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क लिंग राज्य में मंगरू नाम का किसान रहता था।

क लिंग राज्य में मंगरू नाम का किसान रहता था। शरीर से दुबला-पतला। प्राण और ऋण- इन दो चीजों ने ही उसका साथ कभी नहीं छोड़ा...

Bhaskar News Network | Last Modified - Feb 02, 2018, 02:15 AM IST

क लिंग राज्य में मंगरू नाम का किसान रहता था। शरीर से दुबला-पतला। प्राण और ऋण- इन दो चीजों ने ही उसका साथ कभी नहीं छोड़ा था। बाकी प|ी-बच्चे सब छोड़कर जा चुके थे। सिर से पैर तक कर्ज में डूबा मंगरू एक दिन मंत्री केशवनाथ के पास पहुंचा और सवाल किया कि मेरी स्थिति कब सुधरेगी? आपके खजाने से खूब ऋण भी मिलता है, लेकिन न मैं किसी को जानता हूं, न कोई मुझे सही सलाह दे पाता है। जवाब देने के बजाय मंत्री केशवनाथ ने उसे एक दर्पण दे दिया और कहा कि ये कमियां बताता है। मंगरू दर्पण लेकर अपने मित्रों और घरवालों तक सबके पास गया लेकिन उसे उनकी कमियां ही दिखीं। उसे लगने लगा कि इस दर्पण के कारण वो और परेशान रहने लगा है। ऐसे में वो इसे वापस करने केशवनाथ के पास पहुंचा। और स्थिति बताई। केशवनाथ ने कहा कि मैंने तुम्हे दर्पण इसलिए नहीं दिया था कि तुम दूसरों की कमियां देखों। बल्कि तुम अपनी कमियां पहचानों।

मंत्री की इस चतुराई को देख किसान ने एक विद्वान ब्राह्मण से सवाल किया मंत्रीजी दर्पण से क्या कहना चाह रहे थे।

जवाब मिला- वे कह रहे थे कि हम तुम्हें ऋण इसलिए नहीं देते हैं कि तुम्हारी स्थिति सुधर जाए। बल्कि हम करोड़ों का ऋण इसलिए बांटते और माफ करते हैं कि तुम हमेशा हमें ही चुनो और फिर से कर्ज के चक्रव्यूह में फंस जाओ।

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