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तनाव घटाने को सिलेबस में बदलाव के लिए मंत्रालय ने मांगे सुझाव

स्टूडेंट्स पर पढ़ाई के बोझ से बढ़ते तनाव को घटाने के लिए अब मानव संसाधन मंत्रालय ने स्कूलों से सहयोग लेने का निर्णय...

Bhaskar News Network | Last Modified - Apr 02, 2018, 02:45 AM IST

स्टूडेंट्स पर पढ़ाई के बोझ से बढ़ते तनाव को घटाने के लिए अब मानव संसाधन मंत्रालय ने स्कूलों से सहयोग लेने का निर्णय लिया है। इसके तहत सीबीएसई के जरिए स्कूलों से सिलेबस में फेरबदल या उसमें कुछ रोचक पहलू शामिल करने के सुझाव मांगे हैं। इसका मकसद यही है कि स्टूडेंट्स की पढ़ाई को बोझिल बनने से रोका जाए और उनका पढ़ाई में रुझान पैदा किया जा सके। ये सुझाव पहली क्लास से बारहवीं क्लास के लिए मांगे गए हैं। इस संदर्भ में स्कूलों को अपने सुझाव 6 अप्रैल तक सीबीएसई की वेबसाइट पर जमा कराने होंगे। स्कूलों से मिले सुझाव के बाद मंत्रालय उन्हें अमल में लाएगा।

आठवीं के बाद पढ़ाई के बोझ से तनाव बढ़ रहा, इसे घटाने के लिए नौवीं से पढ़ाए जाएं स्पेशल सब्जेक्ट

आठवीं तक सामान्य विषय की पढ़ाई

हरियाणा प्रोग्रेसिव स्कूल एसोसिएशन के अनुसार कई स्कूलों ने अपने सुझाव ऑनलाइन जमा करा दिए हैं। स्कूलों का कहना है कि आठवीं तक सामान्य विषय की पढ़ाई कराई जानी चाहिए, जबकि नौवीं से स्टूडेंट्स को स्पेशल स्ट्रीम पढ़ाए जाएं, ताकि वह 11वीं,12वीं की बोर्ड परीक्षा के लिए तैयार हो सकें। अभी 11वीं से स्टूडेंट अपनी पसंद की स्ट्रीम चुन सकता है। दोनों क्लास में साइंस का सिलेबस काफी टफ है। परीक्षा में अधिकतर सीबीएसई स्कूलों का प्रदर्शन साइंस में औसत रहता है।

सिलेबस में संतुलन बनाना सबसे जरूरी

खेलों का पाठ्यक्रम भी किया जाए शामिल

स्कूलों में खेलों की गतिविधियां केवल नाममात्र की हैं। ऐसे मे सुझाव भेजा गया है कि खेलों को भी पाठ्यक्रम के रूप में सिलेबस में शामिल किया जाए। इससे स्टूडेंट्स को प्रत्येक खेल के नियमों की पूरी जानकारी हो सके। हर खेल में खिलाड़ी के अलावा भी कई ऐसे विकल्प होते हैं जिनमें शानदार भविष्य बनाया जा सकता है।

शिक्षाविद डीसी चौधरी कहते हैं कि शिक्षाविद स्कूलों के शिक्षक अनुभव के आधार पर अपने सुझाव भेज सकते हैं, लेकिन इस समय स्टूडेंट्स के तनाव को कम करना सबसे बड़ी जरूरत है। इसलिए पाठ्यक्रम को किताबी ज्ञान के साथ व्यावहारिक बनाना अधिक आवश्यक है। स्कूलों के स्टूडेंट्स को हुनरमंद बनाना अधिक आवश्यक है, जिससे पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्हें अलग से कोई कोर्स करने की आवश्यकता न पड़े। विद्या मंदिर पब्लिक स्कूल के प्राचार्य आनंद गुप्ता के अनुसार सिलेबस में संतुलन बनाना काफी जरूरी है। दसवीं क्लास में सिलेबस काफी कम है, जबकि ग्यारहवीं और बारहवीं का सिलेबस काफी अधिक है। ऐसे में दसवीं क्लास पास करके आने वाले स्टूडेंट्स काे काफी परेशानी होती है। शुरुआती चरण में ग्यारहवीं और बारहवीं के स्टूडेंट्स अधिक सिलेबस होने के कारण तनाव भी महसूस करने लगते हैं। इसलिए दसवीं का सिलेबस बढ़ाया जाए।

6 अप्रैल तक स्कूलों को जमा करने होंगे सुझाव

हरियाणा प्रोग्रेसिव स्कूल एसोसिएशन के अध्यक्ष एसएस गोसांई के अनुसार 6 अप्रैल तक सभी स्कूलों को अपने सुझाव सीबीएसई में जमा कराने होंगे। सुझाव जमा करने के लिए सीबीएसई की वेबसाइट पर ही एक प्रोफार्मा दिया गया है। इसमें हिंदी या अंग्रेजी भाषा में सुझाव लिखकर भेजा जा सकता है।

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