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भारतीय फेडरेशन ने देरी से भेजी एंट्री, नहीं की स्वीकार

राष्ट्रमंडल खेलों में 500 पदक तक पहुंचने के भारतीय मंसूबों को झटका लगा है। भारतीय एथलेटिक्स फेडरेशन ने तय समय अवधि...

Bhaskar News Network | Last Modified - Apr 02, 2018, 02:50 AM IST

राष्ट्रमंडल खेलों में 500 पदक तक पहुंचने के भारतीय मंसूबों को झटका लगा है। भारतीय एथलेटिक्स फेडरेशन ने तय समय अवधि तक खिलाड़ियों की सूची राष्ट्रमंडल खेल आयोजन समिति को भेजी ही नहीं। इसके चलते भारतीय एथलीटों का चयन होने के बावजूद उन्हें दल में शामिल नहीं किया जा सकेगा।

खिलाड़ियों के ट्रायल तब आयोजित किए जब खिलाड़ियों की अंतिम सूची भेजे जाने की समय अवधि बीत चुकी थी। ऐसे में देरी से भेजी सूची को स्वीकार नहीं किया। इससे खिलाड़ी बहुत निराश हैं।

इनका टूटा सपना : भारतीय टीम में चयन होने के बावजूद आॅस्ट्रेलिया नहीं जाने वाले खिलाड़ियों में हरियाणा का सिद्धार्थ यादव, कर्नाटक की 400 मीटर की धावक विजय कुमारी एवं केरल के लांग जंपर शिव शंकर शामिल है, जिन्होंने अपना बेस्ट प्रदर्शन करते हुए राष्ट्रमंडल खेलों की टीम में जगह बनाई थी।

फेडरेशन के डायरेक्टर ने कहा कि फेडरेशन की गलती नहीं है, उन्होंने समय पर लिस्ट भेजी थी, जब उन्हें याद दिलाया कि लिस्ट 7 मार्च तक भेजनी थी, जबकि पटियाला में ट्रायल 8 मार्च तक चले थे, तब बोले- इसकी जानकारी नहीं है। वहीं भारतीय ओलंपिक संघ के महासचिव राजीव मेहता ने पल्ला झाड़ लिया। उन्होंने कहा कि फेडरेशन को इसके बारे में सूचना दी थी।

क्वालीफाइंग मार्क्स पार करने की उम्मीद नहीं थी

एएफआई सचिव सी के वाल्सन कहा कि यह उम्मीद नहीं थी कि ये क्वालीफाइंग मार्क पार करेंगे। उन्होंने कहा कि अब हमने उम्मीद नहीं छोड़ी है। अपील की है देखते हैं क्या होता है। बता दें कि सिद्धार्थ का मुकाबला 7 मार्च को शाम सात बजे खत्म हुआ था, जिसकी वजह से उसकी प्रविष्टि 8 मार्च को दोपहर में भेजी। वहीं, आईओए द्वारा कॉमनवेल्थ गेम्स के आयोजकों को भेजी सूची में तीनों एथलीटों के नाम शामिल नहीं थे। इस मसले पर एथलीटों के दल की औपचारिक घोषणा ही अंतिम तारीख के निकल जाने के बाद 10 मार्च को हुई थी।

ट्रायल समय पर होते तो मैं भारतीय दल का हिस्सा होता

चयनित एथलीट हरियाणा के सिद्धार्थ यादव ने बताया कि मेरा सपना टूट गया। मैं बहुत निराश हूं, क्योंकि भारतीय टीम में चयन होने के बावजूद मेरा बतौर एथलीट मेरा एक्रीडेशन ही नहीं बन सका। मैं खेलने को तैयार था।

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