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रिजेक्ट होना ज़िंदगी का बड़ा तोहफा

मुझे यकीन है हाल ही में हुए पेपर लीक से परीक्षा देने वाले बहुत सारे छात्र व्यथित और क्रोधित होंगे। उन्हें फिर से...

Bhaskar News Network | Last Modified - Apr 02, 2018, 02:45 AM IST

रिजेक्ट होना ज़िंदगी का बड़ा तोहफा
मुझे यकीन है हाल ही में हुए पेपर लीक से परीक्षा देने वाले बहुत सारे छात्र व्यथित और क्रोधित होंगे। उन्हें फिर से परीक्षा देनी होगी और इससे उनकी छुटि्टयों के या अन्य प्लान प्रभावित होंगे। निश्चित ही शिक्षा व्यवस्था को कड़ाई बरतकर ऐसी चीजों को होने से रोकना चाहिए। लेकिन, किसी छात्र को पेपर लीक को किस तरह लेना चाहिए? सच कहूं तो छात्र पेपर लीक को जो अध्ययन किया है, उसमें सुधार के मौके के रूप में देख सकते हंै। चूंकि वे पहले ही परीक्षा दे चुके हैं तो उनका बहुत अच्छा अभ्यास हो चुका है, अब उसमें सिर्फ पेपर के तीन घंटे और जुड़े हैं बस!

मेरे साथ भी ऐसा हुआ था, जब आठवीं कक्षा में स्कूल शिफ्ट करने के दौरान मुझे एक साल का नुकसान हो गया। उन दिनों कोई भी इसे बहुत बुरा समझता पर मुझे बाद में लगा कि अच्छा हुआ यह मेरे साथ हुआ, क्योंकि इससे मैं कड़ी मेहनत करने पर मजबूर हुआ और मुझमें सफल होने की तीव्र इच्छा पैदा हुई। इस वजह से मैं 10वीं कक्षा में प्रथम आया। शेष समय तो उनका ही है, जिसमें वे जो चाहते हैं वह कर सकते हैं। जो भी सफल हुए हैं उनका रवैया हर स्थिति में सकारात्मकता देखने का रहा है।

आज अरबों लोग वॉट्सएप इस्तेमाल करते हैं, ज्यादा संभावना यही है कि आप भी कर रहे होंगे। लेकिन शायद आपको पता हो कि इसके संस्थापक ब्रायन एक्टन और जेन कुम बड़ी शिद्‌दत से फेसबुक में जॉब पाने का प्रयास कर रहे थे पर नाकाम रहे। यही ठुकराया जाना उनके लिए सबसे बड़ा अवसर सिद्ध हुआ। दोनों ने 2009 में मिलकर वॉट्सएप स्थापित किया और पांच साल बाद उसी फेसबुक को 19 अरब डॉलर में बेच दिया। कल्पना कीजिए फेसबुक उन्हें नहीं ठुकराती तो उन्हें वॉट्सएप का निर्माण करके 19 अरब डॉलर कमाने का मौका नहीं मिलता। अपनी यात्रा में क्या उन्हें चुनौतियों का सामना करना पड़ा? बेशक उन्हें करना पड़ा- लेकिन, चुनौतियों ने उन्हें शक्तिशाली बनाया। ज़िंदगी भी बॉडी बिल्डिंग की तरह है। मांसपेशियां तभी बनती हैं, जब यह अधिक और अधिक वजन उठाती हैं। जीवन में भी जब हम चुनौतियों का सामना करते हैं और खुद को उस कसौटी पर उतारते हैं तो हम आगे बढ़ते हैं। आपकी तरह ही दो और युवा ऐसे थे, जो अपना किराया भी नहीं चुका पाते थे। उनके मकान मालिक ने उन्हें मकान खाली करने का नोटिस दे दिया था और उन्हें बहुत जल्दी कहीं से पैसे जुटाने थे। उन्होंने अपने हॉल का सोने का हिस्सा किराये पर देने का फैसला किया, जहां लोग अपने एयर बेड पर सो सकते थे। इससे उन्हें एयरबीएनबी कंपनी निर्मित करने का आइडिया आया, जो आज अरबों डॉलर की कंपनी है। यदि ब्रायन चेस्की और जो गेब्बिया को अार्थिक परेशानी का सामना नहीं करना पड़ता तो वे एयरबीएनबी की स्थापना नहीं कर पाते।

सच तो यह है कि कई बार मुझे लगता है कि जो लोग पैदाइशी अमीर नहीं हैं वे भाग्यवान होते हैं, क्योंकि उन्हें अपने लक्ष्य हासिल करने के लिए अधिक कड़ी मेहनत करनी पड़ती है, अधिक चतुराई से काम करना पड़ता है। मैंने पांच वर्ष की उम्र में खिलौने बेचना शुरू किया था और स्कूल में भी मैं कुछ न कुछ बेचता रहता था। मुझमें सीखने और आगे बढ़ने का जुनून था। मुझे यकीन है कि मैं पैदाइशी धनी होता तो इतनी कड़ी मेहनत कर ‘द हेप्योनैयर’ सीरिज से अपने आइडिया शेयर कर लाखों लोगों को प्रेरित नहीं कर पाता। दुनिया में देखें तो जापान से लेकर जर्मनी तक सबसे ज्यादा प्रगतिशील और प्रगत राष्ट्र वे ही हैं, जहां तेल और सोने जैसे प्राकृतिक संसाधन बहुतायत में नहीं हैं। वहां लोग अपने दिमाग का इस्तेमाल करने और कड़ी मेहनत करने के लिए प्रेरित हुए। दूसरी तरफ अफ्रीका और मध्यपूर्व में इतने सारे देश हैं, जहां सोने व तेल के भंडार हंै लेकिन, ज्यादातर इन्हीं इलाकों में अधिकतम गरीबी और युद्ध जैसी परिस्थितियां हैं। मानव मस्तिष्क चुनौती दिए जाने पर विकसित होता है। इसीलिए हमें हमेशा चुनौती से बचने की नहीं, बल्कि उनका सामना करने की शक्ति देने की दुआ मांगनी चाहिए।

हमारे समय की तीसरी सबसे बड़ी सफलता उन दो युवाओं को मिली, जो एक स्टेशन पर टैक्सी हासिल नहीं कर सके। बहुत ठंड थी और बारिश भी हो रही थी पर कोई टैक्सी उन्हें उनके तय स्थान पर ले जाने को तैयार नहीं थी। इस कुंठा को उन्होंेने चुनौती बना लिया अौर तय किया कि किसी और को ऐसी स्थिति का सामना नहीं करने देंगे। उबर ने लोगों के शहर में इधर-उधर जाने के तरीके में क्रांति ला दी। संस्थापक ट्रैविस कैलेनिक और गैलेट कैम्प को अरबपति बन गए।

कितनी बार किसी कंपनी ने आपको खारिज किया है? तब आप कैसा महसूस करते हैं? अगली बार आपके सामने चुनौती आए या कोई आपको रिजेक्ट कर दे तो खुद से पूछे- मैं अपने दिमाग में मौजूद असीमित शक्ति का कैसे इस्तेमाल करूं कि मेरे भीतर मौजूद क्षमता बाहर निकल आए? यह चुनौती तो सिर्फ मेरी मानसिक मांसपेशियों को शक्तिशाली बनाने के लिए हैं और भविष्य में आगे कुछ अविश्वसनीय मेरा इंतजार कर रहा है। बेस्ट ऑफ लक, मुझे यकीन है कि आप ज़िंदगी के इस शानदार तोहफे का सर्वोत्तम लाभ उठाएंगे, जो हम सबके पास है।

योगेश छाबरिया

हेप्योनैयर सीरिज और चिकन सूप फॉर सोल सीरिज के एक हिस्से के मशहूर लेखक

मुझे यकीन है हाल ही में हुए पेपर लीक से परीक्षा देने वाले बहुत सारे छात्र व्यथित और क्रोधित होंगे। उन्हें फिर से परीक्षा देनी होगी और इससे उनकी छुटि्टयों के या अन्य प्लान प्रभावित होंगे। निश्चित ही शिक्षा व्यवस्था को कड़ाई बरतकर ऐसी चीजों को होने से रोकना चाहिए। लेकिन, किसी छात्र को पेपर लीक को किस तरह लेना चाहिए? सच कहूं तो छात्र पेपर लीक को जो अध्ययन किया है, उसमें सुधार के मौके के रूप में देख सकते हंै। चूंकि वे पहले ही परीक्षा दे चुके हैं तो उनका बहुत अच्छा अभ्यास हो चुका है, अब उसमें सिर्फ पेपर के तीन घंटे और जुड़े हैं बस!

मेरे साथ भी ऐसा हुआ था, जब आठवीं कक्षा में स्कूल शिफ्ट करने के दौरान मुझे एक साल का नुकसान हो गया। उन दिनों कोई भी इसे बहुत बुरा समझता पर मुझे बाद में लगा कि अच्छा हुआ यह मेरे साथ हुआ, क्योंकि इससे मैं कड़ी मेहनत करने पर मजबूर हुआ और मुझमें सफल होने की तीव्र इच्छा पैदा हुई। इस वजह से मैं 10वीं कक्षा में प्रथम आया। शेष समय तो उनका ही है, जिसमें वे जो चाहते हैं वह कर सकते हैं। जो भी सफल हुए हैं उनका रवैया हर स्थिति में सकारात्मकता देखने का रहा है।

आज अरबों लोग वॉट्सएप इस्तेमाल करते हैं, ज्यादा संभावना यही है कि आप भी कर रहे होंगे। लेकिन शायद आपको पता हो कि इसके संस्थापक ब्रायन एक्टन और जेन कुम बड़ी शिद्‌दत से फेसबुक में जॉब पाने का प्रयास कर रहे थे पर नाकाम रहे। यही ठुकराया जाना उनके लिए सबसे बड़ा अवसर सिद्ध हुआ। दोनों ने 2009 में मिलकर वॉट्सएप स्थापित किया और पांच साल बाद उसी फेसबुक को 19 अरब डॉलर में बेच दिया। कल्पना कीजिए फेसबुक उन्हें नहीं ठुकराती तो उन्हें वॉट्सएप का निर्माण करके 19 अरब डॉलर कमाने का मौका नहीं मिलता। अपनी यात्रा में क्या उन्हें चुनौतियों का सामना करना पड़ा? बेशक उन्हें करना पड़ा- लेकिन, चुनौतियों ने उन्हें शक्तिशाली बनाया। ज़िंदगी भी बॉडी बिल्डिंग की तरह है। मांसपेशियां तभी बनती हैं, जब यह अधिक और अधिक वजन उठाती हैं। जीवन में भी जब हम चुनौतियों का सामना करते हैं और खुद को उस कसौटी पर उतारते हैं तो हम आगे बढ़ते हैं। आपकी तरह ही दो और युवा ऐसे थे, जो अपना किराया भी नहीं चुका पाते थे। उनके मकान मालिक ने उन्हें मकान खाली करने का नोटिस दे दिया था और उन्हें बहुत जल्दी कहीं से पैसे जुटाने थे। उन्होंने अपने हॉल का सोने का हिस्सा किराये पर देने का फैसला किया, जहां लोग अपने एयर बेड पर सो सकते थे। इससे उन्हें एयरबीएनबी कंपनी निर्मित करने का आइडिया आया, जो आज अरबों डॉलर की कंपनी है। यदि ब्रायन चेस्की और जो गेब्बिया को अार्थिक परेशानी का सामना नहीं करना पड़ता तो वे एयरबीएनबी की स्थापना नहीं कर पाते।

सच तो यह है कि कई बार मुझे लगता है कि जो लोग पैदाइशी अमीर नहीं हैं वे भाग्यवान होते हैं, क्योंकि उन्हें अपने लक्ष्य हासिल करने के लिए अधिक कड़ी मेहनत करनी पड़ती है, अधिक चतुराई से काम करना पड़ता है। मैंने पांच वर्ष की उम्र में खिलौने बेचना शुरू किया था और स्कूल में भी मैं कुछ न कुछ बेचता रहता था। मुझमें सीखने और आगे बढ़ने का जुनून था। मुझे यकीन है कि मैं पैदाइशी धनी होता तो इतनी कड़ी मेहनत कर ‘द हेप्योनैयर’ सीरिज से अपने आइडिया शेयर कर लाखों लोगों को प्रेरित नहीं कर पाता। दुनिया में देखें तो जापान से लेकर जर्मनी तक सबसे ज्यादा प्रगतिशील और प्रगत राष्ट्र वे ही हैं, जहां तेल और सोने जैसे प्राकृतिक संसाधन बहुतायत में नहीं हैं। वहां लोग अपने दिमाग का इस्तेमाल करने और कड़ी मेहनत करने के लिए प्रेरित हुए। दूसरी तरफ अफ्रीका और मध्यपूर्व में इतने सारे देश हैं, जहां सोने व तेल के भंडार हंै लेकिन, ज्यादातर इन्हीं इलाकों में अधिकतम गरीबी और युद्ध जैसी परिस्थितियां हैं। मानव मस्तिष्क चुनौती दिए जाने पर विकसित होता है। इसीलिए हमें हमेशा चुनौती से बचने की नहीं, बल्कि उनका सामना करने की शक्ति देने की दुआ मांगनी चाहिए।

हमारे समय की तीसरी सबसे बड़ी सफलता उन दो युवाओं को मिली, जो एक स्टेशन पर टैक्सी हासिल नहीं कर सके। बहुत ठंड थी और बारिश भी हो रही थी पर कोई टैक्सी उन्हें उनके तय स्थान पर ले जाने को तैयार नहीं थी। इस कुंठा को उन्होंेने चुनौती बना लिया अौर तय किया कि किसी और को ऐसी स्थिति का सामना नहीं करने देंगे। उबर ने लोगों के शहर में इधर-उधर जाने के तरीके में क्रांति ला दी। संस्थापक ट्रैविस कैलेनिक और गैलेट कैम्प को अरबपति बन गए।

कितनी बार किसी कंपनी ने आपको खारिज किया है? तब आप कैसा महसूस करते हैं? अगली बार आपके सामने चुनौती आए या कोई आपको रिजेक्ट कर दे तो खुद से पूछे- मैं अपने दिमाग में मौजूद असीमित शक्ति का कैसे इस्तेमाल करूं कि मेरे भीतर मौजूद क्षमता बाहर निकल आए? यह चुनौती तो सिर्फ मेरी मानसिक मांसपेशियों को शक्तिशाली बनाने के लिए हैं और भविष्य में आगे कुछ अविश्वसनीय मेरा इंतजार कर रहा है। बेस्ट ऑफ लक, मुझे यकीन है कि आप ज़िंदगी के इस शानदार तोहफे का सर्वोत्तम लाभ उठाएंगे, जो हम सबके पास है।

मुझे यकीन है हाल ही में हुए पेपर लीक से परीक्षा देने वाले बहुत सारे छात्र व्यथित और क्रोधित होंगे। उन्हें फिर से परीक्षा देनी होगी और इससे उनकी छुटि्टयों के या अन्य प्लान प्रभावित होंगे। निश्चित ही शिक्षा व्यवस्था को कड़ाई बरतकर ऐसी चीजों को होने से रोकना चाहिए। लेकिन, किसी छात्र को पेपर लीक को किस तरह लेना चाहिए? सच कहूं तो छात्र पेपर लीक को जो अध्ययन किया है, उसमें सुधार के मौके के रूप में देख सकते हंै। चूंकि वे पहले ही परीक्षा दे चुके हैं तो उनका बहुत अच्छा अभ्यास हो चुका है, अब उसमें सिर्फ पेपर के तीन घंटे और जुड़े हैं बस!

मेरे साथ भी ऐसा हुआ था, जब आठवीं कक्षा में स्कूल शिफ्ट करने के दौरान मुझे एक साल का नुकसान हो गया। उन दिनों कोई भी इसे बहुत बुरा समझता पर मुझे बाद में लगा कि अच्छा हुआ यह मेरे साथ हुआ, क्योंकि इससे मैं कड़ी मेहनत करने पर मजबूर हुआ और मुझमें सफल होने की तीव्र इच्छा पैदा हुई। इस वजह से मैं 10वीं कक्षा में प्रथम आया। शेष समय तो उनका ही है, जिसमें वे जो चाहते हैं वह कर सकते हैं। जो भी सफल हुए हैं उनका रवैया हर स्थिति में सकारात्मकता देखने का रहा है।

आज अरबों लोग वॉट्सएप इस्तेमाल करते हैं, ज्यादा संभावना यही है कि आप भी कर रहे होंगे। लेकिन शायद आपको पता हो कि इसके संस्थापक ब्रायन एक्टन और जेन कुम बड़ी शिद्‌दत से फेसबुक में जॉब पाने का प्रयास कर रहे थे पर नाकाम रहे। यही ठुकराया जाना उनके लिए सबसे बड़ा अवसर सिद्ध हुआ। दोनों ने 2009 में मिलकर वॉट्सएप स्थापित किया और पांच साल बाद उसी फेसबुक को 19 अरब डॉलर में बेच दिया। कल्पना कीजिए फेसबुक उन्हें नहीं ठुकराती तो उन्हें वॉट्सएप का निर्माण करके 19 अरब डॉलर कमाने का मौका नहीं मिलता। अपनी यात्रा में क्या उन्हें चुनौतियों का सामना करना पड़ा? बेशक उन्हें करना पड़ा- लेकिन, चुनौतियों ने उन्हें शक्तिशाली बनाया। ज़िंदगी भी बॉडी बिल्डिंग की तरह है। मांसपेशियां तभी बनती हैं, जब यह अधिक और अधिक वजन उठाती हैं। जीवन में भी जब हम चुनौतियों का सामना करते हैं और खुद को उस कसौटी पर उतारते हैं तो हम आगे बढ़ते हैं। आपकी तरह ही दो और युवा ऐसे थे, जो अपना किराया भी नहीं चुका पाते थे। उनके मकान मालिक ने उन्हें मकान खाली करने का नोटिस दे दिया था और उन्हें बहुत जल्दी कहीं से पैसे जुटाने थे। उन्होंने अपने हॉल का सोने का हिस्सा किराये पर देने का फैसला किया, जहां लोग अपने एयर बेड पर सो सकते थे। इससे उन्हें एयरबीएनबी कंपनी निर्मित करने का आइडिया आया, जो आज अरबों डॉलर की कंपनी है। यदि ब्रायन चेस्की और जो गेब्बिया को अार्थिक परेशानी का सामना नहीं करना पड़ता तो वे एयरबीएनबी की स्थापना नहीं कर पाते।

सच तो यह है कि कई बार मुझे लगता है कि जो लोग पैदाइशी अमीर नहीं हैं वे भाग्यवान होते हैं, क्योंकि उन्हें अपने लक्ष्य हासिल करने के लिए अधिक कड़ी मेहनत करनी पड़ती है, अधिक चतुराई से काम करना पड़ता है। मैंने पांच वर्ष की उम्र में खिलौने बेचना शुरू किया था और स्कूल में भी मैं कुछ न कुछ बेचता रहता था। मुझमें सीखने और आगे बढ़ने का जुनून था। मुझे यकीन है कि मैं पैदाइशी धनी होता तो इतनी कड़ी मेहनत कर ‘द हेप्योनैयर’ सीरिज से अपने आइडिया शेयर कर लाखों लोगों को प्रेरित नहीं कर पाता। दुनिया में देखें तो जापान से लेकर जर्मनी तक सबसे ज्यादा प्रगतिशील और प्रगत राष्ट्र वे ही हैं, जहां तेल और सोने जैसे प्राकृतिक संसाधन बहुतायत में नहीं हैं। वहां लोग अपने दिमाग का इस्तेमाल करने और कड़ी मेहनत करने के लिए प्रेरित हुए। दूसरी तरफ अफ्रीका और मध्यपूर्व में इतने सारे देश हैं, जहां सोने व तेल के भंडार हंै लेकिन, ज्यादातर इन्हीं इलाकों में अधिकतम गरीबी और युद्ध जैसी परिस्थितियां हैं। मानव मस्तिष्क चुनौती दिए जाने पर विकसित होता है। इसीलिए हमें हमेशा चुनौती से बचने की नहीं, बल्कि उनका सामना करने की शक्ति देने की दुआ मांगनी चाहिए।

हमारे समय की तीसरी सबसे बड़ी सफलता उन दो युवाओं को मिली, जो एक स्टेशन पर टैक्सी हासिल नहीं कर सके। बहुत ठंड थी और बारिश भी हो रही थी पर कोई टैक्सी उन्हें उनके तय स्थान पर ले जाने को तैयार नहीं थी। इस कुंठा को उन्होंेने चुनौती बना लिया अौर तय किया कि किसी और को ऐसी स्थिति का सामना नहीं करने देंगे। उबर ने लोगों के शहर में इधर-उधर जाने के तरीके में क्रांति ला दी। संस्थापक ट्रैविस कैलेनिक और गैलेट कैम्प को अरबपति बन गए।

कितनी बार किसी कंपनी ने आपको खारिज किया है? तब आप कैसा महसूस करते हैं? अगली बार आपके सामने चुनौती आए या कोई आपको रिजेक्ट कर दे तो खुद से पूछे- मैं अपने दिमाग में मौजूद असीमित शक्ति का कैसे इस्तेमाल करूं कि मेरे भीतर मौजूद क्षमता बाहर निकल आए? यह चुनौती तो सिर्फ मेरी मानसिक मांसपेशियों को शक्तिशाली बनाने के लिए हैं और भविष्य में आगे कुछ अविश्वसनीय मेरा इंतजार कर रहा है। बेस्ट ऑफ लक, मुझे यकीन है कि आप ज़िंदगी के इस शानदार तोहफे का सर्वोत्तम लाभ उठाएंगे, जो हम सबके पास है।

मुझे यकीन है हाल ही में हुए पेपर लीक से परीक्षा देने वाले बहुत सारे छात्र व्यथित और क्रोधित होंगे। उन्हें फिर से परीक्षा देनी होगी और इससे उनकी छुटि्टयों के या अन्य प्लान प्रभावित होंगे। निश्चित ही शिक्षा व्यवस्था को कड़ाई बरतकर ऐसी चीजों को होने से रोकना चाहिए। लेकिन, किसी छात्र को पेपर लीक को किस तरह लेना चाहिए? सच कहूं तो छात्र पेपर लीक को जो अध्ययन किया है, उसमें सुधार के मौके के रूप में देख सकते हंै। चूंकि वे पहले ही परीक्षा दे चुके हैं तो उनका बहुत अच्छा अभ्यास हो चुका है, अब उसमें सिर्फ पेपर के तीन घंटे और जुड़े हैं बस!

मेरे साथ भी ऐसा हुआ था, जब आठवीं कक्षा में स्कूल शिफ्ट करने के दौरान मुझे एक साल का नुकसान हो गया। उन दिनों कोई भी इसे बहुत बुरा समझता पर मुझे बाद में लगा कि अच्छा हुआ यह मेरे साथ हुआ, क्योंकि इससे मैं कड़ी मेहनत करने पर मजबूर हुआ और मुझमें सफल होने की तीव्र इच्छा पैदा हुई। इस वजह से मैं 10वीं कक्षा में प्रथम आया। शेष समय तो उनका ही है, जिसमें वे जो चाहते हैं वह कर सकते हैं। जो भी सफल हुए हैं उनका रवैया हर स्थिति में सकारात्मकता देखने का रहा है।

आज अरबों लोग वॉट्सएप इस्तेमाल करते हैं, ज्यादा संभावना यही है कि आप भी कर रहे होंगे। लेकिन शायद आपको पता हो कि इसके संस्थापक ब्रायन एक्टन और जेन कुम बड़ी शिद्‌दत से फेसबुक में जॉब पाने का प्रयास कर रहे थे पर नाकाम रहे। यही ठुकराया जाना उनके लिए सबसे बड़ा अवसर सिद्ध हुआ। दोनों ने 2009 में मिलकर वॉट्सएप स्थापित किया और पांच साल बाद उसी फेसबुक को 19 अरब डॉलर में बेच दिया। कल्पना कीजिए फेसबुक उन्हें नहीं ठुकराती तो उन्हें वॉट्सएप का निर्माण करके 19 अरब डॉलर कमाने का मौका नहीं मिलता। अपनी यात्रा में क्या उन्हें चुनौतियों का सामना करना पड़ा? बेशक उन्हें करना पड़ा- लेकिन, चुनौतियों ने उन्हें शक्तिशाली बनाया। ज़िंदगी भी बॉडी बिल्डिंग की तरह है। मांसपेशियां तभी बनती हैं, जब यह अधिक और अधिक वजन उठाती हैं। जीवन में भी जब हम चुनौतियों का सामना करते हैं और खुद को उस कसौटी पर उतारते हैं तो हम आगे बढ़ते हैं। आपकी तरह ही दो और युवा ऐसे थे, जो अपना किराया भी नहीं चुका पाते थे। उनके मकान मालिक ने उन्हें मकान खाली करने का नोटिस दे दिया था और उन्हें बहुत जल्दी कहीं से पैसे जुटाने थे। उन्होंने अपने हॉल का सोने का हिस्सा किराये पर देने का फैसला किया, जहां लोग अपने एयर बेड पर सो सकते थे। इससे उन्हें एयरबीएनबी कंपनी निर्मित करने का आइडिया आया, जो आज अरबों डॉलर की कंपनी है। यदि ब्रायन चेस्की और जो गेब्बिया को अार्थिक परेशानी का सामना नहीं करना पड़ता तो वे एयरबीएनबी की स्थापना नहीं कर पाते।

सच तो यह है कि कई बार मुझे लगता है कि जो लोग पैदाइशी अमीर नहीं हैं वे भाग्यवान होते हैं, क्योंकि उन्हें अपने लक्ष्य हासिल करने के लिए अधिक कड़ी मेहनत करनी पड़ती है, अधिक चतुराई से काम करना पड़ता है। मैंने पांच वर्ष की उम्र में खिलौने बेचना शुरू किया था और स्कूल में भी मैं कुछ न कुछ बेचता रहता था। मुझमें सीखने और आगे बढ़ने का जुनून था। मुझे यकीन है कि मैं पैदाइशी धनी होता तो इतनी कड़ी मेहनत कर ‘द हेप्योनैयर’ सीरिज से अपने आइडिया शेयर कर लाखों लोगों को प्रेरित नहीं कर पाता। दुनिया में देखें तो जापान से लेकर जर्मनी तक सबसे ज्यादा प्रगतिशील और प्रगत राष्ट्र वे ही हैं, जहां तेल और सोने जैसे प्राकृतिक संसाधन बहुतायत में नहीं हैं। वहां लोग अपने दिमाग का इस्तेमाल करने और कड़ी मेहनत करने के लिए प्रेरित हुए। दूसरी तरफ अफ्रीका और मध्यपूर्व में इतने सारे देश हैं, जहां सोने व तेल के भंडार हंै लेकिन, ज्यादातर इन्हीं इलाकों में अधिकतम गरीबी और युद्ध जैसी परिस्थितियां हैं। मानव मस्तिष्क चुनौती दिए जाने पर विकसित होता है। इसीलिए हमें हमेशा चुनौती से बचने की नहीं, बल्कि उनका सामना करने की शक्ति देने की दुआ मांगनी चाहिए।

हमारे समय की तीसरी सबसे बड़ी सफलता उन दो युवाओं को मिली, जो एक स्टेशन पर टैक्सी हासिल नहीं कर सके। बहुत ठंड थी और बारिश भी हो रही थी पर कोई टैक्सी उन्हें उनके तय स्थान पर ले जाने को तैयार नहीं थी। इस कुंठा को उन्होंेने चुनौती बना लिया अौर तय किया कि किसी और को ऐसी स्थिति का सामना नहीं करने देंगे। उबर ने लोगों के शहर में इधर-उधर जाने के तरीके में क्रांति ला दी। संस्थापक ट्रैविस कैलेनिक और गैलेट कैम्प को अरबपति बन गए।

कितनी बार किसी कंपनी ने आपको खारिज किया है? तब आप कैसा महसूस करते हैं? अगली बार आपके सामने चुनौती आए या कोई आपको रिजेक्ट कर दे तो खुद से पूछे- मैं अपने दिमाग में मौजूद असीमित शक्ति का कैसे इस्तेमाल करूं कि मेरे भीतर मौजूद क्षमता बाहर निकल आए? यह चुनौती तो सिर्फ मेरी मानसिक मांसपेशियों को शक्तिशाली बनाने के लिए हैं और भविष्य में आगे कुछ अविश्वसनीय मेरा इंतजार कर रहा है। बेस्ट ऑफ लक, मुझे यकीन है कि आप ज़िंदगी के इस शानदार तोहफे का सर्वोत्तम लाभ उठाएंगे, जो हम सबके पास है।

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