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‘विश्व का सबसे सच्चा मित्र वही है जो अच्छे लोगों को आपस में जोड़े, भगवान श्रीराम एेसे पहले पुरुष थे’

3 वर्ष पहले
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जब संसार में दुराचार, दुर्विचार का प्रसार होने लगता है। अहिंसा, सत्य, धैर्य, न्याय आदि मानवोचित सद्‌गुणों का अपमान होने लगता है, दंभ का ही साम्राज्य तथा वेद-शास्त्रोक्त धर्म का विलोप होने लगता है। दैत्य-दानवों या दैत्यप्राय कुपुरुषों से धरा व्याकुल हो जाती है, सत्पुरुष और देवगण अनीति से उद्विग्न हो उठते हैं। उस समय सर्वपालक भगवान अवतरित होकर किसी न किसी रूप में प्रकट होकर श्रुति-सेतु का पालन करते हैं। अपने मनोहर, मंगलमय, परम पवित्र चरित्रों का विस्तार करके प्राणियों के लिए मोक्ष का मार्ग प्रशस्त करते हैं। इन्हीं सब भावों को लेकर मधुमास के शुक्लपक्ष की नवमी को मर्यादा-पुरुषोत्तम भगवान श्रीरामचन्द्र का जन्म हुआ।

अग्रसेन भवन में आयोजित श्रीराम कथा में कथा व्यास जगद्‌गुरु रामानुजाचार्य स्वामी र|ेश जी महाराज ने कहा कि विश्व का सच्चा मित्र वह है जो अच्छे लोगों को आपस में जोड़े। उन्होंने कहा कि श्रीराम की पहली यात्रा सभी अच्छे लोगों को आपस में जोड़ने की थी। इसका अभिप्राय है कि जब तक बुद्धि, जड़ से चेतन नहीं होगी तब तक हम ज्ञान मार्ग में आगे बढ़ने में समर्थ नहीं होंगे। भगवान के द्वारा अहिल्या-उद्धार का अभिप्राय है कि विषयासक्ति के कारण जो बुद्धि जड़ हो चुकी थी, उसको श्रीराघवेन्द्र ने चेतन किया। मौके पर जगमेंदर गहलावत, सतीश गौतम, आरके कुच्छल, अरविंद मितल, अनिल गुप्ता, ईश्वरी देवी, बीना गर्ग, सुनीता सहित काफी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।

सोनीपत. अग्रसेन भवन में आयोजित श्रीराम कथा सुनते हुए श्रद्धालु।

महायज्ञ में आहुति डालने और महा आरती में हिस्सा लेने के लिए लोगों में उत्साह
सोनीपत . श्री रुद्रचंडी महायज्ञ के दौरान आरती करते हुए पुजारी।

सोनीपत| मॉडल टाउन स्थित यज्ञ सेवा संघ, श्री नवदुर्गा शक्ति सिद्धपीठ मंदिर की ओर से आयोजित श्रीरुद्रचंडी महायज्ञ में आहुति डालने के लिए दूर-दूर से श्रद्धालु यज्ञ स्थल पर पहुंच रहे हैं।

श्रद्धालुओं के उत्साह को देखते हुए समिति के सदस्यों ने भी व्यापक प्रबंध कर रखे हैं। बुधवार को श्रीरुद्रचंडी महायज्ञ के छठे दिन श्रद्धालुओं में भारी उत्साह दिखा। एक ओर जहां सैकड़ों महिलाएं यज्ञ मंडप की परिक्रमा करतीं दिखीं, वहीं यज्ञ में आहुति डालने के लिए बड़ी संख्या में लोग उपस्थित हुए। श्रीरुद्रचंडी महायज्ञ में सुबह नौ से बारह बजे तक आयोजित श्री दुर्गा सप्तशती के श्लोकों से चंडी हवन यज्ञ में महिला पुरुष सभी भाग लेते हैं। दो से पांच बजे तक आयोजित रुद्र हवन यज्ञ वैदिक ब्राह्मणों द्वारा ही संपन्न कराया जाता है। पंडित हनुमान प्रसाद पाठक ने बताया कि 23 नवंबर को जल यात्रा से आरंभ हुए श्रीरुद्रचंडी महायज्ञ के पहले तीन दिन विशेष कार्यक्रम आयोजित किए गए।

अब पूर्णाहूति तक विभिन्न प्रांतों से आए वैदिक पंडितों द्वारा सुबह से शाम तक हवन यज्ञ कराया जा रहा है। हवन के उपरांत शाम में प्रतिदिन साढ़े पांच से छह बजे तक यज्ञ भगवान की आरती होती है, इसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु भाग लेते हैं।

मानव जीवन परमात्मा के साक्षात्कार के लिए है: मुक्तानंद
सोनीपत| श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन गुरुवार को कथा व्यास साध्वी मुक्तानंद सरस्वती ने श्रद्धालुओं को अपने मधुर स्वर में कई रोचक प्रसंग सुनाए। कपिलमुनि के प्राकट्य, दक्ष प्रजापति, भक्त ध्रुव के प्रसंगों को उन्होंने विस्तार से सुनाया। सोमवार से आठ मारला पार्क में श्रीमद‌्भागवत कथा का आयोजन किया जा रहा है।

साध्वी मुक्तानंद सरस्वती ने कहा कि मानव जीवन दुर्लभ है। यह जीवन परमात्मा के साक्षात्कार के लिए ही मिला है, इसे व्यर्थ में गंवाने पर बाद में पछताना पड़ता है। हमारे कर्म ही दु:खों के कारण हैं। इसलिए दु:खों के निवारण के लिए परमात्मा की आराधना के साथ सत्कर्म जरूरी हैं। एक तरफ श्रद्धालुओं ने जहां कथा व्यास के मुखार¨वद से विभिन्न प्रसंगों का आनंद उठाया वहीं उनके भजनों ने श्रोताओं को भाव विभोर कर दिया। कथा का आनंद लेने के साथ श्रद्धालुओं ने अच्छे कर्म करने का संकल्प भी लिया। कथा में मंदिर समिति की कार्यकारिणी के सदस्य सेनापति, भारत भूषण, रमेश मुखी, किशोर गांधी, बलजीत सिंह, अशोक बत्रा आदि आदि मौजूद रहे।

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