बसें नई मिल पाई हैं, जबकि 81 बसें कंडम हो चुकी हैं। गुड़गांव की आबादी फिलहाल करीब 20 लाख है, जिसके लिए 400 से अधिक बसों की जरूरत है। लेकिन बस चालक और टेक्निकल स्टाफ की कमी के कारण अक्सर बसें गुड़गांव डिपो व कार्यशाला में खड़ी रहती हैं। ऐसे में गुड़गांव के लोग निजी वाहनों पर निर्भर रहते हैं। शहर के किसी भी चौक-चौराहों पर ऑटो की भीड़ दिखाई देती है।

    हरियाणा रोडवेज के गुड़गांव डिपो में पिछले 10 साल में बसों की संख्या जस की तस है। एक तरफ जहां पिछले 10 साल में गुड़गांव की आबादी 13 लाख से बढ़कर 20 लाख हो चुकी है, वहीं बसों की संख्या आज भी 209 है। इनमें से 69 बसें खराब खड़ी हैं। जबकि 140 बसें ही रूटों पर निकलती हैं। पिछले दो साल से गुड़गांव डिपो में बसों के ड्राइवर की संख्या काफी कम थी, लेकिन अब अकेले गुड़गांव में 166 ड्राइवर्स की अपॉइंटमेंट प्रक्रिया चल रही है। लेकिन नई बसें मिलने की कोई उम्मीद नहीं है। गुड़गांव डिपो को साल 2016 में एक भी नई बस नहीं मिली, साल 2017 व 2018 में 10 बसें नई मिल पाई हैं। जबकि पिछले तीन साल में 81 बसें कंडम होकर बेड़े से बाहर हो चुकी हैं।

    गुड़गांव डिपो में पिछले 10 साल में बसों की संख्या जस की तस

    गुड़गांव. बहरामपुर स्थित हरियाणा रोडवेज इंजीनियरिंग कॉर्पोपेशन में खड़ी कंडम बसें।

    8 साल बाद कंडम हो जाती हैं बसें

    परिवहन विभाग की शर्तों के अनुसार कोई भी बस आठ साल चलने या 7 लाख किलोमीटर पूरे करने पर कंडम घोषित हो जाती है। इसके बाद बस को बेड़े से बाहर कर बेच दिया जाता है। 8 साल पूरे होने के बाद बसों को रूटों पर नहीं चलाया जा सकता।

    50 नई बसें इंजीनियरिंग कॉर्पोरेशन में बनकर तैयार

    हरियाणा रोडवेज की बसों की बॉडी तैयार करने वाली हरियाणा रोडवेज इंजीनियरिंग कॉर्पोरेशन में फिलहाल 50 नई बसें तैयार हैं। लेकिन अभी तक गुड़गांव डिपो की ओर से बसों की मांग नहीं की गई है। ऐसे में नई बसें भी निगम में खड़ी-खड़ी खराब होने के कगार पर पहुंच गई हैं।

    पिछले तीन साल में कम हुईं 64 बसें

    गुड़गांव डिपो से साल 2018 में 25 बसें कंडम हुईं, जो साल 2009 से रूटों पर चल रही थी, जबकि नई बसें मात्र 5 मिलीं। इसी तरह साल 2017 में गुड़गांव डिपो की 25 बसें कंडम हुईं, लेकिन 5 बसें नई मिलीं। साल 2016 में एक भी नई बस नहीं मिली और 28 बसें कंडम हुईं। साल 2015 में गुड़गांव डिपो की 13 बसें कंडम हुईं, जबकि 7 बस नई मिलीं। ऐसे में पिछले तीन साल में 64 बसें कम हो गई।

    क्या कहते हैं यात्री

    गुड़गांव बस स्टैंड से रोजाना पटौदी जाने वाले सुरेश का कहना है कि बसों की कम संख्या होने के कारण अक्सर बस नहीं मिलती है। काफी देर इंतजार के बाद ही पटौदी के लिए बस मिल पाती है। फर्रुखनगर निवासी दीपक ने बताया कि वे रोज कॉलेज आते हैं, लेकिन बस पास होने के बाद भी निजी बसों से आना-जाना पड़ता है। रोडवेज की बसें कभी-कभार ही मिल पाती हैं। इसी तरह सोहना निवासी दीपक मंगला ने बताया कि सोहना के लिए कोई भी बस रोडवेज की नहीं है। मजबूरन उन्हें प्राइवेट बसों से सफर करना पड़ता है।

    टेक्निकल स्टाफ की भी भर्ती प्रक्रिया चल रही है

    गुड़गांव डिपो में ड्राइवर्स की कमी के कारण बसों की संख्या में अब तक इजाफा नहीं हो पाया है। अब नए ड्राइवर्स की भर्ती की जा रही है, उम्मीद है कि अब नई बसें बेड़े में शामिल की जाएंगी। टेक्निकल स्टाफ की कमी के कारण खराब बसें ठीक नहीं हो पाती, जिससे परेशानी होती है। ऐसे में 69 बसें खराब हैं। टेक्नीकल स्टाफ की भी भर्ती प्रक्रिया चल रही है, जिससे समस्या दूर हो जाएगी। - संजीव तिहाल, वर्क्स मैनेजर, गुड़गांव डिपो, रोडवेज।

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